Shayari: 'दुश्मनों से प्यार होता जाएगा', दुश्‍मनी का जज्‍़बा और शायरों का नज़रिया

'दुश्‍मनी' पर शायरों का नज़रिया...Image Credit/Pixabay
'दुश्‍मनी' पर शायरों का नज़रिया...Image Credit/Pixabay

Shayari: शेरो-सुख़न (Urdu Shayari) की दुनिया में ज़िंदगी के सभी रंग मौजूद हैं. फिर चाहें वह मुहब्‍बत (Love) का रंग हो या किसी और जज्‍़बात (Emotion) पर क़लम उठाई गई हो. इसी कड़ी में आज पेश है 'दुश्‍मनी' पर शायरों का नज़रिया...

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 19, 2020, 6:49 AM IST
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Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) जज्‍़बातों की दुनिया है. इसमें हर जज्‍़बात (Emotion) को क़लमबंद किया गया है. शायरी में जहां मुहब्‍बत, दर्द से लबरेज़ जज्‍़बातों को जगह मिली है, वहीं इसमें इंसानी ज़िंदगी के दूसरे पहलुओं को भी ख़ूबसूरती के साथ जगह दी गई है. इसमें अगर दोस्‍ती का जिक्र है, तो दुश्मनी के जज़्बे को भी अलग ही अंदाज़ में पेश किया गया है. एक तरह से कहें तो शायरी (Shayari) दिल से निकली आह है, चाह है और सदा है, जिसे हर शायर ने अपने जुदा अंदाज़ में पेश किया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. आज की इस कड़ी में पेश हैं 'दुश्‍मनी' पर शायरों का नज़रिया और

दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए
राहत इंदौरी
दुश्मनों से प्यार होता जाएगा
दोस्तों को आज़माते जाइए


ख़ुमार बाराबंकवी

दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है
दोस्तों ने भी क्या कमी की है
हबीब जालिब

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दुश्मनों की जफ़ा का ख़ौफ़ नहीं
दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं
हफ़ीज़ बनारसी

दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आज़ाद हैं
देखना है खींचता है मुझपे पहला तीर कौन
परवीन शाकिर

उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा
वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा
निदा फ़ाज़ली

मौत ही इंसान की दुश्मन नहीं
ज़िंदगी भी जान ले कर जाएगी
अर्श मलसियानी

मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूं
यहां हमदर्द हैं दो-चार मेरे
राहत इंदौरी

मुख़ालिफ़त से मेरी शख़्सियत संवरती है
मैं दुश्मनों का बड़ा एहतिराम करता हूं
बशीर बद्र

दोस्तों से इस क़दर सदमे उठाए जान पर
दिल से दुश्मन की अदावत का गिला जाता रहा
हैदर अली आतिश

ये फ़ित्ना आदमी की ख़ाना-वीरानी को क्या कम है
हुए तुम दोस्त जिसके दुश्मन उस का आसमां क्यूं हो
मिर्ज़ा ग़ालिब

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दुश्मनों से पशेमान होना पड़ा है
दोस्तों का ख़ुलूस आज़माने के बाद
ख़ुमार बाराबंकवी

'अर्श' किस दोस्त को अपना समझूं
सब के सब दोस्त हैं दुश्मन की तरफ़
अर्श मलसियानी
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