Happy Rakshabandhan 2020: कब शुरू हुआ रक्षाबंधन का त्योहार, जान लें इसका अनोखा इतिहास

Happy Rakshabandhan 2020: कब शुरू हुआ रक्षाबंधन का त्योहार, जान लें इसका अनोखा इतिहास
रक्षाबंधन का इतिहास काफी पुराना है, जो सिंधु घाटी की सभ्यता से जुड़ा हुआ है.

रक्षाबंधन (Rakshabandhan) की परंपरा उन बहनों (Sisters) ने डाली थी जो सगी नहीं थीं, भले ही उन बहनों ने अपने संरक्षण के लिए ही इस पर्व की शुरुआत क्यों न की हो, लेकिन उसकी बदौलत आज भी इस त्योहार की मान्यता बरकरार है. माना जाता है कि इस त्योहार की शुरुआत 6 हजार साल पहले हुई थी.

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रक्षाबंधन (Rakshabadhan) भाई-बहन के प्यार का त्योहार है. रक्षाबंधन का दिन भाई-बहनों के लिए बहुत खास होता है. बहन भाई को राखी (Rakhi) बांधकर उसके लिए अपना प्यार दर्शाती है तो वहीं भाई भी उम्र भर बहन की रक्षा करने का वादा करते हैं. इस खास मौके पर भाई-बहन एक दूसरे को गिफ्ट (Gift) देकर स्पेशल फील कराते हैं. एक मामूली सा धागा जब भाई की कलाई पर बंधता है तो भाई भी अपनी बहन की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने को तैयार हो जाता है. क्या आप जानते हैं कि रक्षाबंधन का इतिहास काफी पुराना है, जो सिंधु घाटी की सभ्यता से जुड़ा हुआ है.

असल में रक्षाबंधन की परंपरा उन बहनों ने डाली थी जो सगी नहीं थीं, भले ही उन बहनों ने अपने संरक्षण के लिए ही इस पर्व की शुरुआत क्यों न की हो, लेकिन उसकी बदौलत आज भी इस त्योहार की मान्यता बरकरार है. माना जाता है कि इस त्योहार की शुरुआत 6 हजार साल पहले हुई थी. इसके कई साक्ष्य भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं. रक्षाबंधन की शुरुआत का साक्ष्य रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं का है.

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं
मध्यकालीन युग में राजपूत और मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था, तब चित्तौड़ के राजा की विधवा रानी कर्णावती ने गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से अपनी और अपनी प्रजा की सुरक्षा का कोई रास्ता न निकलता देख हुमायूं को राखी भेजी थी. तब हुमायूं ने उनकी रक्षा कर उन्हें बहन का दर्जा दिया था.
सिकंदर और पोरस


सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के हिंदू शत्रु पुरू को राखी बांध कर अपना मुंहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन लिया था. पुरू ने युद्ध के दौरान हाथ में बंधी राखी का और अपनी बहन को दिए हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवनदान दिया था. सिकंदर व पोरस ने युद्ध से पूर्व रक्षा-सूत्र की अदला-बदली की थी. युद्ध के दौरान पोरस ने जब सिकंदर पर घातक प्रहार करने के लिए अपना हाथ उठाया तो रक्षा-सूत्र को देखकर उसके हाथ रुक गए और वह बंदी बना लिया गया. सिकंदर ने भी पोरस के रक्षा-सूत्र की लाज रखते हुए और एक योद्धा की तरह व्यवहार करते हुए उसका राज्य वापस लौटा दिया.

निजाम रानी और मोहम्मद
गिन्नौरगढ़ के निजाम शाह गोंड के रिश्तेदार आलम शाह ने उन्हें एक षड्यंत्र के तहत जहर देकर मार डाला था. निजाम रानी कमलापति गोंड ने अपने पति की मौत का बदला लेने और अपनी रियासत को बचाने के लिए सरदार दोस्त मोहम्मद खान को राखी भेजकर मदद की गुजारिश की थी. दोस्त मोहम्मद खान ने रानी के रियासत की रक्षा की. रानी ने अपने भाई दोस्त मोहम्मद के प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हुए 50 हजार की राशि और 2 हजार की जनसंख्या वाला एक छोटा-सा गांव उन्हें भेंट किया. दोस्त मोहम्मद खान ने 1722 में भोपाल रियासत की नींव डाली और इस इलाके की बर्रूक झाड़ियों को काटकर भोपाल रियासत को बसाना शुरू किया था. इस तरह भोपाली बर्रूककाट भोपाली कहलाए. सन 1723 ईस्वी में रानी कमलापति की मृत्यु के बाद दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ को भी अपनी सल्तनत में शामिल कर लिया था.

भगवान श्रीकृष्ण और द्रोपदी
कृष्ण भगवान ने राजा शिशुपाल को मारा था. युद्ध के दौरान कृष्ण के बाएं हाथ की उंगली से खून बह रहा था, इसे देखकर द्रोपदी बेहद दुखी हुईं और उन्होंने अपनी साड़ी का टुकड़ा चीरकर कृष्ण की उंगली में बांध दिया जिससे उनका खून बहना बंद हो गया. कहा जाता है तभी से कृष्ण ने द्रोपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था. सालों के बाद जब पांडव द्रोपदी को जुए में हार गए थे और भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था, तब भागवान कृष्ण ने भाई का कर्तव्य निभाते हुए बहन द्रोपदी की लाज बचाई थी.

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इंद्राणी और इंद्र
भविष्य पुराण की एक कथा के अनुसार एक बार देवता और दानवों में 12 वर्षों तक युद्ध हुआ लेकिन देवता विजयी नहीं हुए. इंद्र हार के भय से दुखी होकर देवगुरु बृहस्पति के पास विमर्श लेने पहुंचे. गुरु बृहस्पति के सुझाव पर इंद्र की पत्नी महारानी शची ने श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन विधि-विधान से व्रत करके रक्षासूत्र तैयार किए और स्वस्तिवाचन के साथ ब्राह्मण की उपस्थिति में इंद्राणी ने वह सूत्र इंद्र की दाहिनी कलाई में बांधा जिसके फलस्वरुप इन्द्र सहित समस्त देवताओं की दानवों पर विजय हुई.

यम और यमुना
भाई और बहन के प्रतीक रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य रोचक कहानी मृत्यु के देवता भगवान यम और यमुना नदी की है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक यमुना ने एक बार भगवान यम की कलाई पर धागा बांधा था. वह बहन के तौर पर भाई के प्रति अपने प्रेम का इजहार करना चाहती थी. भगवान यम इस बात से इतने प्रभावित हुए कि यमुना की सुरक्षा का वचन देने के साथ ही उन्हें अमरता का वरदान भी दे दिया. साथ ही उन्होंने यह भी वचन दिया कि जो भाई अपनी बहन की मदद करेगा, उसे वह लंबी आयु का वरदान देंगे.

भगवान गणेश और संतोषी मां
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान गणेश के बेटे शुभ और लाभ एक बहन चाहते थे. तब भगवान गणेश ने यज्ञ वेदी से संतोषी मां का आह्वान किया. रक्षाबंधन, शुभ, लाभ और संतोषी मां के दिव्य रिश्ते की याद में भी मनाया जाता है. यह रक्षा विधान श्रावण मास की पूर्णिमा को सुबह संपन्न किया गया था तब ही से रक्षा बंधन अस्तित्व में आया और श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने लगा. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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