'आज तो मिल के भी जैसे न मिले हों तुझसे', आज पेश हैं मुलाकात पर शायरी

बात मुहब्‍बत की और मुलाकात का जिक्र...
बात मुहब्‍बत की और मुलाकात का जिक्र...

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में मुहब्‍बत (Love) की बात की गई है. मगर इसमें दर्दे-जुदाई और इससे लबरेज़ जज्‍़बात (Emotion) को भी पूरी ख़ूबसूरती के साथ पेश किया गया है. इसी तरह महबूब से मुलाकात के लम्‍हों को भी खूबसूरत अल्‍फ़ाज़ में पिरोया है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 5:29 PM IST
  • Share this:
शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. इसी तरह शायरी में मुहब्‍बत का जिक्र है और महबूब से मुलाकात की बात की गई है. शायरों ने इसे बहुत ही गहरे और खूबसूरत अल्‍फ़ाज़ में पिरोया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात मुहब्‍बत की हो और 'मुलाकात' का जिक्र हो. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए...

आज देखा है तुझ को देर के बाद
आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
नासिर काज़मी
कैसे कह दूं कि मुलाक़ात नहीं होती है
रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है


शकील बदायूंनी

ये भी पढ़ें - 'पूछा जो उनसे चांद निकलता है किस तरह', पेश हैं इश्‍क़ भरे अशआर

जाने वाले से मुलाक़ात न होने पाई
दिल की दिल में ही रही बात न होने पाई
शकील बदायूंनी

गाहे गाहे की मुलाक़ात ही अच्छी है 'अमीर'
क़द्र खो देता है हर रोज़ का आना जाना
अमीर मीनाई

मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी
किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
बशीर बद्र

मिल रही हो बड़े तपाक के साथ
मुझ को यकसर भुला चुकी हो क्या
जौन एलिया

नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूंढ़िए
इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई
निदा फ़ाज़ली

ये भी पढ़ें - 'अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख', आज पेश हैं कश्‍ती पर अशआर

आज तो मिल के भी जैसे न मिले हों तुझ से
चौंक उठते थे कभी तेरी मुलाक़ात से हम
जां निसार अख़्तर

न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
बशीर बद्र

ये मुलाक़ात मुलाक़ात नहीं होती है
बात होती है मगर बात नहीं होती है
हफ़ीज़ जालंधरी
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज