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फिरोजाबादी चूड़ियों ने जब कही अपनी कहानी...

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Updated: February 11, 2020, 1:35 PM IST
फिरोजाबादी चूड़ियों ने जब कही अपनी कहानी...
शीशे को भट्ठियों से अंगार की शक्ल में कांच को बेलन तक लोहे के सरिये के सहारे पहुंचाया जाता है.

कांच की चूड़ियां सिर्फ आगरा मंडल के फिरोजाबाद जनपद में बनती हैं. फिरोजाबाद से चूड़ियां न सिर्फ भारत बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे देशों में अपनी खनक बिखेर रही हैं.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 1:35 PM IST
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लाल अंगार से आकार लेकर कलाइयों पर सजती हैं फिरोजाबादी चूड़ियां. हरी, लाल, सुनहरी चूड़ियां कलाइयों पर आज भी जब खनकती हैं तो ये भारतीय नारी की सबसे बड़ी पहचान होती हैं. कांच की चूड़ियां सिर्फ आगरा मंडल के फिरोजाबाद जनपद में बनती हैं. फिरोजाबाद से चूड़ियां न सिर्फ भारत बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे देशों में अपनी खनक बिखेर रही हैं. चूड़ियों की खनक से फिल्मी दुनिया भी अछूती नहीं है और चूड़ियों पर एक से बढ़कर एक फिल्मी गाने लगातार बनते रहे हैं. कांच को बड़ी बड़ी भट्ठियों में गलाने के बाद लाल अंगार से इसे निकालकर बेलन तक पहुंचाया जाता है. फिर बेलन के जरिए चूड़ी बनती है और फिर उसे कटाई घर तक ले जाया जाता है, जहां चूड़ियों को तैयार किया जाता है.

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अंगार की शक्ल में बेलन तक पहुंचते हैं कांच के गोले
शीशे को भट्ठियों से अंगार की शक्ल में कांच को बेलन तक लोहे के सरिये के सहारे पहुंचाया जाता है. इसके बाद कारीगर चूड़ियों का आकार देते हैं. बेलन के सहारे चूड़ियों का आकार मिलता है. यही चूड़ियां ठंडी होने के बाद दूसरे कक्ष में पहुंचाई जाती हैं, जहां बड़ी संख्या में चूड़ी कारीगर इसकी कटाई करते हैं. चूड़ी कारखाने में इतनी अधिक गर्मी होती है कि ठंड के मौसम में भी यहां श्रमिक पसीने से तरबतर रहते हैं. अनथक परिश्रम के बीच चूड़ियां अपने प्रारंभिक चरण से गुजरकर उस कक्ष में पहुंचती हैं जहां चूड़ियों की कटाई करके उन्हें तैयार किया जाता है. चूड़ियां तैयार होने के बाद फिनिशिंग के लिए उन घरों तक भेजी जाती है जहां इन्हें खूबसूरत बनाने का काम किया जाता है. घर घर में महिलाएं चूड़ियों को सजाकर उन्हें बाजार में पहुंचने लायक खूबसूरती प्रदान करती हैं.

फिरोजाबाद में चूड़ियों के साथ साथ ग्लास वर्क भी तेजी से बढ़ा है लेकिन चूड़ियां यहां की पहचान हैं.


चूड़ियों ने बनाया फिरोजाबाद को सुहागनगरी
चूड़ियों की खनक से ही फिरोजाबाद को अब सुहाग नगरी की पहचान मिली है. कुछ लोग फिरोजाबाद को कांच नगरी के नाम से भी पुकारते हैं. पूरे देश में फिरोजाबाद एक मात्र ऐसा शहर है जहां सुहाग की निशानी अर्थात कांच की चूडियां बनाई जाती हैं. शुरू से ही फिरोजाबाद कांच की चूड़ियों के लिए मशहूर रहा है. अतीत में कुछ आक्रमणकारी यहां कांच की वस्तुएं लेकर आए थे जिन्हें नकार दिया गया था. इन वस्तुओं को एक भट्टी में गलाया गया. ऐसी पारंपरिक भट्टियां आज भी अलीगढ़ में छोटी छोटी बोतलें और कांच की चूड़ियां बनाने के काम में आती हैं. आधुनिक कांच उद्योग हाजी रुस्तम उस्ताद के जरिए शुरू किया गया था. आज फिरोजाबाद में 400 से अधिक चूड़ी कारखाने हैं जिसमें कांच के टुकड़े गला करखूबसूरत चूड़ियां बनाई जाती हैं.

अब कांच के खूबसूरत आइटम भी बनने लगे हैं
फिरोजाबाद शहर जमाने के साथ साथ अपडेट होता जा रहा है. चूड़ियां तो यहां बड़ी संख्या में बनती हैं लेकिन अब यहां सुंदर बोतलें, कांच के घरेलू समान भी बड़ी संख्या में बनने लगे हैं. फिरोजाबाद में चूड़ियों के साथ साथ ग्लास वर्क भी तेजी से बढ़ा है लेकिन चूड़ियां यहां की पहचान हैं. यहां गली गली में चूड़ियों के कारखाने हैं जिनमें बनी चूड़ियां घर घर में महिलाओं को खूबसूरती प्रदान करती हैं. घरों में महिलाएं चूड़ियों को डिजाइन देने के साथ ही उन पर बारीक काम भी करती हैं ताकि चूड़ियां पहली ही नजर में महिलाओं को पसंद आ सके. सजावटी कांच के सामान भी फिरोजाबाद में खूब बनते हैं.

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विदेशियों को अच्छी लगीं फिरोजाबादी चूड़ियां
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा जैसे देशों से बड़ी संख्या में पर्यटक भारत आते हैं. ताजमहल आकर जब विदेशी महिलाएं भारतीय नारियों की कलाइयों में चूड़ियां सजी देखती हैं तो वह भी चूड़ियां पहन लेती हैं. चूड़ियां धीरे धीरे पर्यटकों के जरिए विदेशों में पहुंचीं तो विदेशों से अच्छी खासी डिमांड आने लगी. आज अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया में फिरोजाबदी चूड़ियां खूब पसंद की जा रही हैं.

(हिमांशु त्रिपाठी)

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First published: February 11, 2020, 1:35 PM IST
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