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बच्चे के बेहतर विकास के लिए जरूरी हैं दादा-दादी, ये है इसके पीछे का कारण

News18Hindi
Updated: October 21, 2019, 11:40 AM IST
बच्चे के बेहतर विकास के लिए जरूरी हैं दादा-दादी, ये है इसके पीछे का कारण
जो अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रहते हैं, उनमें एक अलग तरीके की समझ और संवेदनाएं होती हैं.

आज की बिजी लाइफ में जिस तरह से लोग अकेले हो रहे हैं, एक छोटी सी फैमिली में रह रहे हैं उनमें दादा-दादी या नाना-नानी मेहमान बन कर रह जाते हैं.

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  • Last Updated: October 21, 2019, 11:40 AM IST
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दादा-दादी या नाना-नानी का होना एक बच्चे के बचपन को खुशियों से भरने में एक अहम रोल निभाता है. ऐसे बच्चे, जो अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रहते हैं, उनमें एक अलग तरीके की समझ और संवेदनाएं होती हैं. ऐसे बच्चे हमशा खुश, मिलनसार और चीजों को शेयर करना सीख जाते हैं. इन बच्चों को परिवार में रहने और सभी की भावनाओं की कद्र करना भी आता है.

हालांकि आज की बिजी लाइफ में जिस तरह से लोग अकेले हो रहे हैं, एक छोटी सी फैमिली में रह रहे हैं उनमें दादा-दादी या नाना-नानी मेहमान बन कर रह जाते हैं. आपको बता दें कि कई रिसर्च में भी सामने आया है कि जो बच्चे अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रहते हैं, वो बाकी अकेले रहने वाले बच्चों से काफी अलग होते हैं. आइए हम आपको बताते हैं ऐसे 5 कारण जो ये साबित करते हैं कि बच्चों को अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रखना क्यों जरूरी है.

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बच्चे रहेंगे खुश और सुरक्षित

जॉब पर जाने वाले मां-बाप या वर्किंग पैरेंट्स के लिए उनके मां-बाप का साथ रहना, उनके बच्चों की परवरिश के लिए बहुत जरूरी होता है. उन्हें बच्चों को पालने के लिए किसी मेड की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि आपके पैरेंट्स आपके बच्चों की आपसे अच्छी देखभाल कर सकते हैं. दादा-दादी सिर्फ बच्चों को पालने में ही मदद नहीं करते बल्कि इससे आपके बच्चों को सुरक्षा भी मिलती है. इसके अलावा आज के वक्त में जब आप अपने बच्चों को किसी के साथ अकेला नहीं छोड़ सकते, ऐसे में अपने मां-बाप पर आप आंख बंद करके भरोसा कर सकते हैं.

अपनी जड़ों के बारे में मिलेगी जानकारी

जब बच्चे अपने परिवार के इतिहास के बारे में बहुत कुछ जानते हैं और अपने दादा दादी की भावनात्मक बातें समझा करते हैं, तो इस तरह बच्चों में किसी से भी जुड़ाव रखने की भावना को प्रबलता मिलती है. बच्चे न सिर्फ दादा-दादी के और करीब आ जाते हैं, बल्कि उनमें स्नेह, आदर और सेवा जैसे मानवीय गुण भी विकसित होते हैं. इससे बच्चे काफी लचीले और परिस्थिति अनुसार रहना सीख जाते हैं. साथ ही ऐसे बच्चों का दिमाग भी तेज होता है. वे दूसरे बच्चों की तुलना में अधिक स्मार्ट और परिपक्व दिखाई देते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब वह अपने परिवार के इतिहास और कठिनाइयों के बारे में जानते हैं, तो वह उससे सीखते हैं कि कैसे मुश्किलों में भी आगे बढ़कर, अपनी लड़ाई लड़ी जाती है.
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भावनात्मक तरीके से बनेंगे मजबूत

जब बच्चे अपने दादा-दादी के साथ बहुत समय बिताते हैं, तो उनके पास किसी भी भावनात्मक या व्यवहार संबंधी परेशानियों से निपटने के लिए बेहतर समझ पैदा हो जाती है. आगे चलकर बड़े होने पर यही चीजें उन्हें किसी भी तरह के आघात का सामना करने में सक्षम बनाती हैं. दादा-दादी के संपर्क में रहने वाले बच्चे अकेलेपन, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से कम पीड़ित होते हैं. वह हर तरीके से रहना सीख लेते हैं. उन्हें हर मुश्किल का हल निकालना आ जाता है.

सीखेंगे नैतिक गुण

पैरेंट्स का काम है कि वह अपने बच्चों में अच्छे संस्कार और नैतिकता पैदा करें. उन्हें सहानुभूति और दया सिखाएं लेकिन दादा-दादी इस मामले में एक बड़ी मदद कर सकते हैं. दादा-दादी या नाना-नानी विश्वास, प्रेम और शुरुआती शिक्षा के स्तंभ के रूप में कार्य करते हैं. वह बच्चों को अच्छी कहानियां सुनाकर ही सिखा देते हैं कि जीवन में कुछ चीजें क्यों जरूरी हैं. दादी-नानी की कहानियां बच्चों को ज्ञान देती हैं. बच्चों के जीवन पर इन नैतिक कहानियों का अच्छा प्रभाव पड़ता है. आपका बच्चा अपने दादा-दादी से थोड़ी सी सीख, संस्कार और नैतिकता सीखकर एक सुंदर, समझदार और सम्मानित व्यक्ति के रूप में विकसित हो सकता है.

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दादा-दादी भी रहेंगे खुश और सेहतमंद

दादा-दादी का आपके बच्चों के साथ रहना न सिर्फ आपके बच्चे को खुश और स्वस्थ रखता है, बल्कि यह आपके बूढ़े मां-बाप के लिए भी अच्छा है. आपके बच्चों के साथ रहकर आपके मां-बाप खुश रहते हैं. वह कभी अकेला महसूस नहीं करते और न ही उन्हें खालीपन का एहसास होता है. उम्र बढ़ने के साथ-साथ माता-पिता डिप्रेशन और भूलने की बीमारी के शिकार हो जाते हैं. यह सारी बीमारियां अकेलेपन और खाली होने से होती हैं. ऐसे में आपके बच्चों के साथ रहकर आपके मां-बाप खुश और स्वस्थ रह सकते हैं.

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First published: October 21, 2019, 11:38 AM IST
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