Happy Holi 2020: इस बार घर पर नहीं इन जगहों पर मनाएं होली, यादगार बन जाएगा हर पल

Happy Holi 2020: इस बार घर पर नहीं इन जगहों पर मनाएं होली, यादगार बन जाएगा हर पल
इस बार होली पर कुछ अलग करना चाहते हैं तो घर की होली नहीं बल्कि कुछ मशहूर जगहों के होली उत्सव का मजा जरूर उठाएं.

देशभर में अलग-अलग जगहों पर होली का त्योहार अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. ऐसे में आप भी इन जगहों पर जाकर रंगों के इस त्योहार का दोगुना आनंद ले सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2020, 12:37 PM IST
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होली का त्योहार मिलन का त्योहार है. इस पर्व पर लोग अपने मन से ईर्ष्या की भावना दूर कर एक दूसरे के गले मिलते हैं और सभी गिले शिकवे मिटाते हैं. कुछ लोग इस त्योहार को घर पर ही रहकर दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ मनाते हैं तो कुछ लोगों को इस मौके पर बाहर घूमना अच्छा लगता है. अगर आप भी इस बार होली पर कुछ अलग करना चाहते हैं तो घर की होली नहीं बल्कि कुछ मशहूर जगहों के होली उत्सव का मजा जरूर उठाएं.

आपको बता दें कि देशभर में अलग-अलग जगहों पर होली का त्योहार अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. ऐसे में आप भी इन जगहों पर जाकर रंगों के इस त्योहार का दोगुना आनंद ले सकते हैं. आइए जानते हैं कौन सी हैं वो जगहें.

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मथुरा-वृंदावन में फूलों की होली



फूलों की होली में बांके बिहारी मंदिर के कपाट खुलते ही पुजारी भक्तों पर फूलों की वर्षा करते हैं.


मथुरा-वृंदावन की फूलों की होली दुनियाभर में मशहूर है. यहां होली का उत्सव पूरे एक सप्ताह तक मनाया जाता है. फागुन की एकादशी को वृंदावन में फूलों की होली मनाई जाती है. बांके बिहारी मंदिर में फूलों की ये होली सिर्फ 15-20 मिनट तक ही चलती है. शाम 4 बजे इस होली की शुरुआत होती है. इसके लिए समय का पाबंद होना बहुत जरूरी है. इस दौरान आप यहां के खाने पीने का लुत्फ भी उठा सकते हैं. फूलों की होली में बांके बिहारी मंदिर के कपाट खुलते ही पुजारी भक्तों पर फूलों की वर्षा करते हैं.

वृंदावन में कई विधवाएं रहती हैं जो देश के अलग अलग हिस्सों से आई होती हैं. परिवार के लोग इन्हें यहां छोड़ देते हैं. रूढ़िवादी सोच में इन विधवाओं की होली से हर तरह का रंग खत्म कर दिया जाता है. कुछ ही साल पहले वृंदावन में विधवाओं की होली का चलन पागल बाबा के मंदिर से शुरू हुआ है. अमूमन ये होली फूलों की होली के अगले दिन अलग-अलग मंदिरों में खेली जाती है. जीवन के रंगों से दूर इन विधवाओं को होली खेलते देखना बहुत सुंदर प्रतीत होता है.

बरसाने की लठमार होली

इस होली में लोग रंगों के साथ-साथ लट्ठ का भी प्रयोग करते हैं.


यह होली दुनियाभर में मशहूर है. यह होली लठ (लाठी या डंडे) से भी खेली जाती है. मथुरा के पास स्थित बरसाना में यह त्योहार पूरे हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. बरसाना की इस होली को खेलने के लिए भारत के कई हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी लोग आते हैं. इस होली में लोग रंगों के साथ-साथ लट्ठ का भी प्रयोग करते हैं.

लठमार होली की शुरुआत होली के मुख्य पर्व से एक सप्ताह पहले ही हो जाती है. अगले दिन यह सेलिब्रेशन नंदगांव में पहुंचता है. लठमार होली से दो दिन पहले बरसाना में लड्डू होली का आनंद लिया जा सकता है. इसमें लोग एक-दूसरे पर मिठाई (लड्डू) फेंकते हैं. साथ ही राधा-कृष्ण के भजन गाए जाते हैं.

शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल

इस यूनिवर्सिटी के छात्र यहां आने वाले पर्यटकों के लिए कई अनोखे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं.


पश्चिम बंगाल में होली को बसंत उत्सव के के नाम से जाना जाता है. इस उत्सव की शुरुआत प्रसिद्ध बंगाली कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी. यह विश्व भारती यूनिवर्सिटी, शांतिनिकेतन में खेली जाती है. इस यूनिवर्सिटी के छात्र यहां आने वाले पर्यटकों के लिए कई अनोखे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं. इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग रंग-बिरंगे गुलाल से होली खेलते हैं. होली के साथ साथ यहां विभिन्न प्रकार के बंगाली व्यंजनों और मिठाइयों का भी मजा लिया जा सकता है.

आनंदपुर साहिब, पंजाब

इस त्योहार में सिख समुदाय के लोग कुश्ती, मार्शल आर्ट्स और तलवारों के साथ कई तरह के करतब दिखाते हैं.


अगर आप पंजाबी स्टाइल में होली का त्योहार मनाना चाहते हैं तो इस बार आनंदपुर साहिब जाने का प्लान बना सकते हैं. सन 1701 में होला मोहल्ला त्योहार की शुरुआत हुई थी. इस त्योहार में सिख समुदाय के लोग कुश्ती, मार्शल आर्ट्स और तलवारों के साथ कई तरह के करतब दिखाते हैं. साथ ही रंगों और गुलालों से होली खेली जाती है. लोग एक दूसरे के गले मिलते हैं और जमकर पंजाबी खाने का मजा लेते हैं.

उदयपुर की रॉयल होली

इस त्योहार में लोग आग जलाते हैं और शाही तरीके से होली सेलिब्रेट करते हैं.


होली की पूर्व संध्या पर उदयपुर में खास तरह से होली मनाई जाती है. इसे शाही या रॉयल होली कहते हैं. इस त्योहार में लोग आग जलाते हैं और शाही तरीके से होली सेलिब्रेट करते हैं. इस दौरान सिटी पैलेस में शाही निवास से मानेक चौक तक शाही जुलूस भी निकाला जाता है. इस जुलूस में घोड़े, हाथी से लेकर रॉयल बैंड भी शामिल होता है. नाच-गाने के साथ लोग होली पर जमकर मस्ती करते नजर आते हैं.

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पुरुलिया की होली

होली के दिन यहां पारंपरिक नृत्य और संगीत का आयोजन किया जाता है.


पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में भी होली को कुछ अलग ही तरीके से मनाया जाता है. होली के दिन यहां पारंपरिक नृत्य और संगीत का आयोजन किया जाता है. स्थानीय लोग लोक-नृत्य कर पर्यटकों का दिल जीत लेते हैं. साथ ही एक दूसरे को गुलाल लगाकर मिठाइयां खाते हैं.
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