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बिग बॉस के अब्दू रोजिक की हाइट क्यों नहीं बढ़ी? डॉक्टर से जानें यह बीमारी और इसका इलाज

डॉ रिचा चतुर्वेदी ने ग्रोथ डिफिशिएंसी हार्मोन के बारे में पूरी जानकारी दी.

डॉ रिचा चतुर्वेदी ने ग्रोथ डिफिशिएंसी हार्मोन के बारे में पूरी जानकारी दी.

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Growth hormone deficiency: एक अक्टूबर से कलर्स टीवी पर शुरू हुए बिग बॉस सीजन 16 इस बार एक खास मेहमान के कारण चर्चा में हैं. इस बार बिग बॉस में तजाकिस्तान के खास मेहमान अब्दू रोजिक की एंट्री हुई है. अब्दू रोजिक की हाइट महज 3 फुट 1 इंच की है. लेकिन उनके कारनामे बहुत बड़े हैं. वे दुनिया के सबसे छोटे सिंगर हैं. अपनी हाजिरजवाबी और कौशल के कारण अब्दू रोजिक बिग बॉस के सबसे लोकप्रिय कंटेस्टेंट बनते जा रहे हैं. आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि अब्दू रोजिक की उम्र 19 साल है लेकिन वे देखने में 6-7 साल के लगते हैं. बचपन में वे ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी के शिकार हो गए थे. इसके अलावा उन्हें 5 साल की उम्र में रिकेटस की बीमारी भी हो गई थी. अब्दू रोजिक के माता-पिता ने उन्हें इलाज तो कराया लेकिन इसके लिए बहुत ज्यादा पैसे की जरूरत थी. इतना पैसा वे नहीं जुटा पाए. इसके परिणामस्वरूप उनके शरीर का विकास वहीं रूक गया. आज वे 6-7 साल के बच्चे लगते हैं.

क्या है ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली में सीनियर कंसल्टेंट इंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ रिचा चतुर्वेदी ने बताया कि बच्चों के शरीर में हड्डियों और टिशू के विकास के लिए ग्रोथ हार्मोन का स्त्राव बहुत जरूरी है. लेकिन जब पिट्यूटरी ग्लैंड से ग्रोथ हार्मोन का पर्याप्त स्राव नहीं होता या होना ही बंद हो जाता है, तब ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी होती है. ग्रोथ हार्मोन की कमी के कारण बौनापन और ठिगनापन आता है.

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क्यों होती है यह बीमारी
डॉ रिचा चतुर्वेदी ने बताया कि पिट्यूटरी ग्लैंड या हाइपोथैलमस ग्लैंड अगर किसी वजह से डैमेज हो जाए तो बच्चे में ग्रोथ हार्मोन नहीं बनता. इंज्युरी भी इसका कारण हो सकती है जिससे बच्चों में जन्म से पहले या बाद में पिट्यूटरी ग्लैंड या हाइपोथैलमस ग्लैंड क्षतिग्रस्त हो सकता है. ये दोनों ग्लैंड क्यों डैमेज होते हैं, कभी-कभी इसके कारणों का पता नहीं भी चल सकता है. चूंकि पिट्यूटरी ग्लैंड दिमाग के बेस में स्थित मटर के आकार का मास्टर ग्लैंड है और इससे 16 अन्य हार्मोन भी स्रावित होते है, इसलिए अन्य हार्मोन के प्रभाव के कारण अन्य असर भी दिखते हैं.

ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी के लक्षण
डॉ रिचा चतुर्वेदी ने बताया कि अगर बच्चे का विकास उसी उम्र के दूसरे बच्चे की तरह न हो तो समझना चाहिए कि बच्चे में ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी है. हालांकि इसके और भी कई लक्षण हैं. इसमें बच्चे की लंबाई अन्य बच्चों से बहुत कम होती है. डॉ चतुर्वेदी ने बताया कि अधिकांश मामलों में ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी के साथ-साथ फीमेल में एस्ट्रोजन और मेल में टेस्टेस्टोरॉन डिफिशिएंसी भी हो जाती है. अगर ये दोनों स्थितियां एक साथ है तो बच्चों में यौवनारंभ (Puberty) भी प्रभावित होता है. डॉ चतुर्वेदी ने बताया कि इसे सामान्य तरीके से ऐसे समझ सकते हैं फीमेल बच्चे में ब्रेस्ट का डेवलपमेंट नहीं हो पाता है और पीरियड भी नहीं आता, वहीं मेल बच्चे की आवाज में दूसरे बच्चों की तुलना में भारीपन नहीं आ पाता है. इन सब परेशानियों की वजह से बच्चे में डिप्रेशन और एंजाइटी हो सकती है और किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत हो सकती है. ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी में बच्चे की मेमोरी बहुत खराब रहती है. कॉन्स्टिपेशन की भी शिकायत रह सकती है. इस बीमारी में बच्चे का चेहरा बहुत गोल मटोल और बहुत छोटा दिखता है. बालों का विकास नहीं हो पाता है. अगर होता भी है तो बहुत बेकार दिखते हैं. हालांकि इन सबसे बच्चे की बौद्धिक क्षमता प्रभावित नहीं होती.

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए
डॉ रिचा चतुर्वेदी कहती हैं कि बच्चों में ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी के लक्षण शुरुआत से दिखने लगते हैं. 3 साल से 8 साल के बीच में ये लक्षण आमतौर पर दिखने लगते हैं लेकिन दुर्भाग्य से पैरेंट्स इसे नजरअंदाज कर देते हैं. उन्होंने कहा कि अगर बच्चों में इसके लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. डॉक्टर जांच कर यह पता लगाता है कि बच्चे का विकास किस कारण रूका हुआ है. अगर बच्चे में ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी है तो रोजाना हार्मोन का इंजेक्शन देकर इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है. 3 से 4 महीने के अंदर इलाज का प्रभाव दिखने लगता है. हालांकि इसका इलाज यौवन आने तक किया जाता है.

इलाज पर कितना खर्च आता है
डॉ रिचा चतुर्वेदी ने बताया कि ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी का इलाज थोड़ा महंगा. इसलिए आर्थिक तंगी के कारण कुछ लोग बच्चे का इलाज नहीं करा पाते हैं. उन्होंने बताया कि ग्रोथ डिफिशिएंसी के इलाज पर एक महीने में 10 से 20 हजार का खर्च आ सकता है. यही कारण रहा होगा कि अब्दू रोजिक के पिता आर्थिक तंगी के कारण उनका इलाज नहीं करा सके होंगे. अब्दू रोजिक को रिकेटस की भी बीमारी थी. इस परिस्थिति में दोनों का इलाज-इलाज अलग-अलग तरह से किया जाता है. यानी इसमें और अधिक खर्च करना पड़ता है. डॉ रिचा चतुर्वेदी कहती हैं कि हर हाल में 13 साल से पहले ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी से पीड़ित बच्चों को डॉक्टर के पास ले आना चाहिए.

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