Happy Teachers Day: जिंदगी के हर मोड़ पर कुछ इस तरह का पाठ पढ़ाते हैं शिक्षक, हमेशा रखें उन्हें याद

Happy Teachers Day: जिंदगी के हर मोड़ पर कुछ इस तरह का पाठ पढ़ाते हैं शिक्षक, हमेशा रखें उन्हें याद
शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षकों को ढेर सारी शुभकामनाएं...

Teacher’s day 2020: शिक्षा (Education) तो हम जीवन भर ग्रहण करते रहते हैं लेकिन इसकी नींव स्कूल (School) से शुरू होती है. स्कूल में हम जो सीखते हैं वह जिंदगी भर हमारा साथ देती है या फिर यूं कहें कि जीवन को गढ़ने में मदद करती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 5, 2020, 11:40 AM IST
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कहते हैं कि एक अच्छा जीवन मां-बाप (Mother and Father) से मिलता है लेकिन इस जीवन को सही तरीके से जीने के उपाय एक शिक्षक (Teacher) ही समझाता है. शिक्षक हमें जीवन में सफल (Successful) होने के लिए तैयार करते हैं. एक अच्छा शिक्षक समाज में अच्छे इंसान बनने और देश के अच्छे नागरिक बनने में हमारी मदद करता है. हमें जीवन के हर कदम पर शिक्षकों की जरूरत होती है. शिक्षक न केवल छात्रों के लिए बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं. किसी भी बैठक और सामाजिक गतिविधियों में शिक्षकों की उपस्थिति नैतिकता को बढ़ावा देती है और समय को और अधिक मूल्यवान बनाती है. शिक्षक हमें एक अच्छा इंसान बनाने में मदद करते है. एक अच्छा इंसान ही समाज के विकास में योगदान दे सकता है. कई बार हमारे शिक्षक हमें करियर चुनने में भी मदद करते हैं.

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दरअसल वह जानते हैं कि हम किस विषय में अच्छे हैं, हमारी सोच क्या है और हम कितना काम कर सकते हैं. मैंने भी अपने शिक्षकों से बहुत ही कुछ सीखा है. शिक्षा तो हम जीवन भर ग्रहण करते रहते हैं लेकिन इसकी नींव स्कूल से शुरू होती है. स्कूल में हम जो सीखते हैं वह जिंदगी भर हमारा साथ देती है या फिर यूं कहें कि जीवन को गढ़ने में मदद करती है. आज शिक्षक दिवस 2020 (Teachers Day 2020) के मौके पर आइए जानते हैं मैंने अपने कुछ खास शिक्षकों से जिंदगी में क्या सीखा.



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शिक्षकों ने जिंदगी में किताबों से बढ़कर भी बहुत कुछ सिखाया है
मैं केंद्रीय विद्यालय की छात्रा रही हूं. मेरे पिता मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में थे तो कई जगहों पर उनका ट्रांसफर होता रहता था. इसी कारण मैं कई स्कूलों में पढ़ी हूं. कई शिक्षकों से बहुत सारा ज्ञान हासिल किया है लेकिन कुछ शिक्षकों ने जिंदगी में किताबों से बढ़कर भी बहुत कुछ सिखाया है जिनमें मेरी विचारधाराएं भी शामिल हैं. केंद्रीय विद्यालय मुरादनगर के प्राइमरी क्लासेस में पढ़ने के दौरान मुझे नीलम कुमार मैडम ने हमेशा बहुत कुछ अलग से सिखाने की कोशिश की. मेरी गलतियों को सुधारने के साथ साथ मुझे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. मैं बचपन से ही बहुत फ्रेंडली नेचर की रही हूं. स्कूल में मुझे बहुत मजा आता था. पढ़ाई के साथ साथ को-करिकुलर एक्टिविटीज में भी मैं बचपन से शामिल होती रही हूं. फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता से लेकर कविता पाठ प्रतियोगिता तक हमेशा मैंने इन सभी में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है और पुरस्कार भी जीते हैं.

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आगे बढ़कर मेरा हौसला बढ़ाया है
ये बात सच है कि मेरी मां ने मुझे ऐसा तैयार करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है लेकिन स्कूल में आगे बढ़ने के लिए हौसला शिक्षकों ने ही दिया है. ऐसे में नीलम कुमार मैडम ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया है. उन्होंने पढ़ाई से लेकर हर एक्टिविटीज में आगे बढ़कर मेरा हौसला बढ़ाया है और शायद सही कारण है कि मैं आज जैसी भी हूं उसमें उनके सिखाएं हुए गुण भरे हुए हैं. इसके बाद अगर बात करें तो केंद्रीय विद्यालय मुरादनगर में ही मेरी इंग्लिश की टीचर रहीं वीना मल्लिक मैम से मैंने कई गुण सीखे हैं. मल्लिक मैम काफी चुपचाप रहती थीं. उन्होंने मेरी शैतानियों पर मुझे कभी नहीं डांटा बल्कि हर वक्त शांति से समझाया है. मुझे आज भी याद है कि उनका समझाना हमेशा शांत तरीके का होता था जैसे कि आपको बिल्कुल डर न लगे, आप घबराए नहीं.

अंदर की कलाओं को बाहर उभारा है
अक्सर बच्चे अपने टीचर्स से डरने लगते हैं लेकिन वीना मल्लिक मैम के साथ ऐसा कभी नहीं लगा. मैं पढ़ाई में हमेशा तेज थी और मैम इसके लिए मेरी जमकर तारीफ करती थीं. उन्होंने मुझे पढ़ाई के लिए कभी नहीं डांटा. मैं खूब हंसती हूं, मुस्कुराती हूं और ठीक उसी तरह वीना मल्लिक मैम भी मुस्कुराती थीं. मेरी छोटी छोटी शैतानियों और गलतियों पर भी. मैं आज भी जिंदगी की कई कठिनाइयों में बिल्कुल वीना मल्लिक मैम की तरह बेझिझक मुस्कुराती हूं ताकि किसी चीज का प्रेशर महसूस न हो सके. वहीं इसी स्कूल में मेरी म्यूजिक टीचर रहीं प्रमिला सक्सेना मैम ने मेरी अंदर की कलाओं को बाहर उभारा है. शायद पहली बार मुझे मेरी डांसिंग और सिंगिंग स्किल्स के बारे में उन्हीं से पता चला था. मैं डांस करती थी, गाना गाती थी लेकिन उन्होंने मुझे संवारकर तैयार किया ताकि मैं भविष्य में इन गुणों को लोगों के सामने रख सकूं और ऐसा हुआ भी.

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छात्रों को लाइफ स्किल की ट्रेनिंग भी जरूरी
मैंने अपनी 11वीं और 12वीं की पढ़ाई कोलकाता में केंद्रीय विद्यालय नंबर-1 ईशापुर से की है. मैं साइंस की स्टूडेंट रही हूं. मेरे केमेस्ट्री के टीचर पार्थ दत्ता सर से मैंने बहुत कुछ सीखा है. सिर्फ लैब में केमिकल फॉरमेशन ही नहीं बल्कि जिंदगी के केमेस्ट्री को भी समझने की कोशिश की है. उन्होंने कई बार किताबों से हटकर जिंदगी के सही पहलुओं को बताते हुए छात्रों को लाइफ स्किल की ट्रेनिंग भी दी है. इस उम्र में अक्सर बच्चे सही राह से भटक जाते हैं. ऐसे में पार्थ दत्ता सर ने हमेशा सही राह चुनने के बारे में जोर दिया है. वह डांटते थे लेकिन अगले ही पल मुस्कुराकर समझाने भी लगते थे कि जिंदगी में कभी कभी बड़ों का डांटना भी जरूरी होता है नहीं तो कई चीजें समझ से बाहर हो जाती हैं. आज टीचर्स डे के मौके पर मैं इस लेख के माध्यम से अपने सभी शिक्षकों को सम्मान और प्यार जताना चाहती हूं. मैं शुक्रगुजार हूं अपने शिक्षकों की जिन्होंने मुझे इस काबिल बनाया.
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