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Shayari: 'नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए', पढ़िए इश्‍क़ से लबरेज़ कलाम

'पंखुड़ी इक गुलाब की...' Image Credit:Pexels/Suzy-Hazelwood

'पंखुड़ी इक गुलाब की...' Image Credit:Pexels/Suzy-Hazelwood

Shayari: शायरी जहां इश्‍क़ (Love) के रंग में रंगी नज़र आती है, वहीं शायरों (Shayar) ने लबों की ख़ूबसूरती और इसकी नाज़ुक ...अधिक पढ़ें

    Shayari: लबों (Lips) की ख़ूबसूरती और उनकी नाज़ुकी के मज़मून को शायरों (Shayar) ने अपने-अपने अंदाज़ में पेश किया है. कहीं शायरों ने इन्‍हें गुलाब की पंखुड़ी की मिसाल दी है, तो कहीं इनसे झड़ते फूलों का जिक्र किया है. उर्दू शायरी (Urdu Shayari) इश्‍क़ से लबरेज़ कलाम है. इसमें मुहब्‍बत का जिक्र है, तो महबूब की दिलकश अदाओं का भी चर्चा मिलता है. यही वजह है कि इसमें मुहब्‍बत भरे जज्‍़बात (Emotion) के साथ महबूब की ख़ूबसूरती को भी शायरी का विषय बनाया गया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे कलाम जिसमें बात अगर इश्‍क़ की हो, तो चर्चा महबूब की ख़ूबसूरती, उसके होंटों का भी हो. आप भी पढ़िए उनके कलाम के चंद रंग और लुत्‍फ़ उठाइए.

    नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
    पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
    मीर तक़ी मीर

    शौक़ है इस दिल-ए-दरिंदा को
    आप के होंट काट खाने का
    जौन एलिया

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    सो देख कर तेरे रुख़्सार ओ लब यक़ीं आया
    कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी
    अहमद फ़राज़

    कितने शीरीं हैं तेरे लब कि रक़ीब
    गालियां खा के बेमज़ा न हुआ
    मिर्ज़ा ग़ालिब

    सिर्फ़ उस के होंट काग़ज़ पर बना देता हूं मैं
    ख़ुद बना लेती है होंटों पर हंसी अपनी जगह
    अनवर शऊर

    एक बोसे के भी नसीब न हों
    होंठ इतने भी अब ग़रीब न हों
    फ़रहत एहसास

    एक दम उस के होंट चूम लिए
    ये मुझे बैठे बैठे क्या सूझी
    नासिर काज़मी

    तेरे लबों को मिली है शगुफ़्तगी गुल की
    हमारी आंख के हिस्से में झरने आए हैं
    आग़ा निसार

    आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार
    लब चूम लूं तेरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर
    जलील मानिकपुरी

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    उन लबों ने न की मसीहाई
    हम ने सौ सौ तरह से मर देखा
    ख़्वाजा मीर दर्द

    Tags: Famous gazal, Lifestyle

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