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    Gandhi Jayanti 2020: महात्मा गांधी की इन बातों से युवा वर्ग ले सकता है प्रेरणा, ऐसे चुनें सही राह

    युवाओं के लिए भी महात्मा गांधी ने प्रेरक बातें कही.
    युवाओं के लिए भी महात्मा गांधी ने प्रेरक बातें कही.

    हिंसा को महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने अपने जीवन में कभी स्थान नहीं दिया. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में एक ही संदेश दिया और वह था किसी पर निर्भर रहे बिना अपना काम खुद करो.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 2, 2020, 7:48 AM IST
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    सत्य और अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को आजादी (Independence) के इतने दशकों बाद भी याद किया जाता है. इसके पीछे एक ही कारण है और वह है अहिंसा (Non-Violence). हिंसा को महात्मा गांधी ने अपने जीवन में कभी स्थान नहीं दिया. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में एक ही संदेश दिया और वह था किसी पर निर्भर रहे बिना अपना काम खुद करो. उन्होंने अपने जीवन में कई प्रेरणादायी बातों से लोगों के दिल और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी. युवाओं के लिए भी महात्मा गांधी ने प्रेरक बातें कही. युवा वर्ग कैसे महात्मा गांधी से प्रेरणा ले सकता है, इसका जिक्र इस लेख में किया गया है.

    सत्य की राह पर चलें
    अपनी प्रेरक बातों के कारण गांधी जी ने लाखो स्टूडेंट्स के दिलों में जगह बनाई. शायद यही कारण था कि उन्हें देश का बापू कहा जाता है. एक बार उन्होंने अपने पिता से झूठ बोला था और बाद में उन्हें पश्चाताप हुआ तब कभी झूठ नहीं बोलने की कसम खाई. गांधी जी के इस सरल विचार का अनुसरण करके आपके प्रति लोगों का बदला हुआ बर्ताव अनुभव कर सकते हैं. सत्य के साथ गांधी जी ने कई प्रयोग किए और उन्हें अपने जीवन में इससे काफी मदद मिली. मुश्किल समय में भी सत्य उनके काम आया. वर्तमान भारतीय युवा पीढ़ी उनके इस विचार से बखूबी प्रेरणा ले सकती है.

    क्षमा करके बड़प्पन दिखाना
    एक बलवान इंसान का लक्षण क्षमा को कहा गया है. निर्बल व्यक्ति में क्षमा करके बड़प्पन दिखाने का गुण नहीं होता है. बुरा बोलने वाले और करने वालों को क्षमा करने की प्रेरणा गांधी जी हमेशा देते थे. युवा भारतीयों को सीखना चाहिए कि कैसे आपके साथ बुरा बर्ताव करने वालों और अपशब्द कहने वालों को माफ किया जा सकता है.



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    साधारण खाना और उचित मात्रा में खाना
    साधारण भोजन और अनुशासन के महान प्रस्तावक महात्मा गांधी थे. उन्होंने खाने के साथ यह प्रयोग किया कि कैसे कम खाने से मुझे ऊर्जा मिलती है. आज ज्यादातर समस्याएं उचित मात्रा में खाना नहीं खाने से ही होती हैं. खाने का समय और मात्रा दोनों जरूरी हैं. गांधी जी का यह विचार युवा वर्ग फॉलो कर सकता है. साधारण लेकिन पौष्टिक आहार पर गांधी जी ने हमेशा जोर दिया था.

    खुद में बदलाव कर दुनिया बदलें
    गांधी जी ने खुद में बदलाव करते हुए दुनिया में परिवर्तन की बात कही थी. हमेशा शांत रहना, गुस्सा नहीं करना और सबसे पहले किसी को माफ करने की प्रवृत्ति गांधी जी में रही है. इन सब परिवर्तनों को उन्होंने खुद के लिए किया. लोग उनकी बात इसलिए सुनते थे क्योंकि उन्हें मालूम था कि गांधी जी जो बात कहते हैं, उसे खुद भी फॉलो करते हैं. दूसरे को कोई बात आप कहना चाहते हैं, तो वह परिवर्तन खुद के अन्दर लाना काफी जरूरी है, युवा वर्ग इस सीख का अनुसरण कर सकता है.

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    मानसिक मजबूती
    युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि शारीरिक ताकत जरूरी है लेकिन मानसिक मजबूती भी अहम है. गांधी जी का शरीर भले ही पतला था लेकिन उनका दिमाग उतना ही तेज था. यह उनकी मानसिक मजबूती ही थी जिससे उन्होंने कई बड़े आंदोलनों के जरिए आजादी का लक्ष्य प्राप्त किया. अंग्रेजों ने भी उनकी मानसिक शक्ति के आगे हार मानी और अंत में भारत छोड़कर उन्हें जाना पड़ा. वर्तमान समय में शारीरिक मजबूती के पीछे दौड़ने वाले युवा वर्ग को मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी है.
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