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शुरुआत में ही लग जाएगा मोतियाबिंद का पता, बस कराना होगा ये टेस्ट

भाषा
Updated: January 28, 2020, 8:43 AM IST
शुरुआत में ही लग जाएगा मोतियाबिंद का पता, बस कराना होगा ये टेस्ट
मोतियाबिंद की पहचान के लिए कराना होगा ये टेस्ट

शोधकर्ताओं ने कहा, इस परीक्षण को मान्यता मिलने के बाद डॉक्टरों के लिए मोतियाबिंद का पता लगाना आसान होगा.

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ग्लूकोमा (मोतियाबिंद) के इलाज में अब काफी आसानी हो सकेगी. दरअसल, ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक जेनेटिक टेस्ट (आनुवांशिकी परीक्षण) तैयार किया है जो ग्लूकोमा (मोतियाबिंद) विकसित होने का शुरुआत में ही पता लगा सकता है. मोतियाबिंद, आंखों से संबंधित एक गंभीर रोग है जो संभावित रूप से इससे ग्रस्त लोगों को अंधा बना सकता है. यह अध्ययन इंटरनेशनल नेचर जेनेटिक्स नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

फिलिनडर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 107 जीनों की पहचान की है, जो मोतियाबिंद को विकसित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं. साथ ही इस बीमारी के शुरुआती खतरे का पता लगाने के लिए एक नया आनुवांशिकी परीक्षण तैयार किया है. इस परीक्षण में रक्त या लार के नमूने के जरिए अधिक सटीकता से बीमारी का पता लगाया जा सकता है.

शोधकर्ताओं ने कहा, इस परीक्षण को मान्यता मिलने के बाद डॉक्टरों के लिए मोतियाबिंद का पता लगाना आसान होगा. साथ ही इस रोग से आंखों को होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिलेगी. शोधकर्ता अभी इसके विकसित होने को लेकर पीड़ितों के व्यक्तिगत और पारिवारिक इतिहास के बारे में जानने के लिए और अध्ययन करेंगे. अध्ययन से वे इस बीमारी को बढ़ावा देने में शामिल अन्य जीनों की पहचान कर सकते हैं.

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इस वजह से होता है ग्लूकोमा:
आंखों के भीतर एक फ्लूइड होता है जिसे aqueous humor कहा जाता है, यह फ्लूइड आंखों में मौजूद जाल जैसे एक संरचना से होकर बाहर आता है. लेकिन कभी कभी जिस रास्ते से होकर यह फ्लूइड बाहर आता है वो ब्लाक हो जाता है तब आंखों में तरल (फ्लूइड) रह जाता है. कभी कभी एक्सपर्ट्स भी इस ब्लॉकेज की वजह नहीं बता पाते हैं. लेकिन, यह अनुवांशिक हो सकता है, इसका सीधा मतलब है कि यह माता पिता के जीन के जरिये बच्चों में जाने वाली बीमारी है.

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First published: January 28, 2020, 8:41 AM IST
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