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Coronavirus: जानें कैसे काम करती है ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन, क्या होगा इसका असर

भारत में यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह वैक्सीन मार्च 2021 तक देश के फ्रंट लाइन वर्कर्स को लगाई जा सकती है और उसके बाद 60 साल से ऊपर के लोगों पर लगाए जाने की संभावना है.

ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन (Vaccine) चिंपैंजी के एडिनोवायरस से तैयार की जा रही है. यह वायरस (Virus) हानिकारक नहीं होगा क्योंकि इसे कमजोर कर दिया जाता है.

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    दुनियाभर में कोरोना (Corona) का कहर कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. भारत (India) में कोरोना की रफ्तार थोड़ी सी कम हुई ही थी कि सर्दी का मौसम (Winter Season) आते ही फिर से कोरोना का खतरा बढ़ गया है. हालांकि राहत की खबर यह है कि इसकी वैक्सीन (Vaccine) को लेकर कुछ अच्छी खबरें भी देखने को मिल रही है. आइए चर्चा करते हैं कि भारत में कौन सी वैक्सीन जल्द ही आने की उम्मीद है और यह कितनी कारगर होगी.

    ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन

    ऑक्सफोर्ड की कोरोना वायरस वैक्सीन पर चल रहे परीक्षणों के परिणाम उम्मीद जगाते हुए दिख रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि यूके की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई गई यह वैक्सीन अब बहुत ही जल्द भारत में आ जाएगी. दूसरी तरफ भारत में भी इस वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है.

    कैसे तैयार की गई वैक्सीन

    ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन चिंपैंजी के एडिनोवायरस से तैयार की जा रही है. यह वायरस हानिकारक नहीं होगा क्योंकि इसे कमजोर कर दिया जाता है. इस वैक्सीन में वेक्टर को चिंपैंजी के एडिनोवायरस से लिया गया है. जब यह वायरस किसी व्यक्ति के शरीर में प्रवेश किया जाता है तो यह एक विशेष तरह का प्रोटीन बनाता है. इसके बाद मरीज के शरीर में कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडीज तैयार हो जाती हैं.

    कितना समय रहेगा इस वैक्सीन का असर

    एक रिपोर्ट के मुताबिक लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल करने पर इसका काफी सकारात्मक असर पड़ा है. ट्रायल के बाद के परिणामों में यह देखा गया कि जिन्हें इस वैक्सीन की डोज दी गई, उनमें एंटीबॉडीज बनने के साथ ही टी-सेल भी बने. किसी वायरस के खिलाफ जब शरीर में टी-सेल बन जाती है तो दोबारा उस वायरस के होने पर यह टी-सेल्स उस वायरस के खिलाफ लंबे समय तक लड़ने में काम आती है. myUpchar के अनुसार, पहले चरण में कोरोना वायरस का स्पाइक प्रोटीन का जेनेटिक कोड पहचाना जा चुका है. इसके बाद दूसरे चरण में सिंपल जीके एडिनोवायरस को मॉडिफाई करके स्पाइक प्रोटीन बनाए गए. यह प्रोटीन शरीर में एंटीबॉडी तैयार करने लगते हैं.

    ट्रायल के बाद के साइड इफेक्ट

    myUpchar के अनुसार, लोगों में इस वैक्सीन के ट्रायल के बाद कुछ ही साइड इफेक्ट्स देखने को मिले, जो सामान्य हैं, जैसे बुखार, सिरदर्द और वैक्सीनेशन वाले स्थान पर रिएक्शन होना आदि, लेकिन इनका असर ज्यादा नहीं था और यह अपने आप ही ठीक हो गया.

    भारत में कब तक आने की उम्मीद

    भारत में यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह वैक्सीन मार्च 2021 तक देश के फ्रंट लाइन वर्कर्स को लगाई जा सकती है और उसके बाद 60 साल से ऊपर के लोगों पर लगाए जाने की संभावना है. फिलहाल सभी के लिए कोरोना से सुरक्षा के लिए मास्क और हाथ धोते रहना ही एकमात्र विकल्प है. साथ ही शरीर की इम्युनिटी सिस्टम को भी मजबूत बनाना होगा ताकि कोरोना वायरस की चपेट में आने पर कोई खतरा न रहे. सबसे ज्यादा एहतियात बुजुर्गों और कई गंभीर रोगियों को बरतना होगा. डायबिटीज और हृदय के मरीजों को इस समय अपना विशेष ख्याल रखने की जरूरत है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, कोरोना वायरस क्या है पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

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