Shayari: 'डरता हूं आसमान से बिजली न गिर पड़े', पढ़ें आसमान पर शायरी

Shayari: खूबसूरत अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया कलाम... Image Credit/Pixabay
Shayari: खूबसूरत अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया कलाम... Image Credit/Pixabay

Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) के आईने में जज्‍़बात झलकते हैं. फिर चाहें वह मुहब्‍बत (Love) का रंग हो या कोई और जज्‍़बात (Emotion) शायरों के कलाम में सभी रंग मौजूद हैं...

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2020, 7:00 AM IST
  • Share this:
Shayari: शायरों (Shayar) ने हर विषय पर क़लम उठाई है. फिर चाहें बात मुहब्‍बत (Love) की हो या इससे जुदा कोई और जज्‍़बात (Emotion) हो. शायरी में बहुत ही ख़ूबसूरती के साथ हर जज्‍़बात को पेश किया गया है. इसमें ग़म, ख़ुशी, मायूसी और इकरार, इंकार को शायरों ने अपने कलाम में जगह दी है. इसी तरह ज़मीन की ख़ूबसूरती को शब्‍दों में पिरोया है, तो सूरज, चांद, सितारे और आसमान की भी बात की गई है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. आज की इस कड़ी में पेश हैं 'आसमान' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए...

यूं जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या
जौन एलिया
उक़ाबी रूह जब बेदार होती है जवानों में
नज़र आती है उन को अपनी मंज़िल आसमानों में


अल्लामा इक़बाल

कभी तो आसमां से चांद उतरे जाम हो जाए
तुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए
बशीर बद्र

ये भी पढ़ें - Shayari: 'कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं', पढ़ें दर्द भरे कलाम

ज़मीन जब भी हुई कर्बला हमारे लिए
तो आसमान से उतरा ख़ुदा हमारे लिए
उबैदुल्लाह अलीम

आसमां अपने इरादों में मगन है, लेकिन
आदमी अपने ख़यालात लिए फिरता है
अनवर मसूद

रफ़ाक़तों का मेरी उस को ध्यान कितना था
ज़मीन ले ली मगर आसमान छोड़ गया
परवीन शाकिर

ज़मीन की कोख ही ज़ख़्मी नहीं अंधेरों से
है आसमां के भी सीने पे आफ़्ताब का ज़ख़्म
इब्न-ए-सफ़ी

वो सो रहा है ख़ुदा दूर आसमानों में
फ़रिश्ते लोरियां गाते हैं उसके कानों में
अब्दुर्रहीम नश्तर

गिरेगी कल भी यही धूप और यही शबनम
इस आसमां से नहीं और कुछ उतरने का
हकीम मंज़ूर

अगर है इंसान का मुक़द्दर ख़ुद अपनी मिट्टी का रिज़्क़ होना
तो फिर ज़मीं पर ये आसमां का वजूद किस क़हर के लिए है
ग़ुलाम हुसैन साजिद

डरता हूं आसमान से बिजली न गिर पड़े
सय्याद की निगाह सू-ए-आशियां नहीं
मोमिन ख़ां मोमिन

बदले हुए से लगते हैं अब मौसमों के रंग
पड़ता है आसमान का साया ज़मीन पर
हमदम कशमीरी

ये भी पढ़ें - Shayari: दिल से निकली आवाज़ है शायरी, आज पढ़ें मुहब्‍बत भरा कलाम

'ज़फ़र' ज़मीं-ज़ाद थे ज़मीं से ही काम रक्खा
जो आसमानी थे आसमानों में रह गए हैं
ज़फ़र इक़बाल
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज