'तेरी आंखों ने तो कुछ और कहा है मुझसे', पढ़ें प्‍यार भरी शायरी

प्‍यार भरी शायरी...
प्‍यार भरी शायरी...

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में मुहब्‍बत (Love) की बात की गई है और दर्दे-जुदाई और इससे लबरेज़ जज्‍़बात (Emotion) को भी पूरी ख़ूबसूरती के साथ पेश किया गया है. आज प्‍यार भरी शायरी में पढ़ें दिल की बात...

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2020, 11:05 AM IST
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शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में मुहब्‍बत भरे हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ पेश किया गया है. शायरी में धड़कते दिल के हर जज्‍़बात को काग़ज़ पर उकेरा गया है. फिर चाहें इश्‍क़ (Love) की बेक़रारी हो या दूरी से उभरी मायूसी. इन जज्‍़बात को शायरों (Shayar) ने बहुत ही गहरे और खूबसूरत अल्‍फ़ाज़ में पिरोया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात 'प्‍यार' की हो और शायर की कैफियत, उसके दिल की हालत का जिक्र हो. तो आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए...

सिर्फ़ उस के होंट काग़ज़ पर बना देता हूं मैं
ख़ुद बना लेती है होंटों पर हंसी अपनी जगह
अनवर शऊर
चंद कलियां नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूं
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूं


साहिर लुधियानवी

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आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूं ख़ून-ए-जिगर होते तक
मिर्ज़ा ग़ालिब

हंस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
क्यूं तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी
अमीर मीनाई

दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं
लोग अब मुझ को तेरे नाम से पहचानते हैं
क़तील शिफ़ाई

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

उस की याद आई है सांसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
राहत इंदौरी

आशिक़ी में 'मीर' जैसे ख़्वाब मत देखा करो
बावले हो जाओगे महताब मत देखा करो
अहमद फ़राज़

उस को रुख़्सत तो किया था मुझे मालूम न था
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला
निदा फ़ाज़ली

लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
तेरी आंखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से
जां निसार अख़्तर

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मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे
मैं हूं दर्द-ए-इश्क़ से जां-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे
शकील बदायूंनी
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