Shayari: 'इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताज महल', पढ़ें ताज महल पर अशआर

Shayari: आज पेश हैं ताज महल पर अशआर...
Shayari: आज पेश हैं ताज महल पर अशआर...

Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में जिंदगी के सभी रंग मौजूद हैं. फिर चाहें वह मुहब्‍बत (Love) का रंग हो या किसी और जज्‍़बात (Emotion) पर क़लम उठाई गई हो. आज पेश हैं ताज महल पर शायरों का कलाम...

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  • Last Updated: October 17, 2020, 10:11 AM IST
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Shayari: संगमरमर से बने ताज महल (Taj Mahal) को मुहब्‍बत की मिसाल के तौर पर देखा जाता है. शायरों (Shayar) ने भी जहां मुहब्‍बत (Love) और दूसरे जज्‍़बात (Emotion) पर क़लम उठाई है, वहीं मुहब्‍बत की मिसाल ताज महल को भी अपनी शायरी का विषय बनाया है. शायरी में ताज महल की अहमियत और इसकी ख़ूबसूरती को बेहद खूबसूरत अल्‍फ़ाज़ में पेश किया गया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. आज की इस कड़ी में पेश हैं 'ताज महल' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए...

इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़
साहिर लुधियानवी
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एक कमी थी ताज-महल में
मैं ने तेरी तस्वीर लगा दी
कैफ़ भोपाली

तुम से मिलती-जुलती मैं आवाज़ कहां से लाऊंगा
ताज-महल बन जाए अगर मुमताज़ कहां से लाऊँगा
साग़र आज़मी

इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताज-महल
सारी दुनिया को मोहब्बत की निशानी दी है
शकील बदायूंनी

कितने हाथों ने तराशे ये हसीं ताज-महल
झांकते हैं दर-ओ-दीवार से क्या क्या चेहरे
जमील मलिक

ताज तेरे लिए इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सही
तुझ को इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही
साहिर लुधियानवी

अल्लाह मैं ये ताज महल देख रहा हूं
या पहलू-ए-जमुना में कंवल देख रहा हूं
ये शाम की ज़ुल्फ़ों में सिमटते हुए अनवार
फ़िरदौस-ए-नज़र ताज-महल के दर-ओ-दीवार
महशर बदायूंनी

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है किनारे ये जमुना के इक शाहकार
देखना चांदनी में तुम इस की बहार
याद-ए-मुमताज़ में ये बनाया गया
संग-ए-मरमर से इस को तराशा गया
अमजद हुसैन हाफ़िज़ कर्नाटकी
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