मूंगफली, चने और केले दुनिया से इस बीमारी का कर सकते हैं सफाया!

शोध के तहत पाया गया कि एक आहार है जो उनके लिए मददगार रहा है और वह है- सोया, पिसी हुई मूंगफली, चने और केले. इस भोजन से आंतों में रहने वाले उन सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ी है जो हड्डियों, दिमाग और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार माने जाते हैं.

News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 3:26 PM IST
मूंगफली, चने और केले दुनिया से इस बीमारी का कर सकते हैं सफाया!
मूंगफली, चने और केले दुनिया से इस बीमारी का कर सकते हैं!
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Updated: August 6, 2019, 3:26 PM IST
कमाल की बात है मगर यदि यह सही साबित होती है और इसे तरीके लागू कर लिया जाता है तो दुनिया कुपोषण जैसे अभिशाप से बच जाएगी. बीबीसी ने पिछले दिनों एक रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर छापी जिसमें कहा गया है कि तीन काफी सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो जाने वाली चीज़ें ऐसी हैं जो कुपोषण के शिकार बच्चों की हालत तेज़ी से सुधार सकती हैं. अमेरीका की वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध के हवाला देते हुए बीबीसी ने लिखा है कि मूंगफली, चने और केले कुपोषण खत्म कर सकते हैं.

यह शोध 'साइंस' जर्नल में पब्लिश हुआ है जिसे कोट करते हुए बीबीसी ने लिखा है कि इन तीनों से तैयार किए गए आहार से आंतों में रहने वाले फायदेमंद जीवाणुओं की हालत में सुधार होता है जिससे बच्चों का तेज गति से विकास होता है. बांग्लादेश में बहुत से कुपोषित बच्चों पर किए गए शोध के परिणामों के मुताबिक़, फायदेमंद जीवाणुओं की संख्या बढ़ने से बच्चों की हड्डियों, दिमाग और पूरे शरीर के विकास में मदद मिलती है. इस शोध के चीफ रिसर्चर जेफरी गॉर्डन का मानना है कि कुपोषित बच्चों के धीमे विकास की वजह उनकी पाचन नली में अच्छे बैक्टीरिया की कमी हो सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में 15 करोड़ से अधिक बच्चे इससे प्रभावित हैं. पांच साल के कम उम्र के बच्चों की मौतों में से आधी कुपोषण के कारण ही होती हैं. कुपोषित बच्चे न सिर्फ़ सामान्य बच्चों की तुलना में कमज़ोर और छोटे होते हैं बल्कि इनमें से कई के पेट में लाभदायक बैक्टीरिया वगैरह या तो होते ही नहीं हैं या फिर बहुत कम होते हैं.

शोध के तहत पाया गया कि एक आहार है जो उनके लिए मददगार रहा है और वह है- सोया, पिसी हुई मूंगफली, चने और केले. इस भोजन से आंतों में रहने वाले उन सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ी है जो हड्डियों, दिमाग और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार माने जाते हैं. वहीं, अधिक चावल और मसूर की दाल वाला भोजन इस मामले में मददगार नहीं रहा. बल्कि, कुछ मामलों में तो यह भी पाया गया कि इससे पेट के अंदर के जीवाणुओं को नुक़सान हो गया. जेफरी गॉर्डन कहते हैं, 'सूक्ष्म जीवी यह नहीं देखते कि क्या केला है और कौन सी मूंगफली. वे बस इनके अंदर के पोषक तत्वों को इस्तेमाल करते हैं.'

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First published: August 6, 2019, 1:50 PM IST
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