Superfood: गर्भवती महिलाओं में कैल्शियम और आयरन की कमी को करता है पूरा, एक कटोरी मखाना

यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर के मुताबिक 32 ग्राम मखाना में 106 कैलोरी होती हैं. यानी कैलोरी में कम और लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं.

News18Hindi
Updated: December 3, 2018, 5:02 PM IST
Superfood: गर्भवती महिलाओं में कैल्शियम और आयरन की कमी को करता है पूरा, एक कटोरी मखाना
मखाना के फायदे और नुकसान
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Updated: December 3, 2018, 5:02 PM IST
भुना मखाना, एक बहुत ही बेहतरीन स्नैक है. पेट के लिए हल्का, खाने में कुरकुरा और स्वास्थ्य के लिए हेल्दी है. मखाना को अंग्रेजी में ‘फॉक्स-नट’, ‘उर्येल फैरक्स’, ‘गोर्गन नट’ या ‘लोटस सीड’ कहते हैं. इससे नमकीन डिश से लेकर मीठी खीर तक तैयार कर सकते हैं. बेवक्त भूख लगने पर एक बूंद घी में इन्हें भूनकर हल्का नमक छिड़क कर शाम में चाय की चुस्की के साथ इसका लुत्फ उठा सकते हैं. भगवान को भोग लगाने के लिए भी इसे इस्तेमाल में ला सकते हैं.

कमल के फूल में मखाना उत्पन्न होता है. ये फूल का एक अहम हिस्सा होते हैं. ये फूल के बीज होते हैं जिनकी पैदावर सबसे ज्यादा भारत में बिहार क्षेत्र, कोरिया और जापान के अलावा पूर्वी रशिया में होती है.

इंडियन जर्नल ऑफ ट्रडिशनल नॉलेज के अनुसार, मखाना कई प्रक्रियाओं से गुज़रने के बाद ही खाने योग्य होता है. ये स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है.

जानिए कैसे तैयार होता है मखाना?

मखाना बनाना के लिए कुशल कारीगरों की जरूरत होती है. सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक ये पानी के अंदर मौजूद कमल के फूलों से बीज निकालते हैं. ये लंबे से बैंबू यानी डंडे की मदद से ये प्रक्रिया पूरी करते हैं. इकट्ठे किए बीजों को पानी से साफ किया जाता है. इन्हें एक बैग में पैक किया जाता है. अगले दिन इन बीजों को सिलैंडर के आकार वाले डिब्बे में भरकर जमीन पर रोल किया जाता है. जिससे इनकी सतह बराबर हो जाए. कारीगर इन बीजों को अपने घर लाते हैं. वहां उन्हें तकरीबन दो से तीन घंटे के लिए धूप में सुखाते हैं. जिससे मखाना के बीज कुरकुरे हो जाएं.

अगले दिन मखाना के बीज ‘झरना’ (10 प्रकार से इन्हें छलनी से छानना) नामक प्रक्रिया से गुजरते हैं. इस समय तक ये भूरे रंग के बीज ही होते हैं. सफेद मखाना पाने के लिए कारीगर इन्हें भूनते और फ्राई करते हैं. इसके बाद बैंबू में इन्हें भरकर ऊपर से गाय का गोबर लगाकर डंडे की किनारियों को बंद करते हैं. इसके बाद खुरदुरा कपड़ा लगाते हैं जिससे एक प्रकार का तापमान अंदर बना रहे. थोड़ी देर के बाद इन्हें दोबारा फ्राई किया जाता है. ऐसे ही इस प्रक्रिया को तब तक दोहराया जाता है जब तक सफेद मखाना न बन जाए. इसके बाद इन्हें लकड़ी की प्लेट पर सुखाकर मार्केट में बिक्री के लिए भेजा जाता है.

मखाना में होता है क्या-क्या?
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बताई गई मात्रा 100 ग्राम मखाना की है.

कैलोरी- 89
फैट- 0.5 ग्राम
सोडियम- 1 मिलीग्राम
पोटैशियम- 367 मिलीग्राम
कार्बोहाइड्रेट्स- 17 ग्राम
प्रोटीन- 4.1 ग्राम

क्यों कहा जाता है मखाना को सुपरफूड?
मिनरल्स जैसे सोडियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस और कैल्शियम युक्त मखाना स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. बेहतर स्वास्थ्य और तंदरुस्ती के लिए इसमें सभी जरूरतमंद पौष्टिक तत्व मौजूद हैं. वजन घटाने के लिए शाम में इसे स्नैक की तरह ले सकते हैं. इसमें फाइबर होता है जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है. इसलिए इसे सुपरफूड कहा जाता है.

गर्भवती महिलाओं के लिए कैसे फायदेमंद मखाना?
मखाना में कैल्शियम और आयरन पाया जाता है. ये गर्भ में पल रहे शिशु के लिए लाभकारी होते हैं. गर्भवती महिला एक कप मखाना का सेवन रोज़ करें.

मखाना के फायदे
- मखाना में कोलेस्ट्रॉल, फैट और सोडियम की मात्रा कम पाई जाती है. इसलिए बेवक्त भूख लगने पर इसे डायट में शामिल किया जा सकता है.
- ये ग्लूटन-फ्री होता है. प्रोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है और इसमें कार्बोहाइड्रेट्स पाए जाते हैं. जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं.
- अगर सही मात्रा और सही समय पर इन्हें डायट में शामिल किया जाए तो वजन घटाने में लाभकारी हो सकते हैं.
- मखाना में सोडियम की मात्रा कम होती है. वहीं दूसरी ओर इनमें पोटैशियम और मैग्नीशियम काफी ज्यादा होता है जो उच्च रक्तचाप की समस्या को खत्म करता है.
- कैल्शियम की मात्रा पाई जाने के कारण ये हड्डियों और दांतों के लिए लाभकारी होते हैं.
- मखाना में एस्ट्रीन्जेंट गुण पाए जाते हैं जो किडनी से जुड़ी समस्याओं को कम करते हैं.
- इसमें पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण, स्ट्रेस को कम करने और क्रॉनिक इंफ्लेमेशन को शरीर से निकालने में मदद करता है.
- डायबिटीज़ वालों के लिए ये एक अच्छा विकल्प है. ये ग्लाइसेमिक इंडेक्स में कम होता है जो शुगर के मरीजों के लिए फायदेमंद है.
- मखाना में कई ऐसे एंटी-एजिंग एंजाइम्स पाए जाते हैं जो प्रोटीन सेल्स को नष्ट होने से बचाते हैं.

वजन घटाने के लिए किस तरह मददगार मखाना?
- यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर के मुताबिक 32 ग्राम मखाना में 106 कैलोरी होती हैं. यानी कैलोरी में कम और लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं.
- इसमें मौजूद प्रोटीन क्रेविंग्स और ओवरइटिंग से बचाते हैं. इसमें ना के बराबर सैच्यूरेटेड फैट्स होते हैं. जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखते हैं.

वजन घटाने के दौरान किस तरह डायट में शामिल कर सकते हैं मखाना?
- हल्का भूनकर इन्हें चाय के साथ ले सकते हैं.
- पूरी रात के लिए पानी में भिगोकर रखें. सूप, सलाद और करी में इन्हें डालकर इनका सेवन करें.
- चावल की खीर में इन्हें ऊपर से गार्निश कर सकते हैं.
- एक चम्मच देसी घी में इन्हें मीडियम आंच पर भूनें. भुन जाने के बाद. ऊपर से एक चम्मच घी, काली मिर्च और नमक बुरक कर टाइट डिब्बे में भरकर रखें.

मखाना के नुकसान
- अति हर चीज की बुरी होती है. मखाना अगर आप ज्यादा लेते हैं तो ऐसे में इससे एलर्जी, कब्ज, ब्लोटिंग, पेट फूलना और गैस्ट्रिक जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
- ज्यादा मखाना खाने से इंसुलिन लेवल भी बिगड़ सकता है.
- डायबिटीज़ से पीड़ित व्यक्ति मखाना डायट में शामिल करने से पहले एक बार विशेषज्ञ से सलाह ले लें.
- अगर आपको कब्ज की दिक्कत रहती है तो मखाना खाने से बचें.

मखाना स्टोर करके रखने का तरीका
मखाना भूनकर एक टाइट बंद डिब्बे में भरकर रख सकते हैं. सीलने से बचाने के लिए भी ऐसा ही करें.

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