Toxic Productivity: काम के प्रेशर में भूल जाते हैं खाना या रेस्ट लेना? कहीं ये टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी तो नहीं

Toxic Productivity: काम के प्रेशर में भूल जाते हैं खाना या रेस्ट लेना? कहीं ये टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी तो नहीं
जानें टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी क्या है और इससे कैसे बचें

What is Toxic Productivity: टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी खुद से अकल्पनीय अपेक्षाएं रखना है. काम के दबाव और हालात के तनाव के बीच रोज एक जैसा आउटपुट देने का प्रेशर भी अनुचित है.

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What is Toxic Productivity: कोरोना वायरस (Covid 19) की वजह से जब लॉकडाउन (Lockdown) की शुरुआत हुई थी और कई लोगों को वर्क फ्रॉम होम मिला है ऐसे में कईयों ने प्लान बनाए थे कि इस समय का इस्तेमाल वो बेहतर तरीके से करेंगे. बहुतों ने सोचा था कि वर्क फ्रॉम होम के दौरान वो काम की क्वालिटी, अपनी एक्सरसाइज और डेली रूटीन लाइफ को अच्छे से फॉलो करेंगे. लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जो सुबह आंख खुलते ही लैपटॉप में आंखें गड़ाए बैठ जाते हैं काम करने. इस दौरान न उन्हें नाश्ता या खाने पीने का होश होता है और ना ही एक्सरसाइज का. लोग ज्यादा से ज्यादा काम करने के चक्कर में अपनी शिफ्ट पूरी होने के बाद भी काम कर रहे हैं. दरअसल, काम के प्रति जुनूनियत वर्कहोलिज्म का लक्षण है जिसे टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी (Toxic Productivity) कहा जाता है.

द क्विंट में छपी रिपोर्ट के अनुसार, टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी दरअसल काम करने के ( वर्कहोलिज्म) तरीके की एक ऐसी उपज या भूख है जो कभी भी शांत नहीं होती है. आप जितना ज्यादा काम करेंगे जितने ज्यादा उत्पादक होंगे आपकी उतनी ही प्रशंसा होगी और हो सकता है कि इसके साथ आपको पुरस्कार भी मिले, जोकि आपका मनोबल बढ़ाने वाला हो सकता है. लेकिन इन सब के बीच हम यह भूल जाते हैं कि आखिर इन सब की भी सीमा होती है और इसकी सीमा रेखा हमें कहां खींचनी है?

टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी के लक्षण:



टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी के लक्षण शुरुआत में समझ नहीं आते हैं. जब आप काम के जूनून में अपनी सेहत और रिश्तों का ध्यान नहीं रखते- ज्यादा से ज्यादा काम करने के चक्कर में अपने दोस्तों या घरवालों से बातचीत नहीं करते, ठीक से खाना नहीं खा पाते, सो नहीं पाते और अपनी बाकि जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो धीरे धीरे आप टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी के शिकार होते जा रहे हैं.



टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी खुद से अकल्पनीय अपेक्षाएं रखना है. काम के दबाव और हालात के तनाव के बीच रोज एक जैसा आउटपुट देने का प्रेशर भी अनुचित है.
अगर काम के दौरान बीच में ब्रेक लेने या खाना बनाने या खाना खाने के समय आपको ऐसा लगता है कि अपनी प्रोफेशनल वैल्यू कम हो रही है तो आप टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी का शिकार हो सकते हैं.

बहुत सारे लोग अपनी वैल्यू को अपनी प्रोडक्टिविटी से जोड़कर देखते हैं या कि उन्होंने दिन में कितने घंटे काम किया है. ये सेहत के लिहाज से काफी हानिकारक है. पूरी मेहनत के साथ काम करना काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन उतना ही जरूरी यह भी है कि आप काम में खुद को एकदम खपा ना दें.

टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी से कैसे निजात पाएं:
टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी से निजात पाने के लिए ऐसे लक्ष्य निर्धारित करें जिन्हें हासिल करना आपके बस में हो और इस दौरान आपको अपनी सेहत और मानिसक सेहत से कोई समझौता न करना पड़े.

अगर आप ऐसा मानते हैं कि वीक ऑफ के दौरान ही रेस्ट लिया जा सकता है तो इस सोच को त्याग दें. काम के दौरान बीच बीच में रेस्ट लेते रहें.

टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी से बचने के लिए काम की सीमा रेखा तय करें. जरूरत से ज्यादा काम करने के फेर में ना पड़ें.

अगर मन में उलझन जैसी महसूस हो तो मेडिटेशन करें या कुछ देर बालकनी में लगे प्लांट्स को निहारें और घर में ही घूमें.
First published: June 7, 2020, 8:53 AM IST
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