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Happy Birthday Javed Akhtar: जावेद अख्तर के जन्मदिन के अवसर पर पढ़ें उनकी जादुई शायरी

Happy Birthday Javed Akhtar: जावेद अख्तर के जन्मदिन के अवसर पर पढ़ें उनकी जादुई शायरी

Happy Birthday Javed Akhtar

Happy Birthday Javed Akhtar

Happy Birthday Javed Akhtar: जावेद अख्तर कवि, फिल्म लेखक के तौर पर जाने जाते हैं. जावेद के पिता उन्हें 'जादू' कहकर बुलाते थे. दरअसल उनके पिता जान निसार अख्तर की कविता 'लम्हा-लम्हा किसी जादू का फसाना होगा' बहुत फेसम थी. उसके बाद जावेद अख्तर का जन्म हुआ और उनके पिता उन्हें 'जादू' कहकर बुलाने लगे. जावेद अख्तर आज अपना 78वां जन्मदिन मना रहे हैं.

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Happy Birthday Javed Akhtar: जावेद अख्तर का नाम शायरी की दुनिया में ही नहीं बल्कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में भी किसी पहचान का मोहताज नहीं है. जावेद अख्तर कवि, फिल्म लेखक के तौर पर जाने जाते हैं. जावेद के पिता उन्हें ‘जादू’ कहकर बुलाते थे. दरअसल उनके पिता जान निसार अख्तर की कविता ‘लम्हा-लम्हा किसी जादू का फसाना होगा’ बहुत फेसम थी. उसके बाद जावेद अख्तर का जन्म हुआ और उनके पिता उन्हें ‘जादू’ कहकर बुलाने लगे. जावेद अख्तर आज अपना 78वां जन्मदिन मना रहे हैं. उनका कहना है कि बर्थडे एक रस्म है. मोहब्बत है, तो दोस्त आ जाते हैं. यदि आप एक अच्छे परिवार में पैदा हुए हैं, जहां माता-पिता बर्थडे मनाने का आनंद लेते हैं, तो आप खुशी महसूस करते हैं. जावेद अख्तर की शेर-ओ-शायरी लोगों के दिलों को छू जाती है. आइए उनके जन्मदिन के अवसर आज हम आपके लिए रेख्ता के साभार से लेकर आए हैं जावेद अख्तर की शायरी…

कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी

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जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता

डर हम को भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से
लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा

ऊंची इमारतों से मकां मेरा घिर गया
कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए

मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता

इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान
अँधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान

इन चराग़ों में तेल ही कम था
क्यूँ गिला फिर हमें हवा से रहे

हम तो बचपन में भी अकेले थे
सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे

ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना हामी भर लेना
बहुत हैं फ़ाएदे इस में मगर अच्छा नहीं लगता

मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा
वो मुझ से जीत भी सकता था जाने क्यूँ हारा

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इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं
होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं

धुआँ जो कुछ घरों से उठ रहा है
न पूरे शहर पर छाए तो कहना

Tags: Books, Happy birthday, Javed akhtar, Lifestyle

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