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गैंगरीन हुआ तो खो सकते हैं अपना हाथ या पैर, शुगर पेशेंट और स्मोकर्स को है ज्यादा खतरा

गैंगरीन में अंग में ब्लड सर्कुलेशन पूरी तरह से खत्म हो जाता है.

Know About Gangrene- फोर्टिस हॉस्पिटल (Fortis Hospital) के डायबिटीज एंड एंड्रोक्रिनॉलॉजी (Diabetes And Endocrinology) डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर राकेश कुमार प्रसाद से से जानें गैंगरीन क्या है और इसकी चपेट में आने से कैसे बचा जा सकता है.

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    Know About Gangrene- गैंगरीन (Gangrene) शब्द से आप नावाकिफ नहीं होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह कितनी घातक हो सकती है? आइए आज हम आपको गैंगरीन के बारे में बताते हैं जोकि एक ऐसे रोग से सीधे तौर पर जुड़ी है, जो अब कॉमन हो चला है. किसी एक्सिडेंट या चोट के चलते होने वाले गैंगरीन के अलावा इसका खतरा डायबिटीज के पेशेंट्स के सिर पर अधिक मंडराता है. वहीं, कई बार स्मोकर्स को भी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है. हमने इस बारे में फोर्टिस हॉस्पिटल (Fortis Hospital) के डायबिटीज एंड एंड्रोक्रिनॉलॉजी (Diabetes And Endocrinology) डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर राकेश कुमार प्रसाद से बातचीत की. आइए जानते हैं, गैंगरीन आखिर है क्या और इसकी चपेट में आने से कैसे बचा जा सकता है.

    डॉक्टर राकेश बताते हैं कि गैंगरीन दरअसल एक ऐसी बीमारी है जो किसी अंग विशेष में तब हो जाती है जब उस अंग में ब्लड सर्कुलेशन पूरी तरह से खत्म हो जाता है. जब ब्लड नहीं पहुंचता तो वह अंग मर जाता है. देखा गया है कि यह सर्वाधिक चोट आदि के कारण हो जाता है लेकिन दूसरे नंबर पर इसका सबसे बड़ा कारण है शुगर, जब वह पूरी तरह से कंट्रोल में न हो. देखा गया है कि पैरों और हाथों में गैंगरीन हो जाना कॉमन है. डायबिटीज का नियंत्रण के बाहर हो जाना, कई बार इसका कारण होता है. जब डायबिटीज लंबे समय तक अनियंत्रित रहती है तो शरीर के किसी भी अंग पर यह गैंगरीन पैदा कर सकती है. इसमें होता यह है कि उस अंग विशेष की ब्लड वैसल्स धीरे धीरे ब्लॉक होने लगती हैं.

    डॉक्टर राकेश कुमार प्रसाद, हेड, डायबिटीज एंड एंड्रोक्रिनॉलॉजी डिपार्टमेंट, फोर्टिस
    डॉक्टर राकेश कुमार प्रसाद, हेड, डायबिटीज एंड एंड्रोक्रिनॉलॉजी डिपार्टमेंट, फोर्टिस


    गैंगरीन शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है और यह जरूरी नहीं कि यह हाथ या पैरों में ही हो. यह आंत में हो या कहीं भी हो सकती है. हाथ और पैर में ब्लड का कम फ्लो रुकता जाए तो यह पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज कहलाएगा. शुगर पेशेंट्स के लिए डॉक्टर राकेश सलाह देते हैं कि बढ़िया तो यह होगा कि अपने डॉक्टर से समय समय पर संपर्क करके अपनी शुगर जांच रिजल्ट में आए बदलाव से अवगत करवाते रहें. शुगर कंट्रोल करें. रेडियोलॉजिस्ट एक प्रकार के डॉपलर टेस्ट के जरिए खून के बहाव पर नजर रखते हैं. इसे बीच बीच में करवाते रहें, खासतौर से तब जब शुगर अक्सर बढ़ जाती हो तो. चलने में दिक्कत हो तो पैरों का डॉपलर करवाना चाहिए.

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    वह बताते हैं कि डायबिटीज न हो तो भी यह रोग हो सकता है. यदि आप स्मोक करते हैं तो भी इसकी संभावना बन जाती है. दरअसल स्मोकिंग धमनियों को सिकोड़ना शुरू कर देती है और इससे नसों पर बुरा असर पड़ने लगता है. कई बार खून में कुछ खास तरह का डिसऑर्डर होना जैसे कि थक्के जमने लगना, जैसे सिचुएशन होने पर ही यह रोग हो सकता है. ट्रॉमा की सिचुएशन जैसे कि चोट लगी हो तो भी खून का फ्लो रुक जाता है.

    डॉक्टर राकेश बताते हैं कि इसका इलाज यही है कि वह अंग विशेष काट कर निकाल दें. गैंगरीन दो प्रकार की होती हैं- ड्राई और वेट. ड्राई में इंफेक्शन नहीं होता लेकिन वेट में इंफेक्शन होता है. कई बार डॉक्टर कई बार हाथ या पैर में नलियां खोलने की कोशिश करते हैं. लेकिन कई बार अंग विशेष को काट कर निकालना ही विकल्प रहता है.
    Published by:Bhagya Shri Singh
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