आर्टिफीशियल लाइट से बढ़ता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, आज ही जान लें ये बड़ी बात

आर्टिफीशियल लाइट से बढ़ता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, आज ही जान लें ये बड़ी बात
आर्टिफीशियल लाइट शरीर की प्राकृतिक सर्कैडियन लय को बाधित करता है.

शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने एक ऑब्जेक्टिव एक्सपोजर मापक का इस्तेमाल किया, जिसने सैटेलाइट डेटा (Satellite Data) से रात में बाहरी रोशनी का अनुमान लगाया. शोध टीम ने 16 साल की अवधि में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) के मामलों को देखा और अन्य नियंत्रित कारकों को ध्यान में रखा.

  • Last Updated: June 17, 2020, 5:43 PM IST
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मेनोपॉज (Menopause) के बाद यदि महिलाएं रात में आर्टिफीशियल लाइट (Artificial Light) के ज्यादा संपर्क में हों तो उन्हें ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) होने की आशंका 10 प्रतिशत अधिक होती है. एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है. 16 साल के इस अध्ययन में लगभग 2 लाख महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की दर की तुलना उन बाहरी रोशनी के सैटेलाइट इमेज से की, जहां वे रहती थीं.

डेमोग्राफी पर पहले बहुत कम शोध किया गया था
अमेरिका में नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने केवल उन महिलाओं का आकलन किया जो पहले से ही मेनोपॉज से गुजर रही थीं, क्योंकि इस डेमोग्राफी पर पहले बहुत कम शोध किया गया था. myUpchar से जुड़े डॉ. विशाल मकवाना का कहना है कि मासिक धर्म का स्थायी रूप से बंद हो जाना मेनोपॉज या रजोनिवृत्ति कहलाता है. ज्यादातर महिलाओं में मेनोपॉज करीब 45-51 साल की उम्र के बीच शुरू होता है.

16 साल की अवधि में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर 
शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने एक ऑब्जेक्टिव एक्सपोजर मापक का इस्तेमाल किया, जिसने सैटेलाइट डेटा से रात में बाहरी रोशनी का अनुमान लगाया. शोध टीम ने 16 साल की अवधि में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों को देखा और अन्य नियंत्रित कारकों को ध्यान में रखा. रात के समय बाहरी रोशनी के संपर्क में सबसे निचले स्तर की तुलना में, सबसे ज्यादा एक्सपोजर ब्रेस्ट कैंसर होने के 10 प्रतिशत अधिक जोखिम से जुड़ा था.



आर्टिफीशियल लाइट और ब्रेस्ट कैंसर 
निष्कर्षों में यह भी बताया गया कि रात में आर्टिफीशियल लाइट और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम के बीच संबंध व्यक्तिगत आदतों जैसे स्मोकिंग, शराब पीने, नींद की अवधि और बीएमआई और पड़ोस के वातावरण से भिन्न हो सकते हैं. हालांकि, इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित अध्ययन स्पष्टीकरण नहीं देता है. पिछले शोध में पाया गया है कि आर्टिफीशियल लाइट हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन में हस्तक्षेप कर सकता है, जो कुछ कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकता है.

शरीर में मेलाटोनिन की मात्रा को कम करता है
चूंकि मेलाटोनिन यह नियंत्रित करने में शामिल है कि नींद के दौरान शरीर कैसे रिकवर हो जाता है, कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह संभव है कि आर्टिफीशियल लाइट शरीर की प्राकृतिक सर्कैडियन लय को बाधित करता है और इसलिए शरीर में मेलाटोनिन की मात्रा को कम करता है. आर्टिफीशियल लाइट और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध पर सालों से बहस चल रही है और लंबे समय से चल रहे अलग-अलग अध्ययन अलग-अलग जवाब देते रहते हैं. पिछले दो सालों में ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर के अध्ययन से पता चला है कि रात में रोशनी के संपर्क में आने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा नहीं बढ़ा, ना तो मेनोपॉज के पहले ना बाद में.

ब्रेस्ट कैंसर स्तन की कोशिकाओं में विकसित होता है
अध्ययन में यह भी कहा गया कि रात की शिफ्ट से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. myUpchar से जुड़े डॉ. उमर अफरोज का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर स्तन की कोशिकाओं में विकसित होता है. आमतौर पर कैंसर स्तन के लोब्यूल्स या डक्ट्स में बनता है. ये वो ग्रंथियां हैं, जिनमें दूध बनता है और जो दूध को ग्रंथियों से निप्पल्स तक पहुंचाने का रास्ता देती हैं. कैंसर वसामय और रेशेदार स्तन ऊतकों में भी बन सकता है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, ब्रेस्ट कैंसर के ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी के लिए पढ़ें.

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