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'तुम जैसी मिडल-क्लास लड़कियों को टिंडर पर नहीं शादी डॉट कॉम पर होना चाहिए'

'तुम जैसी मिडल-क्लास लड़कियों को टिंडर पर नहीं शादी डॉट कॉम पर होना चाहिए'

Photo- news18india

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‘लूजर कहीं का’ और ‘इश्कियापा’ जैसे उपन्यासों के लिए पहचाने जाने वाले लेखक पंकज दुबे की लिखी एक कहानी…

‘लूजर कहीं का’ और ‘इश्कियापा’ जैसे उपन्यासों के लिए पहचाने जाने वाले लेखक पंकज दुबे की लिखी एक कहानी…

‘‘हिट इट ऑर क्विट इट.’’ खाना खाते हुए वह लड़का जोर से चिल्लाया. बालों के स्पाइक्स बनाए वह बेवकूफ होने की हद तक अजीब लग रहा था.

‘‘अपनी बकवास बंद करो और दफा हो जाओ यहां से.’’ किसी उजड़े और वीरान रंग में रंगी जींस पहने वह लड़की उससे दुगुनी आवाज में चिल्लाई. उसका सुर्ख लाल क्रॉप-टॉप जंगल की आग की तरह आंखें चुंधिया रहा था.

‘थ्री वाइज मेन’ क्रिसमस के मौके पर भरा हुआ था. पूरे रेस्तरां में क्रिसमस की साज-सज्जा की गई थी. क्रिसमस ट्री सुंदर घंटियों, तोहफों और तारों से लदा हुआ था. वेटर्ज सैंटा बने सर्व कर रहे थे. एक छोटा-सा सैंटा उन दोनों के बीच रखे एक ग्लास की किनारी पर भी लटक रहा था. लड़के ने सैंटा को वहां से उखाड़ कर लड़की के ऊपर दे मारा, ‘‘तुम जैसी मिडल-क्लास लड़कियों को टिंडर (ऑनलाइन डेटिंग एप) पर नहीं शादी डॉट कॉम पर होना चाहिए.’’ उसका ग़ुस्सा उसके चेहरे पर नुमायां था. वह झटके से उठा और चला गया. अचानक वह पलटा और एक वेटर की क्रिसमस कैप उतार कर खुद लगा ली. बूढ़े सैंटा की तरह कमर झुकाकर और गले में खराश भरकर वह चिल्लाया,’ ‘हो हो हो.’’ सबकी नजरें उस पर आ टिकी थीं. ‘‘जाओ, अपनी रातें तुम सैंटा के साथ ही बिताओ.’’ लड़के की आवाज में छिपा व्यंग्य उसके दिल पर नश्तर की तरह आ लगा.

वह सुपु थी, सुपर्णा.

कैप उछालकर वो जा चुका था और पब के सारे जोड़ों के बीच सुपु अकेली रह गई थी. म्यूजिक और लाउड हो गया था. ‘‘बैंग-बैंग माय बेबी शॉट मी डाउन…’’ डेविड ग्वेटा फुल वॉल्यूम में गा रहा था.

जिंदगी उसके लिए अभी तक राइट स्वाइप साबित नहीं हुई थी.

सुपु बॉलीवुड के एक नामचीन कॉस्टयूम डिजाइनर बागची की असिस्टेंट थी. लेकिन फिलहाल बॉलीवुड की फिल्मों से ज्यादा नाटकीयता उसकी जिंदगी में थी. उसकी जिंदगी किसी फैंसी ड्रेस शो से कम नहीं थी.

दरअसल, उसके दोस्तों ने उसे चुनौती दी थी कि नया साल शुरू होने से पहले उसे अपने लिए कोई साथी खोजना होगा और आज 25 दिसंबर है. सिर्फ छह दिन बाकी हैं और उसे अब तक कोई नहीं मिला है.

इस आजमाइश को शुरू हुए लगभग चालीस दिन बीत चुके हैं. अंधेरी में उसके पास वन बेडरूम फ्लैट था. पर पिछले चालीस दिनों से वह फ्लैट से ज्यादा टिंडर पर मौजूद थी. उसकी जिंदगी लेफ्ट और राइट स्वाइप में उलझ कर रह गई थी. और जब कभी उसकी किस्मत उस पर मेहरबान होती तो वह उसे सिर्फ चार शब्दों में मापती ‘इट वाज अ मैच.’

तो क्रिसमस पर मिला यह मैच उसके लिए सिर दर्द तब हो गया जब मिलते ही लड़के ने उसे बाहर खड़ी कार में ‘क्विकी’ के लिए ऑफर किया. सुपु ने उसे समझाया कि बिना भावनात्मक जुड़ाव हुए वह किसी के साथ हमबिस्तर नहीं हो सकती… वह डेमीसेक्सुअल है. यह सुनते ही वह आगबबूला हो गया और जहर उगलते हुए सुपु पर अपना क्रिसमस बर्बाद करने का आरोप जड़ दिया.

सुपु रोते हुए अपने घर लौट आई. उसके साफ-शफ्फाक चेहरे पर गहरी उदासी थी. रोते-रोते उसके चेहरे पर पिघलते हुए सूरज के सारे रंग चस्पां हो गए थे. उसकी मान्यताओं और मूल्यों को मिला मिडल क्लास का तमगा उसे काफी तकलीफदेह लग रहा था. वह एक अल्हड़-सी लड़की थी जो दुनिया की चिंताओं से बेफिक्र थी. आजादख्याल सुपु रूमी की कविताओं और ओशो के सिद्धांतों का खूबसूरत मेल थी.

सुपु ने अंदर जाकर सारी खिड़कियां खोल दीं और एक गहरी सांस ले जैसे ताजी हवा अपने भीतर भरने की कोशिश की. जब वह इसमें नाकामयाब रही तो उसने फोन उठाकर अपनी बेस्ट फ्रेंड राशि का नंबर मिलाया.

‘‘तुम मुझसे अभी मिल सकती हो?’’ सुपु ने पूछा.

‘‘तुम ठीक तो हो न?’’ राशि की आवाज में चिंता घुली हुई थी.

टूटी हुई आवाज में सुपु बोली, ‘‘मैं हार गई हूं.’’

‘‘कैसी बातें कर रही हो? कहीं तुमने वो चैलेंज गंभीरता से तो नहीं ले लिया? डोंट टेल मी! तुम इतनी बेवकूफ नहीं हो सकती सुपु.’’ राशि ने उसे प्यार से झिड़कते हुए कहा.

‘‘राघव को लगता है कि जबसे वो मुझे छोड़ गया है मैं अकेली हूं. वो सोचता है कि मुझमें किसी को दिलचस्पी नहीं है, न कभी होगी. राशि मैं उसे दिखा देना चाहती हूं कि मैं उससे बेहतर साथी कि हकदार हूं.’’

‘‘ओहो सुपु, वे नशे में धुत्त होकर की गईं बेवकूफाना बातें थीं और तुम उन्हें संजीदगी से ले उन पर अमल कर रही हो.’’.

राशि समझाइश के स्वर में बोली थी.

‘‘हम बाद में बात करते हैं.’’ सुपु ने कहा.

‘‘तुम मेरी पार्टी में तो आ रही हो न? याद है न 31 की रात को?’’ राशि ने पूछा.

‘‘मुझे नहीं मालूम.’’ सुपु ने रूखाई से जवाब देते हुआ कहा. उसका मन किसी से बात करने का नहीं था और पार्टी की बाबत तो कतई नहीं.

उसने गहरी सांस ली और अपने खोल से बाहर आने का निश्चय लिया. नया वर्ष आने में मात्र छह रोज बाकी थे और उससे पहले उसे अपने लिए ‘राइट मैच’ खोजना था. जब सब लोग अपने कामों में मशगूल थे वह अपने अंदर भरे जहर से खुद को खाली करने की राह खोज रही थी.

अगली सुबह ओस की बूंद-सी ताजा थी. समंदर किनारे जॉगिंग करते हुए उसने अपनी सारी चिंताएं समंदर की लहरों के सुपुर्द कर दीं. हाड़-तोड़ मेहनत के बाद वह सूप बनाने के लिए नजदीक के बाजार में सब्जी लेने चली गई. सब्जी वाला फोन पर व्यस्त था. सुपु को देखते ही फोन बगल में रख खींसे निपोरते हुए बोला, ‘‘बेबी जी, सूप बनाना है न? घिया रहने दीजिए, पालक के साथ टमाटर ले लीजिए. उसमें कुछ आंवला भी मिला सकती हैं.’’ भाजी वाला अपने सुझाव दे रहा था.

‘‘तुम चुप रहो और जो मैं कह रही हूं वही करो. मुझे घिया ही चाहिए. पाव भर टिंडे भी रखो… ताजा लग रहे हैं.’’ सुपु की आवाज रूखी थी.

‘‘मुझे टिंडर पर आपकी तस्वीर बहुत अच्छी लगी. नई है न… बेबी.’’ सब्जी वाला अधिक खुलने की कोशिश कर रहा था.

‘‘जितना कहा है उतना करो.’’ सुपु धमकी भरे लहजे में बोली.

‘‘नया फोन है न बेबीजी… मैंने आपको टिंडर पर देखा था.’’ भाजीवाले ने मुस्कुराते हुए कहा.

सुपु विरक्ति से भर उठी. टिंडे भेजने वाला भी टिंडर पर मौजूद था. भाजी वाले ने सब्जियों से भरा थैला उसे पकड़ाया. वह भारी थैले और उससे भी भारी दिल के साथ घर लौट चली.

आभासी संसार शतरंज के खेल की मानिंद उसके साथ दिमागी खेलों में मुब्तिला था. घर पहुंचकर उसने शॉवर लिया और कपड़े पहन एक बार फिर रोने लगी. पूरी मुंबई ने रोशनी और खुशियों का लिहाफ ओढ़ा हुआ था, पर अकेलेपन की पीड़ा ने सुपु को भावनात्मक जड़ता की ओर धकेल दिया था. यकायक वह अपने दोस्तों और परिवार से छिपने लगी थी. वह उनसे तभी मिलना चाहती थी, जब उसके जीवन से अकेलेपन की मनहूसियत छंट जाए.

उसने टिंडर खोला और अपनी प्रोफाइल पर सौ से ऊपर नए स्वाइप देख खुश हो गई. उसने अधिकतर को लेफ्ट स्वाइप किया और कुछ को राइट स्वाइप किया.

इट वाज अ मैच! अचानक सुपु उछल पड़ी. अंततः उसे एक मैच मिल गया था. वह आरव था. दोनों ने खूब सारी बातें की. अपने शौक से लेकर अपने जुनून तक सब एक दूसरे को बताया. आरव एक फोटोग्राफर था. उसकी बातों का विस्तार खाने से लेकर कपड़ों तक, प्रेम से लेकर कविताओं तक समान रूप से फैला हुआ था. वह न सिर्फ अच्छी तस्वीरें खींचता था बल्कि बातें भी जबरदस्त करता था. सुपु को वह बहुत पसंद आया. उससे बातें करते हुए वह ख्वाबों की दुनिया में थी. उसने बाकी प्रोफाइल्स को नजरंदाज कर दिया.

‘‘तुम जितनी नाजुक दिखती हो, क्या उतनी ही नाजुकी से बातें भी करती हो?’’ आरव ने पूछा.

‘‘इसके लिए तुम्हें मुझसे बात करनी होगी.’’ सुपु ने हंसते हुए जवाब दिया.

‘‘क्या हम आवाज का जादू हमारी पहली डेट के लिए बचा कर रखें?’’ आरव ने कहा.

‘‘और वो डेट कब होगी?’’ सुपु ने पूछा.

‘‘जरा शाम का आसमान कुछ और रंगों को पी ले… सूरज कुछ और आसमान के आगोश में समा जाए… उसके बाद हम मिलेंगे.’’ आरव ने जैसे उसके कान में सरगोशी की.

‘‘मुझे पहली बार तुम जैसा कोई मिला है.’’ सुपु ने लिखा.

‘‘मेरे घर पर मेहमान आए हुए हैं. मैं जरा उनसे फ्री हो जाऊं फिर हम मिलते हैं. क्यों न हम नए साल के पहले दिन मिलें? आरव ने कहा.

सुपु को महसूस हो रहा था कि कम-अज-कम इस दफा उसकी जिंदगी को राइट स्वाइप मिलेगा.

31 दिसंबर आ पहुंचा था. उसने आरव को मैसेज किया, ‘‘हमारा मिलना अब एक सूर्यास्त दूर रह गया है.’’ मैसेज करने के बाद उसने मुतमइन होकर बालों का ढीला जूड़ा बांधा और कॉफी के घूंट भरते हुए अखबार के पन्ने पलटने लगी. इतनी खुशनुमा सुबह अरसे बाद उसकी जिंदगी में आई थी. तभी उसके फोन पर राशि का नाम चमका.

‘‘तुम आज रात आ रही हो न?’’ उधर से राशि की घबराई हुई आवाज आई.

‘‘हां बाबा, आ रही हूं.’’ सुपु की आवाज में ठहराव था.

‘‘नहीं, बात दरअसल ये है कि राघव भी आ रहा है तो मुझे लगा कहीं तुम्हें बुरा न लगे.’’ राशि की आवाज में परेशानी थी.

‘‘वो मेरा अतीत है. मेरा उससे या उसकी दी हुई वाहियात चुनौतियों से कोई लेना-देना नहीं है. मेरी जिंदगी में इन सबके अलावा भी बहुत बातें हैं.’’ सुपु किसी संत-सी दार्शनिकता से कह रही थी.

राशि ने रहस्य भरे स्वर में पूछा, ‘‘तुमने सेक्स किया है?’’

‘‘नहीं.’’ सुपु ने हंसते हुए जवाब दिया.

‘‘फिर तुम इतनी सुलझी हुई क्यों लग रही हो?’’ राशि हैरान थी.

‘‘सूर्यास्त.’’ सुपु ने मुस्कुराते हुए कहा.

‘‘तुम न बिल्कुल पागल हो. आज मैं तुम्हें अपने नए दोस्त से मिलवाऊंगी. वो मनोचिकित्सक है,’’ राशि की आवाज में अधीरता थी.

‘‘तुम जेट विमान से भी तेज गति से डेट करती हो. हम जैसे लोगों को देखो. आज रात को मिलती हूं.’’ सुपु ने उसे चिढ़ाते हुए फोन रख दिया.

आज का सूर्यास्त बेहद खास होने वाला था. काले रंग की छोटी-सी लेदर ड्रेस में वह बहुत खूबसूरत लग रही थी. जब वह राशि के स्टूडियो अपार्टमेंट पहुंची तब पार्टी अपने पूरे शबाब पर थी.

राघव किसी नई लड़की के साथ था जो मशहूर पॉप स्टार रिहाना का भद्दा संस्करण लग रही थी.

राघव ने उसे अकेला देख उसका मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘‘मुझे लगा था कि आज रात के लिए तो तुम्हें कोई न कोई मिल ही जाएगा.’’

‘‘मुझे अपनी जिंदगी में इससे बेहतर चुनौतियों का सामना करना है.’’ सुपु का आत्मविश्वास बेजोड़ था.

वोदका के शॉट्स और पानी-पूरी के साथ शाम नशीली हो रही थी. सुपु लगातार आरव के साथ मैसेज पर बनी हुई थी. तभी राशि अपने नए बॉयफ्रेंड को सबसे मिलवाने ले आई. ‘‘यह वरुण है’’ उसने उसका परिचय देते हुए कहा. वरुण ने सारे दोस्तों से हाथ मिलाया. जब सुपु की बारी आई तब दोनों की धड़कनें वहीं थम गईं.

‘‘जैसे ‘डियर जिंदगी’ में आलिया को शाहरुख खान की जरूरत थी वैसे ही इसे तुम्हारी मदद चाहिए होगी.’’ राशि ने शरारत से कहा.

सुपु अपनी बड़ी-बड़ी आंखों में पत्थर-सी कठोरता लिए वरुण को खामोशी से देख रही थी.

सुपु के लिए सैकड़ों सूरज एक साथ डूब गए. वरुण ही टिंडर पर आरव था… वही तस्वीर. उसने अपना बैग उठाया और पार्टी छोड़ कर बाहर निकल आई. सूरज डूब चुका था और इसके साथ ही मिस्टर राइट से मिलने की उसकी उम्मीदें भी दम तोड़ चुकी थीं.

वह चलते-चलते समंदर किनारे आ पहुंची. भीगी रेत उसके तलवों को सुकून पहुंचा रही थी और उसकी रूह को सहला रही थी. बीच पर पसरे अंधेरे में वह अपनी जिंदगी के अंधेरों का हल ढूंढ़ रही थी.

रात यूं ही बीत गई.

सुबह के उजाले में वह राइट स्वाइप तक पहुंचने का सही तरीका देख पा रही थी. वह उठी और मन में दृढ़ निश्चय कर फोन समंदर में फेंक दिया. अब खुद से दोस्ती करने का समय था.

उसने नए साल का पहला सूर्योदय देखा और उगता हुआ सूरज देखने से ज्यादा दिलकश और कुछ भी नहीं था.

Tags: Pankaj dubey

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