Shayari: 'उसने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं', बारिश का मौसम और मुहब्‍बत का जिक्र...

शायरी: इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था...Image:Erik-Mclean/Pexels

Shayari: शायरों ने अपने कलाम में जहां इश्‍क़ की बात की है, वहीं इसमें मौसमों का जिक्र भी मिलता है. इनके ज़रिये शायरों ने अपने जज्‍़बात (Emotion) को बेहद दिलकश अल्‍फ़ाज़ में पिरोया है...

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    Shayari: शायरी दिल की आवाज़ है या महबूब से हुई गुफ़्तगू, जो भी है इनके ज़रिये दिल की बात लबों तक आती है. शेरो-सुख़न (Shayari) की इस दुनिया में जहां इश्‍क़ो-मुहब्‍बत (Love) से लबरेज़ जज्‍़बात (Emotion) मि‍लते हैं, वहीं मौसमों का जिक्र भी इसमें खूब आया है. यही वजह है कि शायरों ने हर मौसम को दिलों की कैफियत से जोड़ते हुए अपना नज़रिया बेहद दिलकश अंदाज़ में पेश किया है और अपने कलाम में इसे भी जगह दी है. आज शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर पेश किए जा रहे हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात बारिशों के मौसम की हो और दिल की कैफियत का जिक्र हो. आप भी इन बेशक़ीमती अशआर का लुत्‍़फ़ उठाइए...

    उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं
    भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई
    जमाल एहसानी

    धूप ने गुज़ारिश की
    एक बूंद बारिश की
    मोहम्मद अल्वी

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    तमाम रात नहाया था शहर बारिश में
    वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे
    जमाल एहसानी

    अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है
    जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की
    परवीन शाकिर

    बरसात के आते ही तौबा न रही बाक़ी
    बादल जो नज़र आए बदली मेरी नीयत भी
    हसरत मोहानी

    बारिश शराब-ए-अर्श है ये सोच कर 'अदम'
    बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया
    अब्दुल हमीद अदम

    दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था
    इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था
    क़तील शिफ़ाई

    कच्चे मकान जितने थे बारिश में बह गए
    वर्ना जो मेरा दुख था वो दुख उम्र भर का था
    अख़्तर होशियारपुरी

    बरसात थम चुकी है मगर हर शजर के पास
    इतना तो है कि आप का दामन भिगो सके
    अहसन यूसुफ़ ज़ई

    उस को आना था कि वो मुझ को बुलाता था कहीं
    रात भर बारिश थी उस का रात भर पैग़ाम था
    ज़फ़र इक़बाल

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    शहर की गलियों में गहरी तीरगी गिर्यां रही
    रात बादल इस तरह आए कि मैं तो डर गया
    मुनीर नियाज़ी

    हैरत से तकता है सहरा बारिश के नज़राने को
    कितनी दूर से आई है ये रेत से हाथ मिलाने को
    सऊद उस्मानी

    (साभार/रेख्‍़ता)

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