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'गया' को कहा जाता है ज्ञान और मोक्ष की भूमि, नवंबर में जरूर बनाएं घूमने का प्लान

'गया' को कहा जाता है ज्ञान और मोक्ष की भूमि, नवंबर में जरूर बनाएं घूमने का प्लान

गया में मौजूद ग्रेट बुद्धा स्टेच्यू लगभग 20 मीटर ऊंचा है. Image-shutterstock.com

गया में मौजूद ग्रेट बुद्धा स्टेच्यू लगभग 20 मीटर ऊंचा है. Image-shutterstock.com

Visit To Gaya: गया को विष्णु नगरी (Vishnu Nagari) के नाम से जाना जाता है. गया की भूमि को मोक्ष की धरती भी कहते हैं. खुद भगवान राम (Lord Rama) ने भी गया की महिमा का वर्णन किया है. गया कि धरती पर खुद माता सीता ने फ्लगु नदी के तट पर बालू का पिंड राजा दशरथ को दिया था. मान्यता है कि उनके इस पिंड के बाद ही राजा दशरथ को स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी.

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    Visit To Gaya: बिहार का प्रमुख शहर गया ज्ञान (Knowledge) और मोक्ष की भूमि के नाम से प्रचलित है. हर साल लाखों की संख्या में लोग अपने पितरों के मुक्ति और मोक्ष की कामना के लिए गया में पिंडदान (Pind Daan) करने पहुंचते हैं. भारत में गया ही एक ऐसा स्थान है जहां पूरे साल पितरों का श्राद्ध किया जाता है. गया में हर समय दुनियाभर से लोग अपने पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध करने आते हैं. गया में पिंडदान करना सबसे उत्तम माना जाता है. यहां पिंडदान करने से पितरों की मोक्ष की कामना पूरी होती है. अगर आप धार्मिक भावनाओं से भरे व्यक्ति हैं तो नवंबर के मीहने में गया आपके घूमने के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है. यहां आप अपने पूरे परिवार संग धार्मिक स्थलों की सैर कर सकते हैं. यहां घूमने पर आपको एक अद्भुत शांति का एहसास होगा और संतुष्टि भी मिलेगी. आइए जानते हैं गया के इतिहास के बार में और आप यहां कौन-कौन सी जगह घूम सकते हैं.

    गया का इतिहास
    गया को विष्णु नगरी के नाम से जाना जाता है. गया की भूमि को मोक्ष की धरती भी कहते हैं. खुद भगवान राम ने भी गया की महिमा का वर्णन किया है. गया कि धरती पर खुद माता सीता ने फ्लगु नदी के तट पर बालू का पिंड राजा दशरथ को दिया था. मान्यता है कि उनके इस पिंड के बाद ही राजा दशरथ को स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी. पौराणिक कथा के अनुसार गयासुर नाम के एक राक्षस ने कठिन तपस्या कर ब्रह्माजी से वरदान मांगा था. गयासुर ने परमपिता ब्रह्मा से वरदान मांगा कि उसका शरीर देवताओं के तरह पवित्र हो जाए और हर व्यक्ति उसके दर्शन मात्र से ही पाप मुक्त हो जाए. इसके बाद लोग बिना भय के पाप करने लगे और गयासुर के दर्शन मात्र से पाप मुक्त होने लगे. गयासुर के इस वरदान के कारण स्वर्ग में भी काफी भीड़ बढ़ गई. फिर परेशान देवताओं ने गयासुर से यज्ञ करने के लिए पवित्र स्थल की मांग की. गयासुर ने देवताओं को उसके शरीर पर यज्ञ करने को कहा और वह इसके लिए लेट गया.

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    गयासुर जब लेटा तो वह पांच कोस में फैल गया. कहते हैं कि इसी पांच कोस में गया फैला हुआ है. गयासुर के मन से लोगों को पाप से मुक्त करने का इच्छा कभी खत्म नहीं हुई और उसने देवताओं से यह वरदान मांगा कि यह स्थान लोगों को मोक्ष देने के लिए बना रहे. उसने देवाताओं से यह वरदान मांगा कि जो भी लोग यहां पिंडदान करेंगे उन्हे तुरंत मुक्ति मिल जाए. इसके बाद खुद भगवान विष्णु ने अपना दाहिना पैर गयासुर के ऊपर रखा. इसी के चलते गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु की पैर उठाए हुए मुर्ति मौजूद है. इस मंदिर में लोग बहुत दूर से दर्शन और तर्पण करने आते हैं.

    गया में हैं 48 वेदियां
    कहते हैं कि पहले गया में अलग-अलग नामों के कुल 360 वेदियां थी, जहां पिंडदान किया जाता था. अब इनमें से 48 वेदियां रह गई है जहां पिंडदान किया जाता है. हर साल पिंडददान के लिए देश-विदेश से लाखों लोग गया पहुंचते हैं और अपने पितरों के मोक्ष की कामना करते हैं. यह भी जाता है कि जब तक पितरों का गया में श्राद्ध न हो तब तक उन्हें मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है.

    गया में इन स्थलों के जरूर करें दर्शन

    महाबोधि मंदिर
    महाबोधि मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. साथ ही यहां भगवान बुद्ध की बहुत बड़ी प्रतिमा भी स्थापित की गई है. महाबोधि मंदिर गया स्टेशन से केवल 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

    ग्रेट बुद्धा स्टेच्यू
    गया में मौजूद ग्रेट बुद्धा स्टेच्यू लगभग 20 मीटर ऊंचा है. इसे ध्यान मुद्रा में भगवान बुद्ध को कमल के ऊपर बनाया गया है जो देखने में काफी भव्य प्रतीत होता है.

    विष्णु पद मंदिर
    गया में मौजूद विष्णु पद मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है. यहां देश-विदेश से लोग पिंडदान करने के लिए आते हैं.

    बोधि वृक्ष
    बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था. वह इस वृक्ष के नीचे ध्यान मुद्रा में रहते थे और ये महाबोधि मंदिर के पीछे ही स्थित है.

    थाई मठ
    थाई मठ आर्किटेक्चर के थीम पर बनाया गया है और साथ ही यहां पर भगवान बुद्ध की 25 मीटर ऊंचा स्टेच्यू भी स्थापित है.

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    मुचलिंद लेक
    मुचलिंद लेक महाबोधि मंदिर के अंदर ही स्थित है. मान्यता है की जब बुद्ध ध्यान कर रहे थे तभी तूफान आ गया था जिससे भगवान बुद्ध का ध्यान भंग हो रहा था तभी वहां मुचलिंद सांप ने भगवान की रक्षा की थी.

    चीनी मंदिर
    चीनी मंदिर महाबोधि मंदिर के पास ही बनाया गया है और इसमें 500 साल पुरानी मूर्तियां है जो चीन से लाई गई थीं.

    Tags: Lifestyle, Travel

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