हैदराबाद की छात्रा ने चावल के दानों पर लिखी पूरी भगवद् गीता, कुछ ऐसे किया कमाल

देश की पहली महिला माइक्रो आर्टिस्ट- रामागिरी स्वरिका (फोटो साभार- ANI)
देश की पहली महिला माइक्रो आर्टिस्ट- रामागिरी स्वरिका (फोटो साभार- ANI)

साल 2019 में रामागिरी स्वरिका (Ramagiri Swarika) को दिल्ली सांस्कृतिक अकादमी से राष्ट्रीय पुरस्कार (National Award) से सम्मानित किया गया और उन्हें भारत की पहली माइक्रो आर्टिस्ट (India's First Micro-Artist) के रूप में मान्यता दी गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 3:38 PM IST
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जब पूरी मेहनत के साथ कुछ अलग करने की ठान लो तो दुनिया की कोई चीज उसे नहीं रोक सकती है. ऐसा ही कुछ कमाल किया है हैदराबाद (Hyderabad) की एक लॉ स्टूडेंट (Law Student) ने. उन्होंने 4,042 चावल के दानों पर पूरी भगवद् गीता (Bhagavad Gita) लिख डाली है. आपको बता दें कि इस छात्रा का कहना है कि वह देश की पहली महिला माइक्रो-आर्टिस्ट (Micro Artist) है. इस छात्रा ने अपना हालिया माइक्रो आर्ट प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसमें उसने 4,042 चावल के दानों पर पूरी भगवद् गीता लिखी है. माइक्रो आर्टिस्ट रामागिरी स्वरिका (Ramagiri Swarika) का कहना है, कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में उसे पूरे 150 घंटे का समय लगा है. उसने अब तक 2 हजार से ज्यादा माइक्रो आर्टवर्क बनाएं हैं. वह मिल्क आर्ट, पेपर कार्विंग, तिल के बीज पर ड्रॉइंग भी करती हैं.



इससे पहले रामागिरी स्वारिका ने बालों पर संविधान की प्रस्तावना लिखी थी, जिसके लिए उन्हें तेलंगाना के गवर्नर द्वारा सम्मानित किया गया था. रामागिरी स्वरिका ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर अपने काम के लिए पहचाने जाने के बाद वह अपनी कलाकृतियों को अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर ले जाने के लिए तैयार हो रही हैं. रामागिरी ने बताया कि उन्हें हमेशा से ही कला और संगीत में रुचि थी और उन्हें बचपन से ही कई पुरस्कार मिल चुके हैं. उन्होंने पिछले चार साल से चावल के दाने पर भगवान गणेश के चित्र के साथ माइक्रो आर्ट करना शुरू किया था. फिर एक ही चावल के दाने पर अंग्रेजी वर्णमाला भी लिखी थी. साल 2019 में रामागिरी को दिल्ली सांस्कृतिक अकादमी से राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया और उन्हें भारत की पहली माइक्रो आर्टिस्ट (India's First Micro-Artist) के रूप में मान्यता दी गई.
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उन्होंने कहा कि उन्हें साल 2017 में अंतर्राष्ट्रीय ऑर्डर बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (International Order Book of Records) से सम्मानित किया गया था और साल 2019 में उन्हें उत्तरी दिल्ली सांस्कृतिक अकादमी (Delhi Cultural Academy) से राष्ट्रीय पुरस्कार (National Award) मिला. अब तक उन्होंने 2000 से ज्यादा माइक्रो आर्ट्स पर काम किया है. उन्होंने बताया कि वह लॉ की छात्रा हैं और एक दिन जज बनना चाहती हैं. वह बहुत सी महिलाओं के लिए प्रेरणा बनना चाहती हैं.
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