खराब नींद के कारण किशोरों में बढ़ सकता है डिप्रेशन का जोखिम, जानिए समाधान

खराब नींद के कारण किशोरों में बढ़ सकता है डिप्रेशन का जोखिम, जानिए समाधान
पूरी नींद न ले पाने की वजह से बढ़ता है डिप्रेशन का खतरा. (Image: Getty)

नींद की कमी मस्तिष्क (Brain) को भी प्रभावित करती है. छोटी उम्र में नींद की कमी की समस्या अवसाद यानी डिप्रेशन (Depression) का कारण बन सकती है.

  • Last Updated: July 2, 2020, 2:11 PM IST
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स्वस्थ (Healthy) रहने के लिए अच्छी नींद (Sleep) बहुत जरूरी है. अगर लंबे समय तक कोई पूरी नींद न लें तो बेचैनी, थकान, दिन में नींद आने के साथ-साथ अचानक बहुत ज्यादा वजन घटना या बढ़ना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. यही नहीं, नींद की कमी मस्तिष्क (Brain) को भी प्रभावित करती है. छोटी उम्र में नींद की कमी की समस्या अवसाद यानी डिप्रेशन (Depression) का कारण बन सकती है. शोधकर्ताओं (Researchers) ने पाया है कि वे किशोर जो खराब नींद का अनुभव करते हैं, उनके आगे के जीवन में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health)  पर बुरा असर पड़ सकता है. चाइल्ड साइकोलॉजी जर्नल (Journal of Child Psychology) में प्रकाशित शोध में किशोरों की नींद की गुणवत्ता और मात्रा का विश्लेषण किया गया और पाया कि खराब नींद और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों में एक महत्वपूर्ण संबंध है.

इस अध्ययन में 4790 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इसमें पाया गया कि वे प्रतिभागी जिन्होंने अवसाद का अनुभव किया था, उनकी नींद की गुणवत्ता व मात्रा खराब थी. वहीं चिंता के शिकार लोगों में केवल नींद की खराब गुणवत्ता ही पाई गई. यह निष्कर्ष उन किशोरों की तुलना करते हुए निकला जिन्होंने किसी तरह की चिंता या अवसाद की शिकायत नहीं की थी.



myUpchar से जुड़े ऐम्स के डॉ. केएम नाधिर का कहना है कि नींद की कमी मस्तिष्क की भावनाओं, सोच और सोच को संतुलित करने की क्षमता को बाधित करती है और इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है.
यूके में रीडिंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ने कहा कि यह नया शोध यह दिखाने का एक बड़ा सबूत है कि नींद और किशोरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध है. अध्ययन में बताया गया है कि जिन युवाओं को अवसाद और चिंता का अनुभव होता है, वे अपनी किशोरावस्था के दौरान खराब नींद का अनुभव करते हैं.

ध्यान देने योग्य बात यह है कि अवसाद का अनुभव करने वालों के बीच नींद की औसत मात्रा में अंतर है, जो अन्य प्रतिभागियों की तुलना में हर रात 30 मिनट बाद सोने जाते हैं.

शोध में स्पष्ट किया गया है कि किशोरों के स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. अध्ययन के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया कि किशोरों का वह समूह, जिसे नींद की परेशानी नहीं थी, वह रोजाना कम से कम आठ घंटे की नींद लेते थे और सप्ताह के अंत में साढ़े नौ घंटे से अधिक सोते थे. वहीं वह समूह जो अवसादग्रस्त निकले, वे रोजाना साढ़े सात घंटे से कम और सप्ताह के अंत पर सिर्फ नौ घंटे की नींद ले रहे थे. नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक 14-17 साल की आयु के किशोरों को आमतौर पर हर रात लगभग 8-10 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है.

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myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. नबी वली का कहना है कि सोने की अच्छी आदतें नींद की परेशानी को दूर करने और गहरी नींद सोने में मदद कर सकती हैं. बेहतर होगा कि किशोर अपने हर दिन के सोने और जागने के समय को एक जैसा रखें. दिनभर सक्रिय रहें, ताकि रात में अच्छी नींद आए. सोने से पहले ज्यादा मात्रा में भोजन न करें और पेय पदार्थों से बचें. सोने से पहले मोबाइल, लेपटॉप पर समय न बिताएं, यह नींद खराब करने की बड़ी वजह बनता है. बजाए इसके कुछ अच्छी आदतें अपनाएं जैसे सोने से पहले नहाना, किताबें पढ़ना या धीमी आवाज में संगीत सुनना.

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