Hariyali Teej 2018: खास लोकगीत गाकर मनाएं त्यौहार

कहा जाता है कि कुवांरी लड़कियां अगर इस व्रत को करें तो उन्हें भगवान शिव जैसा पति मिलता है.

News18Hindi
Updated: August 13, 2018, 11:22 AM IST
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Updated: August 13, 2018, 11:22 AM IST
हरियाली तीज हिंदू धर्म का सबसे बड़ा व्रत माना जाता है. महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत करती हैं. वहीं कुवांरी लड़कियों के लिए भी ये व्रत बड़ा खास माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि कुवांरी लड़कियां अगर इस व्रत को करें तो उन्हें भगवान शिव जैसा पति मिलता है. पूरा दिन भूखे प्यासे रहकर महिलाएं रतजगा भी करती हैं. इस दौरान तरह-तरह के लोकगीत गाए जाते हैं.

हरियाली तीज
अम्मा मेरी रंग भरा जी, ए जी कोई आई हैं हरियाली तीज.
घर-घर झूला झूलें कामिनी जी, बन बन मोर पपीहा बोलता जी.

एजी कोई गावत गीत मल्हार,सावन आया...
कोयल कूकत अम्बुआ की डार पें जी, बादल गरजे, चमके बिजली जी.
एजी कोई उठी है घटा घनघोर, थर-थर हिवड़ा अम्मा मेरी कांपता जी.
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सावन आया...
पांच सुपारी नारियल हाथ में जी, एजी कोई पंडित तो पूछन जाएं.
कितने दिनों में आवें लष्करीया जी, पतरा तो लेकर पंडित देखता जी.
ए जी कोई जितने पीपल के पात, उतने दिनों मे आवें लश्करीया जी.
इतने में कुण्डा अम्मां मोरी खड़कियां जी, एजी कोई घोड़ा तो हिनसाद्वार.
टगटग महलों आए लष्करीया जी, घोड़ा तो बांधों बांदी घुड़साल में जी.
एजी कोई चाबुक रखियो संभाल, सावन आया...
पैर पखारू उजले दूध में जी, हिलमिल सखियां झूला झूलती जी.
एजी कोई हंस हंस झोटे देय, सावन आया रंग-भरा जी.
अम्मा मेरे बाबा को भेजो री, कि सावन आया कि सावन आया कि सावन आया...
बेटी तेरा बाबा तो बूढ़ा री, कि सावन आया कि सावन आया कि सावन आया...
अम्मा मेरे भैया को भेजो री...
बेटी तेरा भैया तो बाला री,  सावन आया, सावन आया...



सावन का महीना
सावन का महीना, झुलावे चित चोर, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
मनवा घबराये मोरा बहे पूरवैया, झूला डाला है नीचे कदम्ब की छैयां...
कारी अंधियारी घटा है घनघोर, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
सखियां करे क्या जाने हमको इशारा, मन्द मन्द बहे जल यमुना की धारा...
श्री राधेजी के आगे चले ना कोई जोर, धीरे झूलो राधे, पवन करे शोर,
मेघवा तो गरजे देखो बोले कोयल कारी, पाछवा में पायल बाजे नाचे बृज की नारी...
श्री राधे परती वारो हिमरवाकी और, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
सावन का महीना झूलावे चित चोर...



नांनी नांनी बूंदियां
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा,
एक झूला डाला मैंने बाबल के राज में,
बाबुल के राज में...
संग की सहेली हे सावन का मेरा झूलणा,
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा.
ए झूला डाला मैंने भैया के राज में,
भैया के राज में...
गोद भतीजा हे सावन का मेरा झूलणा,
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा...



सावन दिन  गए
अरी बहना! छाई घटा घनघोर, सावन दिन आ गए.
उमड़-घुमड़ घन गरजते, अरी बहना! ठण्डी-ठण्डी पड़त फुहार.
सावन दिन...
बादल गरजे बिजली चमकती, अरी बहना! बरसत मूसलधार.
सावन दिन...
कोयल तो बोले हरियल डार पे, अरी बहना! हंसा तो करत किलोल.
सावन दिन...
वन में पपीहा पिऊ पिऊ रटै, अरी बहना! गौरी तो गावे मल्हार.
सावन दिन...
सखियां तो हिलमिल झूला झूलती, अरी बहना! हमारे पिया परदेस.
सावन दिन...
लिख-लिख पतियां मैं भेजती, अजी राजा सावन की आई बहार.
सावन दिन...
हमरा तो आवन गोरी होय ना, अजी गोरी! हम तो रहे मन मार.
सावन दिन...
राजा बुरी थारी चाकरी,
अजी राजा जोबन के दिन चार
सावन दिन.
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