Shayari: 'बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला', पढ़ें इंसान पर शायरी

Shayari: दिलकश अल्‍फ़ाज़ में पिरोई गई शायरी...
Shayari: दिलकश अल्‍फ़ाज़ में पिरोई गई शायरी...

Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में जिंदगी के सभी रंग मौजूद हैं. फिर चाहें वह मुहब्‍बत (Love) का रंग हो या किसी और जज्‍़बात (Emotion) पर क़लम उठाई गई हो. आज पेश है 'इंसान' पर शायरों का कलाम...

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 18, 2020, 9:42 AM IST
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Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) की दुनिया में इंसान को पूरी अहमियत हासिल है और इसमें इंसानी जज्‍़बातों को पूरी अहमियत के साथ पेश किया गया है. फिर चाहें उसके इश्‍क़ (Love) का चर्चा हो या उसका दर्द, शेरो-सुख़न की दुनिया में इसे पूरी तवज्‍जो दी गई है. यही वजह है कि शायरी (Shayari) इंसान को जोड़ती और उससे मेल खाती नज़र आती है.  एक तरह से कहें तो शायरी इंसानी जज्‍़बातों का आईना है, जिसे हर शायर ने अपने जुदा अंदाज़ में पेश किया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. आज की इस कड़ी में पेश हैं 'इंसान' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए.

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना
निदा फ़ाज़ली
सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं
जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं


सुदर्शन फ़ाकिर

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बस-कि दुश्वार है हर काम का आसां होना
आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होना
मिर्ज़ा ग़ालिब

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है
सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है
निदा फ़ाज़ली

घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे
बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला
बशीर बद्र

बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमां जो बस गए
इंसां की शक्ल देखने को हम तरस गए
कैफ़ी आज़मी

उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा
वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा
निदा फ़ाज़ली

आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है
जिगर मुरादाबादी

फ़रिश्ते से बढ़ कर है इंसान बनना
मगर इस में लगती है मेहनत ज्‍़यादा
अल्ताफ़ हुसैन हाली

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'ज़फ़र' आदमी उस को न जानिएगा वो हो कैसा ही साहब-ए-फ़हम-ओ-ज़का
जिसे ऐश में याद-ए-ख़ुदा न रही जिसे तैश में ख़ौफ़-ए-ख़ुदा न रहा
बहादुर शाह ज़फ़र
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