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Health Explainer: खाली पेट नहीं पीनी चाहिए ग्रीन-टी, जानिए क्या कहता है साइंस

खाली पेट क्यों नहीं पीनी चाहिए ग्रीन-टी, जानिए इसके पीछे की वजह

खाली पेट क्यों नहीं पीनी चाहिए ग्रीन-टी, जानिए इसके पीछे की वजह

कहते हैं ग्रीन-टी में कैलोरी काफी कम होती है. इसलिए वजन घटाने में मदद करती है. ये बात कितनी सच है. आज बात करेंगे इसके प ...अधिक पढ़ें

    किसी व्यक्ति का इंतज़ार करते हुए आप क्या करते हैं? चाय पीते हैं... जर्मन में एक कहावत भी है, इंतज़ार करिए और चाय पीजिए. किसी को दूध वाली चाय पीना पसंद होता है तो किसी को ग्रीन-टी या ब्लैक-टी. हर तरह की चाय के अपने फायदे होते हैं. लेकिन इनमें से आज आप जानेंगे ग्रीन-टी के फायदे, नुकसान, इसे पीने का सही समय और वजन घटाने में किस तरह मदद करती है ग्रीन-टी.

    चाय लाइफस्टाइल का एक हिस्सा है. किसी के लिए ये स्ट्रेस दूर करने का तरीका है तो किसी का सिरदर्द भगाने का जरिया. इसका ज्यादा सेवन न किया जाए तो स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाती है.

    कहा से कहां तक पहुंची ग्रीन-टी
    ग्रीन-टी सबसे ज्यादा इस्तेमाल में आने वाले ड्रिंक्स में से एक है. ये कैमिलिया साइनेसिस नाम के पौधे से तैयार की जाती है. 17वीं सदी में ये भारत से जापान भेजी गई थी. बाद में एशिया के कई भागों में इसे इस्तेमाल किया जाने लगा. असम और दार्जिलिंग की ग्रीन-टी आज सबसे बेहतरीन मानी जाती है.



    कैसे बनती है ग्रीन-टी
    ताजा ग्रीन-टी के पत्तों को तुरंत स्टीम (भाप में उबालना) किया जाता है जिससे ये जल्दी खराब न हो. इसे सुखाकर एक स्थिर उत्पाद में तब्दील किया जाता है. ये स्टीमिंग प्रक्रिया एंजाइम से बचाव करता है. मतलब पत्तियां अपने असली हरे रंग में बनी रहें. इसमें मौजूद पॉलीफिनॉल नष्ट न हों और व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी फायदे मिल सकें, इसलिए ये क्रिया दोहराई जाती है. ग्रीन-टी से ऊलौंग-टी और फिर ब्लैक-टी बनती है. कई प्रकिया के बाद बस इनकी प्रकृति बदल जाती है.

    वजन घटाने का किस तरह करती है काम
    टेंशन और स्ट्रेस, मोटापे के ये दो मुख्य कारण हैं. ग्रीन-टी में थिएनाइन पाया जाता है. ये एक प्रकार का अमीनो एसिड होता है जो स्ट्रेस कम करने और दिमाग शांत रखने में मददगार है. स्ट्रेस और टेंशन नहीं रहेगा तो वजन भी नहीं बढ़ेगा. इस तरह ग्रीन-टी वजन कम करने में मददगार है.

    ग्रीन-टी लेने का सही समय
    - ग्रीन-टी में कैलोरी नहीं होती. इसे गर्म पानी में बिना चीनी के लिया जाता है. पूरे दिन में इसे दो से तीन कप आराम से ले सकते हैं.
    - बेवक्त भूख लगने पर ग्रीन-टी का सेवन किया जा सकता है. जितनी ग्रीन-टी पिएंगे, उतने लंबे समय तक भरा पेट महसूस करेंगे.
    - सुबह और शाम का वक्त ग्रीन-टी पीने के लिए बेस्ट है. जिन लोगों को नींद न आने की समस्या रहती है वे शाम में इसके सेवन से बचें. इसमें मौजूद कैफीन तत्व नींद में गड़बड़ी पैदा कर सकती है. सुबह में ग्रीन-टी पीना इसलिए अच्छा है, क्योंकि ये मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देती है. उसे मजबूत बनाती है. खाना खाने के बाद इसे लेने की सोच रहे हैं तो कम से कम आधे से एक घंटे का अंतर रखें. ये वो समय होता है जब मेटाबॉलिज्म रेट सबसे ज्यादा तेज होता है. ग्रीन-टी मेटाबॉलिज्म रेट को और तेज करती है और खाना पचाने में भी मदद करती है.
    - ग्रीन-टी गर्म पानी और ठंडे पानी दोनों ही तरह पी सकते हैं.
    - खाना खाने से एक या दो घंटे पहले भी इसे ले सकते हैं. बशर्ते इससे पहले आपने हल्का-फुल्का कुछ खाया हो. क्योंकि पूरी तरह खाली पेट ग्रीन-टी का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है.



    क्यों नहीं पीनी चाहिए खाली पेट ग्रीन-टी
    खाली पेट ग्रीन-टी पीने से कई लोगों को कब्ज की शिकायत हो सकती है. कैफीन का सेवन कई लोगों को एसिडिटी की समस्या देता है. नाश्ते के बाद पीना इसे ठीक है. सुबह खाली पेट कोसा या नॉर्मल पानी पीना ज्यादा फायदेमंद विकल्प है.

    ग्रीन-टी के फायदे
    - एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर ग्रीन-टी सांस की बदबू से लड़ने में कारगर है.
    - ये ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मददगार है.
    - स्किन एलर्जी से भी ये बचाती है.
    - ग्रीन-टी में कैटेकिन नाम का तत्व पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल और ट्राईग्लिसराइड्स को नियंत्रित रख, दिल से संबंधित कई बीमारियों के खतरे को कम करती है. लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है.
    - एंटी-एजिंग के गुणों से भरपूर ग्रीन-टी एजिंग प्रक्रिया को धीमा करती है. चेहरे पर झुर्रियों का नमो-निशान तक आने नहीं देती.
    - शरीर से विषैले पदार्थों का सफाया करने में भी मदद करती है.
    - इसमें पॉलीफिनॉल और फ्लेवोनॉइड्स नाम के तत्व पाए जाते हैं इम्यूनिटी को दुरुस्त रखती है. यानी इम्यूनिटी बूस्ट करती है. शरीर में संक्रमण यानी वायरस से भी लड़ने का काम करती है.
    - ग्रीन-टी में पाए जाने वाला पॉलीफिनॉल, एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है.
    - ग्रीन-टी में विटामिन ई, विटामिन-सी और बीटा कैरोटीन पाए जाते हैं जो मेटाबॉलिज्म को मजबूत बनाते हैं.

    कैंसर के खतरे का करती है कम
    नैशनल कैंसर इंस्टीट्यूट का कहना है कि ग्रीन-टी में पाए जाने वाले पॉलीफिनॉल, ट्यूमर के खतरे को कम करता है. ऐसा लैब में जानवरों पर रिसर्च करने के बाद कहा गया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि पॉलीफिनॉल, कैंसर सेल को नष्ट करने में मददगार है. और उसे बढ़ने से भी रोकता है.

    जिन देशों में ग्रीन-टी का अधिक सेवन किया जा रहा है वहां लोगों में कैंसर का खतरा कम पाया गया है. इसमें ब्रेस्ट, ओवेरियन यानी ओवरी का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, पेट और त्वचा का कैंसर शामिल है.

    ग्रीन-टी के नुकसान
    - कैफीन और थैनाइन होने के कारण पैदा हो सकती है अनिद्रा की परेशानी.
    - ग्रीन-टी, एक प्रकार का हर्ब है जो सभी को सूट नहीं करता. कई लोगों को इसके सेवन से पेट की समस्या हो सकती है. इसमें मौजूद टैनिन, व्यक्ति को पेट दर्द, उल्टी, कब्ज, एसिडिटी या दस्त की समस्या दे सकता है. इसलिए अगर इसे डायट में शामिल कर रहे हैं तो विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही ऐसा करें.
    - ग्रीन-टी में मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट्स कई बार फूड्स से मिलने वाले आयरन पर रोक लगाते हैं, जिससे शरीर में आयरन की कमी हो सकती है.
    - लंबे समय तक भरा पेट महसूस कराने के कारण भूख लगनी कम हो जाती है. जिससे सही डायट नहीं ले पाते हैं. ऐसे में शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी नहीं मिल पाते हैं.
    - एक दिन में चार कप से ज्यादा ग्रीन-टी का सेवन उल्टी की समस्या पैदा कर सकता है.
    - जिन लोगों को दिल से जुड़ी समस्याएं हैं वे भी ग्रीन-टी के सेवन से बचें. इसका सेवन व्यक्ति को असंतुलित हार्ट बीट की समस्या दे सकता है. इसलिए विशेषज्ञ की सलाह से ही इसे लेना प्रिफर करें.

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