Happy Eid: ईद का चांद देख उसका चेहरा देखा था, करीबियों को भेजें रमज़ान ईद मुबारक मैसेजेस

Happy Eid: ईद का चांद देख उसका चेहरा देखा था, करीबियों को भेजें रमज़ान ईद मुबारक मैसेजेस
ईद मुबारकबाद

ईद मुबारकबाद की शायरी (Eid Mubarak 2020/Happy Eid ul Fitr 2020 Wishes) : लॉकडाउन में ईद का आप घर बैठे ही इन व्हट्सएप (WhatsApp messages), फेसबुक (facebook) मैसेजेस से ईद की शुभकामनाएं दे सकते हैं...

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ईद मुबारकबाद की शायरी (Eid Mubarak 2020/Happy Eid ul Fitr 2020 Wishes) : ईद पर लोग एक दूसरे को शुभकामनाएं और ईदी देते हैं. ईद पाक माह रमादान/रमज़ान के बाद मनाई जाती है. ईद के साथ ही रमादान खत्म होता है. ईद के दिन लोग कई तरह के पकवान जैसे सेवईं, बिरियानी और कई चीजें बनाते हैं. इस बार लॉकडाउन में ईद का आप घर बैठे ही इन व्हट्सएप (WhatsApp messages), फेसबुक (facebook) मैसेजेस से ईद की शुभकामनाएं दे सकते हैं...

चराग़ दिल के जलाओ कि ईद का दिन है...
चराग़ दिल के जलाओ कि ईद का दिन है
तराने झूम के गाओ कि ईद का दिन है



ग़मों को दिल से भुलाओ कि ईद का दिन है
ख़ुशी से बज़्म सजाओ कि ईद का दिन है



हुज़ूर उसकी करो अब सलामती की दुआ
सर-ए-नमाज़ झुकाओ कि ईद का दिन है

सभी मुराद हो पूरी हर एक सवाली की
दुआ को हाथ उठाओ कि ईद का दिन है. (क़तील)

है आबिदों को ताअ़तो-तज़रीद की खु़शी...

है आबिदों को ताअ़तो-तज़रीद की खु़शी.
और ज़ाहिदों को जुहद की तमहीद.
रिंद आशि़कों को है कई उम्मीद की खु़शी.
कुछ दिलबरों के वस्ल की कुछ दीद की खु़शी.
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी.
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी.

रोजे़ की खु़श्कियों से जो हैं ज़र्द-ज़र्द गाल.
खु़श हो गए वह देखते ही ईद का हिलाल.
पोशाकें तन में ज़र्द, सुनहरी, सफ़ेद, लाल.
दिल क कि हंस रहा है पड़ा तन का बाल-बाल.
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी.
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी.

पिछले पहर से उठके नहाने की धूम है.
शीरो शकर सिवैयां पकाने की धूम है.
पीरो को नेअमते खाने की धूम है.
लड़कों को ईदगाह के जाने की धूम है.
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी.
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी.

बैठे हैं फूल-फूल के मैख़ाना में कलाल.
और भंग ख़ानों में भी है सरसब्जियां कमाल.
छनती हैं भंगें, उड़ते हैं चरसों के दम निढाल.
देखो जिधर को सैर मज़ा ऐश क़ीलोक़ाल .
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी.
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी.

कोई तो मस्त फिरता है जामें शराब से.
कोई पुकारता है कि छूटे अज़ाब से.
कल्ला किसी का फूला है लड्डू की चाब से.
चटकारें जी में भरते हैं नानो कबाब से.
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी.
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी.

महबूब दिलबरों से है जिनकी लगी लगन.
उनके गले से आन लगा है जो गुल बदन.
सौ सौ तरह की चाह से मिल-मिल के तन से तन.
कहते हैं तुमको ईद मुबारक हो जानेमन.
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी.
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी.

क्या ही मुआनके़ की मची है उलट पलट.
मिलते हैं दौड़-दौड़ के बाहम झपट-झपट.
फिरते हैं दिलबरों के भी गलियों में ग़ट के ग़ट.
आशिक मजे़ उड़ाते हैं हर दम लिपट-लिपट.
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी.
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी.

काजल हिना ग़जब मिसी-व-पान क धड़ी.
पिश्वाजे़ं सुर्ख, सोसनी लाही की फुलझड़ी.
कुर्ती कभी दिखा कभी अंगिया कसी कड़ी.
कह ईद-ईद लूटे हैं दिल को घड़ी-घड़ी.
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी.
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी.

जो जो कि उनके हुश्न की रखते हैं दिल से चाह.
जाते हैं उनके साथ लगे ताब ईदगाह.
तोपों के शोर और दुगानों की रस्मो राह.
मियाने, खिलौने, सैर मजे़ ऐश वाह-वाह.
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी.
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी.

रोज़ों की सख़्तियों में न होते अगर असीर.
तो ऐसी ईद की न खु़शी होती दिल पज़ीर.
सब शाद हैं गदा[33] से लगा-शाह ता-वज़ीर.
देखा जो हमने खू़ब तो सच है मियां 'नज़ीर'.
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी.
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी. (नज़ीर अकबराबादी)

गए बरस की ईद का दिन क्या अच्छा था...

गए बरस की ईद का दिन क्या अच्छा था
चाँद को देख के उसका चेहरा देखा था
फ़ज़ा में कीट्स के लहजे की नरमाहट थी
मौसम अपने रंग में फ़ैज़ का मिश्रा था
दुआ के बेआवाज़ उलूही लम्हों में
वो लम्हा भी कितना दिलकश लम्हा था
हाथ उठा कर जब आँखों ही आँखों में
उसने मुझको अपने रब से माँगा था
फिर मेरे चेहरे को हाथों में लेकर
कितने प्यार से मेरा माथा चूमा था.

हवा कुछ आज की शब का भी अहवाल सुना
क्या वो अपनी छत पर आज अकेला था
या कोई मेरे जैसी साथ थी और उसने
चाँद को देख के उसका चेहरा देखा था. (परवीन शाकिर)
First published: May 24, 2020, 8:48 AM IST
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