जानें 'गर्लबॉस कल्चर' और इसे बदलने के लिए चल रही लड़ाई के बारे में

गर्लबॉस कल्चर की होने लगी आलोचना.
Image Credit: pexels-the-coach-space

गर्लबॉस कल्चर की होने लगी आलोचना. Image Credit: pexels-the-coach-space

Know About Girlboss Culture: यह कल्चर उन महिला उद्यमियों के बारे में बताता है जो सिस्टम में उनके खिलाफ खड़ी की गई ढेरों फालतू बाधाओं के बावजूद 24 घंटे काम करती हैं.

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गर्लबॉस संस्कृति (Girlboss Culture) ने एक तरह से बहुत बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है, आप जानते हैं कि हमारा इशारा किस तरफ है. दुनिया की लगभग सभी महिलाएं अपने उद्यमशीलता (Entrepreneurial) के काम के बारे में सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट करने में हैशटैग #Girlboss का इस्तेमाल करती हैं. वास्तव में इस हैशटैग के अकेले इंस्टाग्राम पर लगभग 23 मिलियन पोस्ट हैं. पक्के तौर पर कहीं न कहीं आपका भी इस शब्द से सामना जरूर हुआ होगा. यह किसी की टी-शर्ट पर छपा मिलेगा या फिर आप इसे किसी कॉफी मग पर लिखा देख सकते हैं. यह नोटबुक और प्लानर्स पर छाया हुआ है। इसे खोजने के लिए आपको इतनी मेहनत करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि आपके नेटवर्क में कोई न कोई व्यक्ति ऐसा मिल ही जाएगा, जिसने गर्लबॉस वर्ड के साथ सोशल मीडिया फोटो पोस्ट किया होगा. इसे आप पसंद करें या इस से नफरत, यह कल्चर अस्तिव में हैं.लेकिन जरूरी नहीं है कि गर्लबॉस कल्चर हमें चाहिए. इसकी बहुत आलोचना हो रही है और आलोचक इसकी जमकर खिलाफत कर रहे हैं. दरअसल यह बाजार की एक तिकड़म है जिसे लंबे वक्त से पीछे धकेला जाना जरूरी था. इस तिकड़म के तहत विमेंस को ऐसे सिस्टम को मात देने के लिए इस कदर उकसाया जाता है जो कि वास्तव में अनबिटेबल यानी अपराजेय डिजाइन किया गया है, इसलिए आपको गर्लबॉस संस्कृति के बारे में जानने की बेहद जरूरत है, यह कहां से आई है और कई मायनों में इसमें कहां कमी है.

गर्लबॉस कल्चर क्या हैः  

गर्लबॉस कल्चर क्या होने का दावा करता है और वास्तव में ये है क्या. इन दोनों के बीच का यही द्विभाजन (Dichotomy) इसे परिभाषित करना मुश्किल बनाता है. गर्लबॉस कल्चर का मतलब एक तरह से उन महिलाओं से लगाया जा सकता है जो अपने वर्कप्लेस पर सफल होने और आगे बढ़ने के लिए तूफान के जैसे काम करती हैं. ये महिलाएं जल्दी से जल्दी किसी एक विशेष स्थान या समूह के बीच बहुत कामयाब या मशहूर बनने के लिए ऐसा करती हैं. यह कल्चर उन महिला उद्यमियों के बारे में बताता है जो सिस्टम में उनके खिलाफ खड़ी की गई ढेरों फालतू की बाधाओं (सेक्सिज्म) के बावजूद भी 24 घंटे काम करती हैं. यकीनन उनका ये काम वर्क हॉलिज्म के (Workaholism) रूप में जाना जाता है.और यहां आप कह सकते हैं किसी भी तरह और किसी भी तरीके से जो सिस्टम उनके खिलाफ काम करने के लिए डिजाइन किया गया है वो उनके लिए काम करने लगता है या काम का साबित होने लगता है. लेकिन वास्तव में गर्लबॉस कल्चर उससे बहुत अलग है जो आप कुछ ब्लेजर में सजी बिजनेसवुमन को एक के बाद एक काम की डेडलाइन को पूरा करते देख कर महसूस करते हैं. इसकी तुलना में यह कल्चर बेहद डरावना और खराब है.यह वास्तव में यकीनन टॉक्सिक है.

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कहां से आया ये कल्चरः  

जेन (Gen) के लिए केली कैमिनिरो लिखते हैं कि शेरिल सैंडबर्ग 2013 बेस्टसेलर बुक ‘लीन इन: वीमेन, वर्क, एंड द विल टू लीड’ बड़े पैमाने पर गर्लबॉस कल्चर को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है. अपनी इस बुक में सैंडबर्ग ने संस्थागत बनाम आंतरिक बाधाओं की तुलना चिकन-और-अंडे जैसी चरम स्थिति से की है. उनके मुताबिक,पहले कौन आता है जैसे दार्शनिक तर्कों में वक्त खपाने की बजाय विमेंस दोनों मोर्चों पर लड़ाई लड़ने के लिए सहमत हों. यहां पर पहले कौन आने से उनका अर्थ पुरुषों को वरीयता देने से है.इस बुक में उन्होंने वर्किंग विमेंस के लिए एक प्लान सुझाया, जिसमें उन्होंने वीमेंस को सी-स्वीट (C-suite) तक जाने के लिए झुककर और अपने खुद के रास्ते बनाने को कहा है बनिस्पत इसके कि वह पितृसत्सा (Patriarchy) को चुनौती देने और उसे ढहाने में अपना वक्त जाया करें. सी-स्वीट एक संगठन में सर्वोच्च रैंकिंग वाले वरिष्ठ अधिकारी हैं,इसलिए कई कॉरपोरेट खिताबों में "चीफ" शब्द का प्रतिनिधित्व करने के लिए सी- स्वीट का इस्तेमाल किया जाता है.इसके जरिए उन्होंने यह कहा है कि वर्क प्लेस पर होने वाली लैंगिक असमानताएं विमेंस के लिए व्यक्तिगत लेवल पर लड़ी जाने वाली लड़ाई है.हालांकि यहां लेखिका ने महिलाओं को यह महसूस करने की परमिशन दी कि जब भी वे अपने लिए वकालत करती हैं, तो वे एक्टिव हैं. गर्लबॉस कल्चर में .यह बहस करने के बजाय कि यह किसके लिए काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया था. विमेंस को अपनी शर्तों पर फेमिनिज्म को परिभाषित करने और सिस्टम को अपने लिए काम करने लायक बनाने की परमिशन दी गई है.गर्लबॉस वीमेंस की ढीठ महत्वाकांक्षा का हजारों सालों का अवतार था, जिसमें विमेंस की कामयाबी को ही उसकी खुशी का सबसे बड़ा आधार माना गया है जिसे कम करके आंका जा रहा था और जो उसे उसकी कामयाबी पर संदेह करने वालों को बुरी तरह से हराने के लिए प्रेरित करने वाला रहा था.

इस कल्चर में है खामियां बहुतः  



जब कोई कांट्रेक्ट में लिखे दायित्वों के तहत भी उनके लिए कुछ करता है तब भी एक #Girlboss" ईमेल पर किस (Kisses ) पोस्ट करती हैं और थैंक यू सो मच कहती हैं. यह पता होने के बाद जिस बंदे ने काम किया है वह उसकी ड्यूटी के तहत आता है काम करके उसने उन पर कोई एहसान नहीं किया है.वर्क प्लेस पर संसाधनों में कटौती होने पर भी वह अपने चेहरे पर मुस्कान बनाए रखती हैं. विक्की स्प्राट रिफाइनरी 29 , "लेट 2020 बी द ईयर वी गेट रिड ऑफ गर्लबॉस कल्चर फॉर गुड. में लिखते है कि वह 'भयंकर हो सकती है लेकिन कभी गुस्सा नहीं कर सकती. वह कुल मिलाकर बेहद अच्छा तो कर सकती है, लेकिन कभी भी बहुत मुश्किल काम के लिए कोशिश नहीं करती. वह सशक्त हो सकती हैं लेकिन कभी तनाव में नहीं रह सकती. वह निर्दयी हो सकती है, लेकिन कभी भी घबराई हुई नहीं हो सकती हैं. वह हमेशा लीक पर तो चल सकती हैं, लेकिन इससे हटकर और अलग कभी कुछ नहीं करतीं. वहीं कई लोग गर्लबॉस शब्द का इस्तेमाल अपने अथक प्रयासों और कड़ी मेहनत से अर्जित सफलताओं को साझा करने के लिए करते हैं, और, आलोचकों का तर्क है कि यह वास्तव में ऐन मौके पर चूक जाने को परिभाषित करता है. इसे इस तरह से देखा जाए कि इस कल्चर में हम एक महिला के सबसे प्रगतिशील होने की कल्पना तभी कर सकते हैं जब वह अपने चमचमाते ऑफिस से मुस्कुराती हुई सौम्य छवि वाली सेल्फी इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती है.

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क्या कहते हैं आलोचकः  

गर्लबॉस कल्चर महिलाओं आगे बढ़ाने का जैसा लगता है और कुछ हद तक पुरुषों से भरी कामकाजी दुनिया में उनके लिए स्पेस देने और खुला माइंड सेट देने का दावा करता है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है. एक संस्था के तौर पर वह महिलाओं को नकारता है. यह उन्हें कमजोर कर देता है और अधिकारों को कम आंकता है.

इस कल्चर का गर्ल शब्द स्वतः ही पेशेवर महिलाओं को भी शिशु जैसी बुद्धि वाला दिखाता है. हालांकि किसी भी पेशेवर पुरुष के लिए ब्वॉय बॉस शब्द शायद ही कभी इस्तेमाल किया गया हो.

यदि कोई महिला शीर्ष पर पहुंच भी जाती है, तो उसे असामान्य तौर पर लिया जाता है या उसे गलत रास्ते का इस्तेमाल कर वहां तक पहुंचने के तमगे से नवाजा जाता है. माना जाता है कि उसने वहां पहुंचने के लिए कुछ असाधारण किया होगा क्योंकि इतने शीर्ष पर बहुत कम महिलाएं ही पहुंच पाती हैं.

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वास्तव में 2020 में वरिष्ठ प्रबंधन भूमिकाओं में महिलाओं का अनुपात सिर्फ 29 प्रतिशत है, जो कि अब तक दर्ज रेकॉर्ड में सबसे अधिक है. यह बढ़ता प्रतिशत एक तरह से रोमांचक लग सकता है, लेकिन यह भी सच है कि ये महिलाओं के आधे का भी प्रतिनिधित्व नहीं करता. ये तथ्य हतोत्साहित करने वाला है. अगर दुनिया महिलाओं की शक्ति से इतनी डरी हुई नहीं होती तो गर्लबॉस शब्द का इस्तेमाल करने की जरूरत ही नहीं होती.
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