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क्या मेटाबोलिक सर्जरी से डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

माना जाता है कि मेटाबॉलिक सर्जरी मोटापा कम करने और टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने का सबसे प्रभावी तरीका है.

माना जाता है कि मेटाबॉलिक सर्जरी मोटापा कम करने और टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने का सबसे प्रभावी तरीका है.

Metabolic Surgery: पिछले कुछ सालों से लाइफस्टाइल से संबंधित हार्ट डिजीज और डायबिटीज को सही करने के लिए मेटाबोलिक सर्जरी ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

मेटाबोलिक या बेरिएट्रिक सर्जरी में गैस्ट्रिक बाईपास ,स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी और स्लीव-प्लस प्रक्रिया अपनाई जाती है
मेटाबोलिक सर्जरी के माध्यम से पेट में सर्जरी कर इसे और अधिक प्रभावी बनाया जाता है.

Metabolic Surgery and diabetes:खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की वजह से मोटापा और डायबिटीज आज दुनिया की बहुत बड़ी समस्या है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक विश्व में करीब 2 अरब से ज्यादा लोग मोटापे से पीड़ित हैं और करीब 42.2 करोड़ लोग डायबिटीज के शिकार हैं. इसके साथ ही करीब 15 लाख लोगों की मौत हर साल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से डायबिटीज के कारण होती है. मोटापे और डायबिटीज के कारण हार्ट डिजीज, किडनी प्रोबल्म, ब्रेन प्रोब्लम जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए पिछले कुछ सालों से मेटाबोलिक सर्जरी का सहारा लिया जाता है. माना जाता है कि मेटाबॉलिक सर्जरी मोटापा कम करने और टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने का सबसे प्रभावी तरीका है. मेटाबोलिक सर्जरी के माध्यम से पेट में सर्जरी कर इसे और अधिक प्रभावी बनाया जाता है.

मेटाबोलिक सर्जरी की जरूरत क्यों
इंडियन एक्सप्रेस की खबर में अपोलो स्पेक्ट्रा की बेरिएट्रिक और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ अपर्णा भास्कर कहती हैं कि मेटाबोलिक सर्जरी (जिसमें वेट लॉस सर्जरी भी शामिल है) मोटापा कम करने और डायबिटीज को कंट्रोल करने का सबसे बेहतरीन तरीका है. उन्होंने बताया कि दरअसल, डायबिटीज के इलाज का अंतिम लक्ष्य यही होता है कि ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल हो जाए ताकि डायबिटीज से संबंधित बीमारियां न हो. ये सब कंट्रोल करके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके. डायबिटीज की गंभीरता के बाद आंख से संबंधित रेटिनोपेथी, किडनी से संबंधित नेफ्रोपेथी और हार्ट संबंधी कई बीमारियां होती हैं. डॉ अपर्णा ने बताया कि पिछले कुछ सालों से मोटापे के साथ टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए वजन कम करने को पुख्ता इलाज के रूप में देखा जा रहा है. अगर वेट लॉस कर लिया जाए तो ब्लड शुगर पर अपने आप कंट्रोल होने लगता है. यही कारण है कि आजकल मेटाबोलिक सर्जरी का चलन बढ़ा है.

मेटाबोलिक सर्जरी क्या है
डॉक्टर अपर्णा के मुताबिक मेटाबोलिक या बेरिएट्रिक सर्जरी में गैस्ट्रिक बाईपास ,स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी और स्लीव-प्लस प्रक्रिया अपनाई जाती है. इसके लिए पेट में ऑपरेशन किया जाता है. डॉ. अपर्णा बताती है कि मेटाबोलिक सर्जरी वजन कंट्रोल करने के साथ ही डायबिटीज की बीमारी को कंट्रोल करती है. दरअसल, शरीर के खराब अंगों को सही करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है लेकिन मेटाबोलिक सर्जरी में सही अंगों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए परिवर्तन किया जाता है. इससे मेटाबोलिज्म बूस्ट होता है. इसका मकसद यही है कि अगर शरीर में मेटाबोलिज्म दुरुस्त हो तो इससे शरीर कई बीमारियों से खुद ही लड़ने में सक्षम हो जाएगा.

क्या होता है गैस्ट्रिक बायपास
डॉक्टर के मुताबिक मेटाबोलिक या बेरिएट्रिक सर्जरी में गैस्ट्रिक बायपास, स्लीव गैस्ट्रोक्टोमी और स्लीव पल्स प्रक्रिया अपनाई जाती है. स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी में पेट में ट्यूबनूमा पतली नली बनाने के लिए दो भागों में सीधा विभाजित किया जाता है. इसके लिए ऑपरेशन किया जाता है. इससे पाचन शक्ति मजबूत होती है. गैस्ट्रिक बायपास में पेट में एक अलग से थैली बनाई जाती है और छोटी आंत के लिए एक अलग रास्ता बनाया जाता है जिसे बनाई गई थैली में जोड़ दिया जाता है. इससे पेट का बाकी हिस्सा और छोटी आंत का एक भाग बायपास हो जाता है. वहीं स्लीव प्लस प्रक्रिया में पेट के एक हिस्से को अलगकर स्लीव की तरह बना लिया जाता है. इससे छोटी आंत बायपास हो जाती है और इसे स्वीव स्टोमेक से जोड़ दिया जाता है.

Tags: Diabetes, Health, Health tips, Lifestyle

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