Shayari: 'वो तेरी याद थी अब याद आया', पेश हैं इश्‍क़ में डूबे अशआर

Shayari: वो तो ख़ुशबू है हवाओं में बिखर जाएगा...
Shayari: वो तो ख़ुशबू है हवाओं में बिखर जाएगा...

Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) मुहब्‍बत भरे अल्‍फ़ाज़ का नाम है. इसके ज़रिये दिल के जज्‍़बात निकलते हैं और मंज़रे आम पर आते हैं. शायरी में इंसानी जिंदगी के सभी रंग मौजूद हैं...

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  • Last Updated: October 21, 2020, 7:01 AM IST
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Shayari: आज पेश हैं शायरों की मुहब्‍बत भरी दुनिया के वे रंग जिनमें इश्‍क़ की कसक है, तो धड़कते दिलों की बेक़रारी भी. शायरों (Shayar) ने हर विषय पर क़लम उठाई है. फिर चाहें बात मुहब्‍बत (Love) की हो या इससे जुदा कोई और जज्‍़बात (Emotion) हो. शायरी में बहुत ही ख़ूबसूरती के साथ और गहरे अल्‍फ़ाज़ में इसे पेश किया गया है. जिस तरह दर्द, ख़ुशी, मायूसी और इकरार, इंकार को शायरों ने अपने कलाम में जगह दी है, इसी तरह इंसानी शख्सियत से जुड़े दूसरे जज्‍़बात को भी चुनिंदा अल्‍फ़ाज़ में पिरोया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. आज की इस कड़ी में पेश हैं 'गुनाह' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए.

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
बशीर बद्र
वो तो ख़ुशबू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा


परवीन शाकिर

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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूं मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूं मैं
जिगर मुरादाबादी

दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तेरी याद थी अब याद आया
नासिर काज़मी

हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएंगे
अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ
क़तील शिफ़ाई

मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा
सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए
कृष्ण बिहारी नूर

शदीद प्यास थी फिर भी छुआ न पानी को
मैं देखता रहा दरिया तेरी रवानी को
शहरयार

तुम से बिछड़ कर ज़िंदा हैं
जान बहुत शर्मिंदा हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़

आख़री हिचकी तेरे ज़ानूं पे आए
मौत भी मैं शाइराना चाहता हूं
क़तील शिफ़ाई

यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बांहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे
जौन एलिया

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तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
मैं एक शाम चुरा लूं अगर बुरा न लगे
क़ैसर-उल जाफ़री
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