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Shayari: 'हम न सोए रात थक कर सो गई', पेश हैं दिलकश कलाम

'Shayari: रात आ कर गुज़र भी जाती है...'
'Shayari: रात आ कर गुज़र भी जाती है...'

Shayari: शायरी में जहां इश्‍क़ (Love) का रंग नज़र आता है, वहीं शायरों (Shayar) ने तारों से झिलमिलाती रात का भी बड़ी खूबसूरती के साथ जिक्र किया है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 7:12 AM IST
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Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में मुहब्‍बत का जिक्र है, तो महबूब की दिलकश अदाओं का भी चर्चा मिलता है. मुहब्‍बत से लबरेज़ जज्‍़बात को शायरों ने बेहद ख़ूबसूरती के साथ पेश किया है. यही वजह है कि इसमें मुहब्‍बत भरे जज्‍़बात (Emotion) के साथ जहां महबूब की ख़ूबसूरती को  शायरी का विषय बनाया गया है, वहीं क़ुदरत की ख़ूबसूरती का भी जिक्र मिलता है. इसमें सुनहरी चमकती सुबह का जिक्र है, तो तारों से झिलमिलाती रात को भी बड़ी खूबसूरती से उकेरा गया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे कलाम जिसमें बात अगर इश्‍क़ की हो, तो चर्चा 'रात' की ख़ूबसूरती का भी हो. आप भी पढ़िए शायरों के दिलकश कलाम के चंद रंग और लुत्‍फ़ उठाइए.

इक रात वो गया था जहां बात रोक के
अब तक रुका हुआ हूं वहीं रात रोक के
फ़रहत एहसास
कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई
आओ कहीं शराब पिएं रात हो गई


निदा फ़ाज़ली

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इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम न सोए रात थक कर सो गई
राही मासूम रज़ा

बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मालूम
जो तेरे हिज्र में गुज़री वो रात रात हुई
फ़िराक़ गोरखपुरी

शब-ए-विसाल है गुल कर दो इन चराग़ों को
ख़ुशी की बज़्म में क्या काम जलने वालों का
दाग़ देहलवी

रात आ कर गुज़र भी जाती है
इक हमारी सहर नहीं होती
इब्न-ए-इंशा

इक उम्र कट गई है तेरे इंतिज़ार में
ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिन से एक रात
फ़िराक़ गोरखपुरी

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इश्क़ के शोले को भड़काओ कि कुछ रात कटे
दिल के अंगारे को दहकाओ कि कुछ रात कटे
मख़दूम मुहिउद्दीन
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