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नवजात की गर्भनाल: संक्रमण से बचाने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

शिशु की गर्भनाल की करें देखभाल ताकि न हो संक्रमण

शिशु की गर्भनाल की करें देखभाल ताकि न हो संक्रमण

जन्म के बाद शिशु की गर्भनाल यानी जिसके जरिए वो मां से जुड़ा होता है, नाभि के पास दिखती रहती है. डॉक्टर इसपर एक चिमटी लग ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
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    जन्म के बाद शिशु की गर्भनाल यानी जिसके जरिए वो मां से जुड़ा होता है, नाभि के पास दिखती रहती है. डॉक्टर इसपर एक चिमटी लगा देते हैं, जो नाल के सूखने के बाद खुद गिर जाती है. हालांकि कई बार हमारी असावधानी से बच्चों के गर्भनाल के जरिए संक्रमण हो सकता है. हम आपसे साझा कर रहे हैं कुछ जानकारियां. इन्हें ध्यान में रखकर शिशु को संक्रमण से बचाया जा सकता है.

    होता है डर
    शिशु की गर्भनाल करीब ढाई सेंटीमीटर लंबी होती है. ये लगभग दो हफ़्तों के भीतर सूख कर झड़ जाती है. वैसे इसे पूरी तरह से सूखने में लगभग महीनाभर लग सकता है. इसके लिए डॉक्टर अक्सर नारियल तेल को रूई की मदद से नाल पर लगाने कहते हैं. हालांकि इस दौरान साफ-सफाई में थोड़ी भी लापरवाही बच्चों को बीमार कर सकती है.

    मिलें डॉक्टर से
    कुछ लक्षणों को नजरअंदाज करना शिशु को गंभीर संक्रमण दे सकता है. अगर शिशु की गर्भनाल के आसपास सूजन के साथ लालिमा नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें. शिशु उसके आसपास छूते ही रोने लगे तो ये संक्रमण का शुरुआती लक्षण है. अगर शिशु को लगातार बुखार आ रहा हो, तब तुरंत डॉक्टर से मिलें.

    ऐसे करें देखभाल
    कोशिश करें कि गर्भनाल की जगह सूखी रहे. नहलाते वक्त उस जगह साबुन लगाकर रगड़ना नहीं चाहिए. इससे वो जगह छिल सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. अगर वहां लगाने के लिए डॉक्टर ने कोई दवा दी है, तो उसे नियमित रूप से लगाएं. हमेशा साफ हाथों से ही दवा अप्लाय करें. शुरुआत के कुछ हफ्ते आप शिशु को स्पंज बाथ दे सकते हैं, इससे गर्भनाल को चोट नहीं लगती है.

    Tags: Baby Care, Parenting

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