अपना शहर चुनें

States

Meena Kumari ki Shayari: 'चांद तन्हा है आसमां तन्हा', पढ़ें मीना कुमारी के दर्द से लबरेज़ कलाम 

मीना कुमारी की शायरी. फोटो साभार: राजश्री/यूट्यूब
मीना कुमारी की शायरी. फोटो साभार: राजश्री/यूट्यूब

Meena Kumari ki Shayari: मीना कुमारी ने ग़ज़ल (Ghazal) और नज्‍़म के ज़रिये अपने दर्द को शब्‍दों में पिरोया. उनकी शायरी में उनकी जिंदगी की मायूसी और अकेलेपन का दर्द छलकता नज़र आता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2021, 2:36 PM IST
  • Share this:
Meena Kumari ki Shayari: हिंदी फिल्‍मों की 'ट्रेजडी क्वीन' कही जाने वाली मीना कुमारी (Meena Kumri) ने जहां बैजू बावरा, साहिब बीवी और गुलाम और पाकीजा जैसी फिल्मों के ज़रिये अपनी अदाकारी की अलग छाप छोड़ी, वहीं उनकी पहचान एक शायरा के तौर पर भी है. उन्‍होंने ग़ज़ल, नज्‍़म लिखीं और इन्‍हें अपनी आवाज़ भी दी. मीना कुमारी का असल नाम महजबीं बानो (Mahjabeen Bano) था, मगर शायरी में उन्‍होंने 'नाज़' तख़ल्‍लुस रखा. उनकी ग़ज़लों का एक दीवान 'चांद तन्‍हा' (Chand Tanha) नाम से प्रकाशित हो चुका है. मीना कुमारी की शायरी (Meena Kumri ki Shayari) में उनकी जिंदगी की मायूसी और अकेलेपन का दर्द छलकता नज़र आता है. आज हम आपके लिए मीना कुमारी 'नाज़' की शायरी से कुछ चुनिंदा कलाम लेकर हाजिर हुए हैं. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए-

किस्मत में ईनाम नहीं होता
आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता
जब ज़ुल्फ़ की कालिख़ में घुल जाए कोई राही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता



हंस- हंस के जवां दिल के हम क्यों न चुनें टुकडे़
हर शख्स़ की किस्मत में ईनाम नहीं होता

बहते हुए आंसू ने आंखों से कहा थम कर
जो मय से पिघल जाए वो जाम नहीं होता

दिन डूबे हैं या डूबे बारात लिए कश्ती
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता

ये भी पढ़ें - Shayari: 'हम न सोए रात थक कर सो गई', पेश हैं दिलकश कलाम

छोड़ जाएंगे ये जहां तन्हा
चांद तन्हा है आसमां तन्हा
दिल मिला है कहां-कहां तन्हा

बुझ गई आस, छुप गया तारा
थरथराता रहा धुआं तन्हा

ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं,
जिस्म तन्हा है और जां तन्हा

हमसफ़र कोई गर मिले भी कभी
दोनों चलते रहें कहां तन्हा

जलती-बुझती-सी रोशनी के परे
सिमटा-सिमटा-सा एक मकां तन्हा

राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जाएंगे ये जहां तन्हा

ये भी पढ़ें - Shayari:'बच्चों के छोटे हाथों को चांद सितारे छूने दो' शायरी और बचपन

बेचैनी भी साथ मिली
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आंचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूंदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आंखें हंस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली

जब चाहा दिल को समझें, हंसने की आवाज़ सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली

मातें कैसी घातें क्या, चलते रहना आठ पहर
दिल-सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली

होंठों तक आते आते, जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आंखों में, सादा-सी जो बात मिली (साभार/कविताकोश)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज