'घी' की कहानी वैदिक भारत से शुरू होती है, आज तक इसका जायका है बरकरार

कमजोरी दूर करने में रामबाण से कम नहीं है घी. Image:flaavorrr/Instagram

कमजोरी दूर करने में रामबाण से कम नहीं है घी. Image:flaavorrr/Instagram

घी (Ghee) को दाल, चावल, रोटी और सब्जी में डाल कर खाया जाता है. इसका स्‍वाद (Taste) सभी के साथ लाजवाब है और स्वास्थ्य (Health) के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है.

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  • Last Updated: March 20, 2021, 11:37 AM IST
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(विवेक कुमार पांडेय)

गरम चावल-दाल हो और उसपर पिघला हुआ एक चम्मच 'घी' (Ghee) वाह! मजा ही आ जाएगा. तो आज हम देसी घी की ही बात करेंगे. हमारे ज्यादातर भारतीय घरों में किचन (Kitchen) के अंदर ही घी निकाला जाता है. दूध के मक्खन को मथ कर घी निकालते हैं. आज इसके स्वाद, स्वास्थ्य (Taste And Health) और थोड़े से इतिहास के बारे में बात करेंगे.

इतिहास:

हिंदू मान्यता में तो भगवान को ही 'माखन चोर' कहा गया है. इसी माखन से देसी घी निकाला जाता है. वैदिक काल से ही भारत में घी का इस्तेमाल होता है. आर्युवेद में तो घी के इस्तेमाल के कई तरीके बताए गए हैं. घी जितना शुद्ध होता है उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होती है.
कई तरह से खाने में प्रयोग:

घी खाने के कई तरीके हैं. एक तो पहले इसे दाल, चावल, रोटी और सब्जी में डाल कर खाया जाता है. इसके साथ ही कई घरों में तेल या रिफाइन के स्थान पर घी का ही इस्तेमाल होता है. देसी घी के पराठों के तो क्या कहने. इसके साथ ही पुरानी दिल्ली में अगर आप जाते हैं तो वहां पुरानी दुकानों में सारे खाने देसी घी से ही बनाए जाते हैं.

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दूध है बहुत जरूरी:

तो अगर घी खाना है तो दूध का होना जरूरी है. क्योंकि दूध की मलाई से ही मक्खन निकलता है और फिर उसी से घी निकाला जाता है. पुराने जमाने में मथनी का प्रयोग इसके लिए होता था और अब मिक्सर में भी यह बन जाता है. इसकी सुगंध और स्वाद दोनों भूख बढ़ाने और खाना पचाने में मददगार होते हैं.

शाहजहां के जमाने से दिल्ली में मशहूर:

जब मुगलकाल में आगरा से शाहजहां ने राजधानी दिल्ली की तो शाही हकीम ने कहा कि यहां का पानी खराब है. बादशाह ने इसका विकल्प पूछा तो कहा गया कि खूब मसालेदार खाना होगा. अब मसालेदार खाने का साइड इफेक्ट भी बहुत था तो इसे खत्म करने के लिए घी के इस्तेमाल की सलाह दी गई.

यही कारण है कि दिल्ली में खाना भले ही सरसों के तेल में बनता हो लेकिन उसपर ऊपर से खूब घी डाला जाता है. नॉनवेज खाने वालों के लिए भी व्यवस्था है और जो लोग वेजीटेरियन हैं उनके लिए घी की बनी चाट की व्यवस्था की गई. इसलीए जामा मस्जिद और चावड़ी बाजार में खाने भले ही अलग हों लेकिन उनमें घी एक ही पड़ता है.

घी के फायदे:

घी एक तरफ जहां बुखार आदि को कम करने में सहायक होता है वहीं मानसिक रोगों में भी अच्छी भूमिका निभाता है. कमजोरी दूर करने के लिए ये किसी रामबाण से कम नहीं और पाचन ठीक करने में भी मददगार होता है. खांसी आ रही हो तो घी चाट लेने से काफी आराम मिलता है. नाक की एलर्जी आदि दूर करने में भी सहायक होता है.

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आपने अगर डाइटिंग के चक्कर में घी छोड़ रखा है क्या ? इससे डरने की जरूरत नहीं. एक सीमित और उचित मात्रा में शुद्ध घी आपके लिए बहुत ही लाभदायक होता है. तो आप भी अच्छे घी की तलाश करिए और इसका इस्तेमाल शुरू कर दीजिए...

PC: https://www.instagram.com/p/CMl68RChBtc/
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