शरीर में हो भरपूर विटामिन-डी तो कोरोना वायरस को हरा सकते हैं, फेफड़ों को भी रख सकते हैं सुरक्षित

कोविड महामारी के इस दौर में हमारा अपने शरीर में विटामिन डी की र्प्‍याप्‍त उपलब्‍धता की ओर ध्‍यान देना बेहद जरूरी हो गया है. (File Pic)

कोविड महामारी के इस दौर में हमारा अपने शरीर में विटामिन डी की र्प्‍याप्‍त उपलब्‍धता की ओर ध्‍यान देना बेहद जरूरी हो गया है. (File Pic)

कोविड महामारी (Covid 19) के इस दौर में हमारा अपने शरीर में विटामिन डी की र्प्‍याप्‍त उपलब्‍धता की ओर ध्‍यान देना बेहद जरूरी हो गया है, लेकिन विटामिन डी (Vitamin D) की कमी या उसकी र्प्‍याप्‍त उपलब्‍धता की ओर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है. आम धारणा है कि विटामिन डी केवल हड्ड‍ियों से जुड़ा मसला है, लेकिन इसकी हमारे शरीर को सुरक्षित रखने में बहुत सारी भूमिकाएं हैं...

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  • Last Updated: April 26, 2021, 5:05 PM IST
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नई दिल्‍ली : भारत में कोविड 19 (Covid 19) बेकाबू हो चला है. यह संक्रमण फेफड़ों (Lungs) को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. इससे बचाव के लिए लोग भांप लेने से लेकर तरह-तरह के उपाय अपना रहे हैं, लेकिन शरीर में विटामिन डी (Vitamin D) की कमी या उसकी र्प्‍याप्‍त उपलब्‍धता की ओर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है. आम धारणा है कि विटामिन डी केवल हड्ड‍ियों से जुड़ा मसला है, लेकिन इसकी हमारे शरीर को सुरक्षित रखने में बहुत सारी भूमिकाएं हैं, खास तौर पर कोविड महामारी के इस दौर में हमारा अपने शरीर में विटामिन डी (Vitamin D) की र्प्‍याप्‍त उपलब्‍धता की ओर ध्‍यान देना बेहद जरूरी हो गया है. सीनियर कंसलटेंट और ऑथोपेडिक एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. विवेक चिंपा ने News18 Hindi (Digital) से बातचीत में कोविड से बचाव के लिए विटामिन डी के महत्‍व से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए... आइये जानते हैं...

कोरोना वायरस को हराने में विटामिन डी की कितनी बड़ी भूमिका है?

कोविड एक तरह का फ्लू है. जो पेशेंट इससे संक्रमित होते हैं और सीरियस होते हैं उन्‍हें फेफड़ों से संबंधित दिक्‍कतें होती हैं. दरअसल, विटामीन डी का एक मैकेनिज्‍़म होता है. लंग्‍स में रिसेप्टर्स होते हैं. विटामिन डी उन रिसेप्टर्स को ओक्‍यूपाई कर लेता है. तो जो वायरस शरीर में जाता है, उसे फेफड़ों से चिपकने के लिए रिसेप्टर्स नहीं मिल पाते हैं. इससे वह प्रभावी न रहकर वापस हो जाता है और सामान्‍य फ्लू की तरह होकर वह खत्‍म हो जाता है. इससे मरीज को मेजर कॉम्‍पलीकेशन नहीं होती. इसलिए विटामिन डी की कोरोना महामारी के इस दौर में बड़ी भूमिका है. यह इम्‍यूनिटी को भी बढ़ाता है.

क्‍या है विटामिन डी की कमी की मुख्‍य वजह, हमारे शरीर के लिए कितना जरूरी है?
कई स्‍टडी से यह साबित हो चुका है कि विटामिन डी की कमी ईकोसिस्‍टम में ही है. उदाहरण के तौर पर जैसे पश्चिम बंगाल. वहां लोग मछली भी खाते हैं और नॉन वेज से जुड़ी अन्‍य चीजें भी. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जो इस तरह की चीजें खाते हैं, इससे उनका विटामिन डी बढ़ा हुआ होता है. हालिया स्‍टडी साफ करती हैं कि भारत के किसी भी क्षेत्र में लोगों में विटामिन डी कम ही पाया गया है. विटामिन डी धूप से मिलता है, लेकिन अब जिस तरह का माहौल बनता जा रहा है, खास तौर पर शहरी क्षेत्रों में जहां प्रदूषण काफी ज्‍यादा है, जहां धूप नहीं आती, लोग घरों से ज्‍यादा बाहर भी नहीं निकलते, लोग सुबह ही ऑफ‍िस निकल जाते हैं और रात को घर आते हैं, उन्‍हें ठीक से विटामिन डी नहीं मिल पाता. दूसरा न्‍यूट्रीशनल डिफ‍िशयंसी भी इसमें शामिल है. शहरी क्षेत्रों में लोग र्प्‍याप्‍त रूप से दूध, अंडा, मांसाहार से जुड़ी कुछ चीजें, हरी सब्जियां नहीं ले पा रहे. साथ ही वह व्‍यायाम भी नहीं करते. इससे भी उनमें विटामिन डी की कमी देखी जा रही है.

चूंकि भारत अब कोविड 19 में Endemic region बन गया है, इसकी वजह से भी लोगों को बाहर से विटामिन डी लेना ही पड़ेगा. जैसे ही दवाईयों के रूप में. साथ ही बीच-बीच में विटामिन डी की जांच भी करवानी चाहिए. ज्‍यादातर लोग सोचते हैं कि विटामिन डी केवल हड्ड‍ियों से जुड़ा है, लेकिन इसकी बहुत सारी भूमिकाएं हैं. यह एक तरह से हारमोन है, जोक‍ि हमारे शरीर में बहुत सारे मेटाबॉलिज्‍म को ठीक करता है, चलाता है. हड्ड‍ियां इसमें केवल एक टिशू है, जिसे वह मजबूत करता है. अप्रत्‍यक्ष रूप से इसकी वजह से और बहुत सारी समस्‍याएं जैसे डिप्रेशन, ओबेसिटी, डाय‍बिटीज की भी समस्‍या पैदा हो जाती हैं.

शरीर में विटामिन डी की पर्याप्त उलब्धता से सामान्य जुकाम और फ़्लू से बचा जा सकता है?



बिल्‍कुल, यह हमारे इम्‍यून सिस्‍टम को बूस्‍ट करता है. जितने भी इंफेक्‍शन हैं, यह उनको कंट्रोल में रखता है. अगर हमारे शरीर में र्प्‍याप्‍त रूप से विटामिन डी है तो बहुत सी ऐसी बीमारियां हैं, जिससे हम बच सकते हैं.

क्‍या विटामीन डी हमारी मांसपेशियों को भी मजबूत करता है?

जिन भी लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, उन्‍हें मस्कुलर पेन यानि मांसपेशियों में दर्द भी शुरू हो जाता है या थोड़ी देर काम करने पर ही वे थक जाते हैं. दरअसल, हड्ड‍ियां और मांसपेशियां मिलकर मस्‍कुलोस्‍केलेटल सिस्‍टम बनाते कहते हैं. विटामिन डी की कमी होने पर लोड मसल्‍स पर आ जाता है, जिसे वह संभाल नहीं पातीं और मांसपेशियां भी दर्द करने लगती हैं. इसलिए जितना र्प्‍याप्‍त विटामिन डी हमारे शरीर में होगा, वह इस समस्‍याओं को शरीर में नहीं आने देगा. वह मांसपेशियों को भी मजबूत बनाए रखेगा.

क्‍या विटामीन डी फेफड़ों को भी सुरक्षित करता है और सीने में संक्रमण को रोकता है?

कोरोना में मुख्‍य समस्‍या फेफड़ों को होती है. निमोनिया हो जाता है या फेफड़ें खराब हो जाते हैं. सांस लेने में दिक्‍कत और जान को खतरा भी हो जाता है. इसलिए इन सब चीजों से बचने के लिए अगर विटामीन डी शरीर में अच्‍छा होता है तो वह लंग्‍स में ऐसे रिसेप्‍टर्स को आक्‍यूपाई कर लेता है, जिसमें वायरस के आने पर वह फेफड़ों में समाने की बजाय वापस हो जाता है. इस तरह लंग्‍स को सुरक्षित करने में इसकी बड़ी भूमिका है.

Covid 19 से बचने के लिए विटामिन डी कितना, कैसे और कब लें?

विटामिन डी एक फैट सॉल्युबल विटामिन है. इस समय इसकी रिकमेंडिड डेली डोज 2000 इंटरनेशनल यूनिट है. यह हमें हमारी डाइट और एक्‍सरसाइज से मिल सकती है. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर यह हमें अलग से भी लेनी पड़ेगी. यह इस पर भी डिपेंड करता है कि व्‍यक्ति में विटामिन डी की कितनी कमी है. इसकी कई कैटेगरी हैं, जैसे Insufficient, Sufficient, Deficient. इसके आधार पर विटामिन डी दिया जाता है. विटामिन डी सॉल्‍युशन, कैप्‍सूल फॉर्म और चूसने वाली टैबलेट के रूप में भी आता है. फैटी चीजें जैसे दूध के साथ लेने पर यह ज्‍यादातर असरदार होता है.

कई लोग इसे रोज नहीं ले पाते, इसलिए सप्‍ताह में एक बार विटामिन डी की 60000 इंटरनेशनल यूनिट की कोई टैबलेट या कैप्‍सूल ली जा सकती है. कोरोना काल में यह प्रोटोकॉल में भी है कि अगर किसी को कोविड हो गया है या नहीं भी हुआ तो सप्‍ताह में एक बार विटामिन डी की 60000 इंटरनेशनल यूनिट लेते ही रहें.
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