'तुमने किया न याद कभी भूल कर हमें', पेश हैं याद पर अशआर

'तुमने किया न याद कभी भूल कर हमें', पेश हैं याद पर अशआर
यादों का जिक्र, मुहब्‍बत की बात...

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में मुहब्‍बत (Love) की बात की गई है, महबूब की बात की गई है और यादों का जिक्र जगह-जगह मिलता है. इश्‍क़ से लबरेज़ और यादों से बावस्‍ता जज्‍़बात (Emotion) को शायरी में पूरी ख़ूबसूरती के साथ पेश किया गया है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 21, 2020, 9:25 AM IST
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शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. इसी तरह शायरी में 'याद' को भी पूरी तवज्‍जो मिली है. जब कोई सामने नहीं होता, तो उसकी याद होती है. शायरी की दुनिया में याद चाहे महबूब की हो या गुज़रे ज़माने को इसको बहुत अहमियत के साथ अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम (Shayari) से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात 'यादों' की हो, और जिक्र दर्द का हो, मुहब्‍बत का हो, तो आप भी इसका लुत्‍़फ़ उठाइए...

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
बशीर बद्र
कर रहा था ग़म-ए-जहां का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए


फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

उस की याद आई है सांसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
राहत इंदौरी

एक मुद्दत से तेरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
फ़िराक़ गोरखपुरी

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है
हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
हसरत मोहानी

नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आती
मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं
हसरत मोहानी

तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें
हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया
बहादुर शाह ज़फ़र

दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तेरी याद थी अब याद आया
नासिर काज़मी

आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर
जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
अहमद फ़राज़
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क्या सितम है कि अब तेरी सूरत
ग़ौर करने पे याद आती है
जौन एलिया

इस ज़िंदगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब
इतना न याद आ कि तुझे भूल जाएं हम
अहमद फ़राज़

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वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
दाग़ देहलवी
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