हवा में बढ़ते जहर से कम उम्र में खराब हो रहे फेफड़े

वायु प्रदुषण का सेहत पर दुष्प्रभाव जानने के लिए शोधकर्ताओं ने 5 सालों तक लगभग 3 लाख होगों का गहराई से अध्ययन किया.

News18Hindi
Updated: July 10, 2019, 2:07 PM IST
हवा में बढ़ते जहर से कम उम्र में खराब हो रहे फेफड़े
हवा में बढ़ते जहर से कम उम्र में खराब हो रहे 'फेफड़े'
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Updated: July 10, 2019, 2:07 PM IST
महानगरों में रोजाना बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों को दिन पर दिन बूढ़ा बना रहा है और साथ ही उनकी सेहत भी खराब कर रहा है. वायु प्रदुषण का सेहत पर दुष्प्रभाव जानने के लिए शोधकर्ताओं ने 5 सालों तक लगभग 3 लाख होगों का गहराई से अध्ययन किया. इसमें उन्होंने फेफड़ों पर वायु प्रदूषण के प्रभाव का विश्लेषण किया. निष्कर्ष में यह बात सामने आई कि हवा में मौजूद प्रदूषण के कण व्यक्ति के फेफड़ों को समय से पहले ही कमजोर कर रहे हैं जिस वजह से 45 साल तक उम्र के लोगों का फेफड़ा 60 साल की उम्र के लोगों की तरह है.

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प्रदूषण की वजह से फेफड़े अपेक्षाकृत समय से पहले ही कमजोर होते जाते रहे हैं. इससे वो शरीर को सुचारू रूप से ऑक्सीजन की सप्लाई भी नहीं कर पाते हैं जिससे बॉडी की एक्टिविटी भी प्रभावित होती है. इसकी वजह से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) होने की संभावना में भी काफी इजाफा होता है. इसके फलस्वरूप lungs में सूजन आ जाती है. इससे श्वसन नली सिकुड़ जाती है और सांस लेने में तकलीफ होती है.

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PM2.5की वजह से बढ़ रही दिक्कत:
वायु में मौजूद PM2.5 प्रदूषण के कणों की वजह से प्रतिवर्ष फेफड़ों की उम्र 2 साल तक घटती जा रही है जिसकी वजह से उनकी कार्य करने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है. इस सिलसिले में यूरोपियन रेस्पिरेटरी जर्नल में छापी गई रिपोर्ट के मुताबिक़, उम्र के बढ़ने के साथ ही फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और वो कम मात्रा में बॉडी को ऑक्सीजन सप्लाई दे पाते हैं. लेकिन हवा में मौजूद प्रदूषण की वजह से लोगों की उम्र भी पहले की अपेक्षा काफी कम होने लगी है. इससे सबसे ज्यादा नुकसान फेफड़ों को हुआ है.

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