'हमारे पांव का कांटा हमीं से निकलेगा', आज पेश हैं कांटों पर अशआर




शायरी में फूलों का जिक्र है तो कांटों को भी तवज्‍जो दी गई है...
शायरी में फूलों का जिक्र है तो कांटों को भी तवज्‍जो दी गई है...

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में इश्‍क़, मुहब्‍बत (Love) की बात की गई है, तो इसमें फूलों के साथ कांटों का भी जिक्र मिलता है. इन्‍हें बहुत ही ख़ूबसूरती के साथ गहरे अल्‍फ़ाज़ में पेश किया गया है. आप भी तवज्‍जो दीजिए दिल से निकले इन अल्‍फ़ाज़ पर...

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  • Last Updated: September 22, 2020, 11:32 AM IST
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शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. इसी तरह शायरी में जहां फूलों की बात की गई है, वहीं कांटों का भी जिक्र है. शायरों ने इसे बहुत ही गहरे अल्‍फ़ाज़ में पिरोया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात तो इश्‍क़ की है, मगर जिक्र 'कांटों' का भी है और शायर की कैफियत, उसके दिल की हालत का बयां है, तो आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए...

न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पांव का कांटा हमीं से निकलेगा
राहत इंदौरी
बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी कांटा गुलाब हो न सका


आरज़ू लखनवी

कांटों से गुज़र जाता हूं दामन को बचा कर
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूं
शकील बदायूंनी

कांटों से दिल लगाओ जो ता-उम्र साथ दें
फूलों का क्या जो सांस की गर्मी न सह सकें
अख़्तर शीरानी

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बहुत हसीन सही सोहबतें गुलों की मगर
वो ज़िंदगी है जो कांटों के दरमियां गुज़रे
जिगर मुरादाबादी

फूल कर ले निबाह कांटों से
आदमी ही न आदमी से मिले
ख़ुमार बाराबंकवी

ख़ार-ए-हसरत बयान से निकला
दिल का कांटा ज़बान से निकला
दाग़ देहलवी

गुलशन-परस्त हूं मुझे गुल ही नहीं अज़ीज़
कांटों से भी निबाह किए जा रहा हूं मैं
जिगर मुरादाबादी

कांटा सा जो चुभा था वो लौ दे गया है क्या
घुलता हुआ लहू में ये ख़ुर्शीद सा है क्या
अदा जाफ़री

ज़ख़्म बिगड़े तो बदन काट के फेंक
वर्ना कांटा भी मोहब्बत से निकाल
महबूब ख़िज़ां

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कांटे तो ख़ैर कांटे हैं इस का गिला ही क्या
फूलों की वारदात से घबरा के पी गया
साग़र सिद्दीक़ी
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