सावधान! ज्यादा खाते हैं नॉन-वेज, तो हो सकती है मौत, रिसर्च में खुलासा

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हुए इस शोध के मुताबिक, रेड मीट की जगह अंडे, साबुत अनाज, फिश और हरी सब्जियों का सेवन करने वालों को ज्यदा पोषण प्राप्त होता है...

News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 4:08 PM IST
सावधान! ज्यादा खाते हैं नॉन-वेज, तो हो सकती है मौत, रिसर्च में खुलासा
सावधान! ज्यादा खाते हैं मांस, तो जा सकती है जान, रिसर्च में खुलासा
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Updated: August 13, 2019, 4:08 PM IST
कई लोग बड़े चाव से लगभग रोज ही मांस, मीट, पोर्क का सेवन करते हैं. उनका मानना होता है कि मांसाहार से ज्यादा पोषण प्राप्त होता है. लेकिन इस सिलसिले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. शोधकर्ताओं के मुताबिक़, अधिक मात्रा में मीट का सेवन करने से जान तक जा सकती है. इसलिए उन्होंने अलर्ट जारी करते हुए कहा कि रेड मीट का अधिक सेवन करने वाले लोगों की मौत जल्दी हो सकती है. मांसाहार को लेकर यह रिसर्च बीएमजे जनरल में छापा गया है.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हुए इस शोध के मुताबिक, रेड मीट की जगह अंडे, साबुत अनाज, फिश और हरी सब्जियों का सेवन करने वालों को ज्यादा पोषण प्राप्त होता है और वो अपेक्षाकृत अधिक लंबा जीवन जीते हैं. शोधकर्ताओं ने इसमें रेड मीट के सेवन को जल्दी मौत की संभावना से जोड़ कर देखा है.



इस रिसर्च के लिए रिसर्चर्स ने साल 1986 से लेकर 2010 के बीच तक के आंकड़े इक्कठे किए. इसमें आठ सालों तक रेड मीट के सेवन और उसके अगले 8 सालों तक डेथ रेट (मृत्यु दर) पर गहन अध्ययन किया. परिणामस्वरुप यह पाया कि जो लोग रेड मीट ज्यादा खाते हैं उनकी मौत का खतरा सबसे अधिक रहता है. शोधकर्ताओं ने यह डाटा 53,553 पंजीकृत नर्सों से एकत्र किया था.

शोधकर्ताओं ने रिसर्च के लिए 40 से 75 साल की उम्र के करीब 27,916 अमेरिकी मर्दों को शामिल किया था. रिसर्च के लिए जिन लोगों का डेटा इक्कठा किया गया था उनकी जांच में पहले से कैंसर और ह्रदय से संबंधी कोई बीमारी नहीं पाई गई थी. इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने लोगों की खानपान की निरंतरता परखने के बाद यह निष्कर्ष दिया कि मछली, अंडा और साबुत अनाज खाने वालों की तुलना में रेड मीट खाने वालों की मौत की संभावना ज्यादा होती है. रिसर्च में यह बात भी सामने आई कि रेड मीट के सेवन की वजह से 14,019 लोगों की मौत हई थी.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
First published: August 13, 2019, 8:38 AM IST
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