Shayari: 'अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो', शायरों का दिलकश कलाम

शायरी: 'इस अदा का कहीं जवाब भी है...' Image/shutterstock

Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में मुहब्‍बत की बात की गई है, तो महबूब की शोख़ अदाओं का जिक्र भी मिलता है. इस बहाने शायरों ने अपने दिल की बात दिलकश अंदाज़ में की है...

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    Shayari: उर्दू शायरी की दुनिया में हर जज्‍़बात को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. बात चाहे इश्‍क़ो-मुहब्‍बत (Love) की हो या किसी और मसले पर क़लम उठाई गई हो. शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को पूरी तवज्‍जो मिली है. इसी तरह शायरों ने महबूब की शोख़ अदाओं का जिक्र भी किया है और इन्‍हें अपने ख़ूबसूरत अल्‍फ़ाज़ में पिरोया है. आज शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात 'इश्‍क़ की हो और महबूब की अदाओं का जिक्र हो. आप भी इनका लुत्‍़फ़ उठाइए...

    इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
    लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं
    मिर्ज़ा ग़ालिब

    अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो
    और ये भी देखते हैं कोई देखता न हो
    निज़ाम रामपुरी

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    हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना
    हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना
    अकबर इलाहाबादी

    पूछा जो उन से चांद निकलता है किस तरह
    ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूं
    आरज़ू लखनवी

    पहले इस में इक अदा थी नाज़ था अंदाज़ था
    रूठना अब तो तिरी आदत में शामिल हो गया
    आग़ा शाएर क़ज़लबाश

    ये जो सर नीचे किए बैठे हैं
    जान कितनों की लिए बैठे हैं
    जलील मानिकपूरी

    आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन
    मरता हूं मैं जिस पर वो अदा और ही कुछ है
    अमीर मीनाई

    गुल हो महताब हो आईना हो ख़ुर्शीद हो मीर
    अपना महबूब वही है जो अदा रखता हो
    मीर तक़ी मीर

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    साथ शोख़ी के कुछ हिजाब भी है
    इस अदा का कहीं जवाब भी है
    दाग़ देहलवी

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