भारत में आज भी मिलते हैं इतिहास के अमिट निशान, यक़ीन न हो तो इन जगहों पर ज़रूर जाएं

मेरठ में हिंडन नदी के किनारे आलमगीरपुर नाम की एक जगह पड़ती है. इस गांव की खोज यज्ञ दत्त शर्मा ने 1958 में की थी.

News18Hindi
Updated: November 30, 2017, 2:03 PM IST
भारत में आज भी मिलते हैं इतिहास के अमिट निशान, यक़ीन न हो तो इन जगहों पर ज़रूर जाएं
रोहतासगढ़ का किला
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Updated: November 30, 2017, 2:03 PM IST
अक्सर सुनने को मिलता है कि भारत की सभ्यता पांच हज़ार साल पुरानी है. अगर पांच हज़ार साल पुरानी सभ्यता है तो ज़ाहिर है कि सभ्यता के कुछ निशान अब तक सुरक्षित भी होंगे. हां, अब जैसे पहले थे वैसे तो नहीं, पर उनके कुछ अवशेष आज भी कुछ जगहों पर बचे हुए हैं जिन्हें आप देख सकते हैं.
बंटवारे में तो हड़प्पा और सिंधुघाटी सभ्यता के अधिकतम हिस्से पाकिस्तान को मिले लेकिन कुछ अंश भारत में भी हैं. हम आपको बताते हैं भारत में मौजूद उन जगहों के बारे में जहां जाकर आप अपने गौरवशाली अतीत को महसूस कर सकते हैं.

महाभारत कालीन भारत


हस्तिनापुर
महाभारत में हस्तिनापुर का नाम तो ज़रूर सुना होगा. हस्तिनापुर कौरवों और पांडवों की राजधानी थी. कुछ लोग इसे मिथकीय नगरी मानते हैं तो कुछ कहते हैं कि यहां महाभारत कालीन अवशेष आज भी जंगलों में मिलते हैं. हस्तिनापुर के जंगलों में कुछ टीले ऐसे भी हैं जिन्हें यहां के लोग महाभारत कालीन बताते हैं. यहां कर्ण मंदिर भी है. महाभारत कोई ऐतिहासिक घटना थी या नहीं, इसपर भले ही सवालिया निशान हों पर हस्तिनापुर जाकर इस नगरी की प्राचीनता तो आप महसूस कर ही सकते हैं.
रोहतास
ऐसा कहा जाता है कि रोहतास का किला सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व ने बनवाया था. रोहतासगढ़ इस जगह का प्राचीन नाम है. पुराणों में इस नगर का उल्लेख मिलता है. रोहतास बिहार राज्य का हिस्सा है.

सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन भारत

लोथल


लोथल


1947 में हुए विभाजन के बाद सिंधुघाटी सभ्यता के अधिकांश क्षेत्र पाकिस्तान की सीमा में शामिल हो गए. भारत के हिस्से में मिले लोथल और धौलावीरा. हालांकि कुछ और भी जगहें हैं जहां का संबंध सिंधु घाटी सभ्यता से बताया जाता है लेकिन लोथल की प्रामाणिकता पर इतिहासकार एकमत हैं.
धौलावीरा




गुजरात में कच्छ और रण बहुत प्रसिद्ध जगहें हैं. यहीं एक द्वीप के पास बसा है खडीर नाम का एक द्वीप. इसी द्वीप में धौलावीरा बसा है. धौलावीरा की भी बनावट लगभग मोहनजोदड़ो और लोथल की तरह ही है. धौलावीरा में एक हज़ारों साल पुरानी बावली भी है जिसे सरकार ने चिन्हित किया है. आकार में ये बावली मोहनजोदड़ो के स्नानागार से थोड़ी बड़ी है.

आलमगीरपुर
मेरठ में हिंडन नदी के किनारे आलमगीरपुर नाम की एक जगह पड़ती है. इस गांव की खोज यज्ञ दत्त शर्मा ने 1958 में की थी. यह सभी गंगा और यमुना के किनारे बसे क्षेत्रों में पहला नगर है जहां हड़प्पा सभ्यता के अवशेष मिले हैं.
दैमाबाद
महाराष्ट्र में एक नदी है प्रवर. इसी नदी के किनारे बसा है दैमाबाद. दैमाबाद अहमदनगर का हिस्सा है. इस जगह की खोज बी.पी बोपार्डिकर ने 1958 में की थी. यहां जो अवशेष मिले वे लगभग सिंधु घाटी सभ्यता जैसी ही थी इसलिए पुरातत्वविद मानते हैं कि इस शहर का कुछ संबंध जरूर वहां से रहा होगा.
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