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Covid 19: कोरोना की वजह से नहीं हो पा रहा है ऑर्गन ट्रांसप्लांट, ये है वजह

कोरोना की वजह से नहीं हो पा रहा ऑर्गन ट्रांसप्लांट में कमी आई है

कोरोना की वजह से नहीं हो पा रहा ऑर्गन ट्रांसप्लांट में कमी आई है

लैंसेट में प्रकाशित इस विश्लेषण के मुताबिक कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों में तो तीव ...अधिक पढ़ें

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    नए कोरोना वायरस (Coronavirus) सार्स-सीओवी-2 से होने वाली बीमारी कोविड-19 (Covid 19) दुनियाभर के करीब-करीब सभी देशों में फैल चुकी है और अब तक 43 लाख से ज्यादा लोग इस बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं. इस महामारी ने उन लोगों के जीवन पर खासा असर डाला है जहां पर कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन की स्थिति है. कोविड-19 इंफेक्शन और लॉकडाउन की वजह से आर्थिक और सामाजिक पहलू पर तो नेगेटिव असर पड़ा ही है, साथ ही वैसे मरीज जो दूसरी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं उन पर भी इस महामारी का खासा प्रभाव पड़ा है.

    कुछ ऐसा ही हाल अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) का इंतजार कर रहे मरीजों का भी है. अमेरिका की बात करें तो यहां पर ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन यानी अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में कोरोना वायरस महामारी की वजह से भारी कमी आयी है. अप्रैल की शुरुआत में यूएस में मृत व्यक्ति से अंग लेकर उसे प्रत्यारोपित करने के मामलों में मार्च महीने की तुलना में 50 प्रतिशत की कमी देखने को मिली. यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया स्थित पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन और पैरिस ट्रांसप्लांट ग्रुप ने मिलकर यह विश्लेषण किया, जिसे द लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित किया गया.

    लैंसेट में प्रकाशित इस विश्लेषण के मुताबिक किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों में तो तीव्र कटौती देखने को मिली ही है. हार्ट, लंग और लिवर ट्रांसप्लांट के मामलों में भी काफी कमी आयी है. अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि मार्च की शुरुआत में जहां रिकवर किए गए अंगों की संख्या रोजाना 110 थी, वहीं अप्रैल में घटकर रोजाना सिर्फ 60 रह गई. इतना ही नहीं मार्च की शुरुआत में जहां रोजाना करीब 65 किडनी ट्रांसप्लांट की जा रही थीं, वह अप्रैल में यह संख्या घटकर 35 रह गई. अमेरिका में जहां ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में 50 प्रतिशत की कमी आयी है वहीं फ्रांस में ट्रांसप्लांट प्रोसीजर में 91 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है.

    भारत में भी नेशनल ऑर्गन एंड टीशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) ने कोरोना वायरस संकट के मद्देनजर शवों से अंगों का प्रत्यारोपण करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. नोटो ने ऑर्गन्स और टीशूज को प्राप्त करना और उनके वितरण के नेटवर्क से जुड़ी ऐक्टिविटीज के बारे में भी यही कहा है कि कोई ट्रांसप्लांट नहीं किया जाएगा, जब तक कि संभावित डोनर और उनके परिवार का महामारी विज्ञान से जुड़ा सख्त सर्वे न हो जाए.

    ऐसे में दुनियाभर में जहां पहले से ही डोनेट किए गए अंगों की कमी है, वहां यह समस्या और ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है. एक अनुमान के मुताबिक एंड-स्टेज ऑर्गन फेलियर की वजह से दुनियाभर के करीब 60 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं. साल 2018 में ट्रांसप्लांट सिस्टम ने दुनियाभर में 1 लाख 50 हजार मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए जरूरी अंग मुहैया कराए थे, लेकिन यह अंगों की मांग की तुलना में काफी कम है. यही वजह है कि हर साल हजारों मरीज अंग न मिलने की वजह से दम तोड़ देते हैं.

    अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी अहम चिंताएं
    स्वास्थ्य सेवा से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो महामारी के बीच ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण चिंता ये है कि जिन लोगों को नए अंग प्राप्त होते हैं उन्हें इंफेक्शन होने का खतरा सबसे अधिक होता है और वायरल लोड भी बढ़ जाता है. इसके अलावा कोविड-19 की वजह से अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने की मांग बढ़ गई है, जिस कारण अस्पतालों में संसाधनों की कमी देखने को मिल रही है. अंग प्रत्यारोपण वाले मरीजों को सर्जरी के बाद जितनी केयर की जरूरत होती है वह उन्हें नहीं मिल पा रही.

    लॉकडाउन के दौरान, वैसे मरीज जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या जिन्हें पहले से कोई बीमारी है, उन्हें घरों से बाहर नहीं जाने की सलाह दी गई है ताकि उन्हें कोविड-19 का इंफेक्शन होने से बचाया जा सके. ये सभी चिंताएं पिछले कुछ महीनों में अंग प्रत्यारोपण में आयी कमी के लिए जिम्मेदार हैं, जिस वजह से अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे मरीजों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है.

    प्रत्यारोपण से डील करने वाले डॉक्टरों को चाहिए कि वे इस नई परिस्थिति के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश करें और मरीजों को यकीन दिलाएं कि एक बार यह कोविड-19 की स्थिति बेहतर हो जाए उसके बाद सारी चीजें पहले की तरह सामान्य हो जाएंगी.

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