Shayari: 'तस्वीर-ए-यार को है मेरी गुफ़्तुगू पसंद', पढ़ें इश्‍क़ से लबरेज़ कलाम

Shayari: 'जाने कब तक तेरी तस्वीर निगाहों में रही...'
Shayari: 'जाने कब तक तेरी तस्वीर निगाहों में रही...'

Shayari: शेरो-सुख़न (Urdu Shayari) की दुनिया में मुहब्‍बत का जिक्र है, तो महबूब की तस्‍वीर (Picture) को लेकर दिल में जो जज्‍़बात उमड़ते हैं, उन्‍हें भी बेहद ख़ूबसूरत अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 27, 2020, 7:01 AM IST
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Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) जज्‍़बातों का आईना है. इसमें हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ क़लमबंद किया गया है. शायरी में जहां मुहब्‍बत, दर्द से लबरेज़ जज्‍़बातों को जगह मिली है, वहीं इसमें इंसानी ज़िंदगी के दूसरे पहलुओं को भी पूरी अहमियत दी गई है. इसमें महबूब का जिक्र है, तो उसकी तस्‍वीर को लेकर दिल में जो जज्‍़बात उमड़ते हैं, उन्‍हें भी अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया है. एक तरह से कहें तो शायरी (Shayari) दिल से निकली आह है, चाह है और सदा है, जिसे हर शायर ने अपने जुदा अंदाज़ में पेश किया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. आज की इस कड़ी में पेश हैं 'तस्वीर' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए.

तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत
हम जहां में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं
इमाम बख़्श नासिख़
तेरे जमाल की तस्वीर खींच दूं लेकिन
ज़बां में आंख नहीं आंख में ज़बान नहीं


जिगर मुरादाबादी

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आपने तस्वीर भेजी मैंने देखी ग़ौर से
हर अदा अच्छी ख़मोशी की अदा अच्छी नहीं
जलील मानिकपुरी

भेज दी तस्वीर अपनी उन को ये लिख कर 'शकील'
आप की मर्ज़ी है चाहे जिस नज़र से देखिए
शकील बदायूंनी

जाने कब तक तेरी तस्वीर निगाहों में रही
हो गई रात तेरे अक्स को तकते तकते
मैंने फिर तेरे तसव्वुर के किसी लम्हे में
तेरी तस्वीर पे लब रख दिए आहिस्ता से
परवीन शाकिर

चुपचाप सुनती रहती है पहरों शब-ए-फ़िराक़
तस्वीर-ए-यार को है मेरी गुफ़्तुगू पसंद
दाग़ देहलवी

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जिस से ये तबियत बड़ी मुश्किल से लगी थी
देखा तो वो तस्वीर हर इक दिल से लगी थी
अहमद फ़राज़

ज़िंदगी भर के लिए रूठ के जाने वाले
मैं अभी तक तेरी तस्वीर लिए बैठा हूं
क़ैसर-उल जाफ़री
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