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क्या रात में चमकने वाली एलईडी लाइट से टाइप-2 डायबिटीज का है खतरा, जानिए क्या है सच्चाई

रिसर्च के मुताबिक आर्टिफिशियल आउटडोर लाइट एट नाइट (LAN) शरीर में हार्मोन की गतिविधियों को असमान्य कर रही है जिसके कारण डायबिटीज का जोखिम बढ़ रहा है.

रिसर्च के मुताबिक आर्टिफिशियल आउटडोर लाइट एट नाइट (LAN) शरीर में हार्मोन की गतिविधियों को असमान्य कर रही है जिसके कारण डायबिटीज का जोखिम बढ़ रहा है.

Diabetes and LED light: मॉल, ऑफिस सहित रात को चमचमाने वाली एलईडी और नियॉन लाइट से डायबिटीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

अध्ययन में पाया गया कि रोशनी के अत्यधिक एक्सपोजर से शरीर में हार्मोन का पूरा प्रोफाइल बदल रहा है
जिन लोगों का एक्सपोजर जितना अधिक चमकीली लाइटों के साथ होगा, उन लोगों का बीएमआई उतना ही अधिक होगा.

Light up the risk of diabetes: डायबिटीज की बीमारी सिर्फ खुद की गलतियों के कारण नहीं होती बल्कि अब डायबिटीज होने के कई कारण सामने आने लगे हैं. हालांकि इन सबके लिए भी अप्रत्यक्ष तौर पर मनुष्य ही जिम्मेदार है. एक नए अध्ययन में कहा गया है कि रास्ते में नियॉन लाइट वाले बिलबोर्ड, मॉल या एम्यूजमेंट पार्क में लेजर लाइट बीम, बिल्डिंग में चमचमाती एलईडी लाइटें आदि डायबिटीज के जोखिम को कई गुना बढ़ा रही हैं. रिसर्च के मुताबिक आर्टिफिशियल आउटडोर लाइट एट नाइट (LAN) शरीर में हार्मोन की गतिविधियों को असमान्य कर रही है जिसके कारण डायबिटीज का जोखिम बढ़ रहा है. डायबिटीज में ब्लड शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है जिसके कारण किडनी, हार्ट जैसे आवश्यक अंगों पर दबाव बढ़ता है और इससे कई परेशानियां होने लगती है.

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सर्केडियन रिद्म बिगड़ रहा है
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक चीन के शंघाई में जियाइतोंग यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसीन के शोधकर्ताओं ने अपने अध्यन में लैन और डायबिटीज के बढ़ते जोखिम के बीच संबंधों को रेखांकित किया है. अघ्ययन में पाया गया कि कृत्रिम तरीके से आकाश को चमकाने की गतिविधियों ने डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा दिया है. अध्ययन में पाया गया कि लैन के अत्यधिक एक्सपोजर से शरीर में हार्मोन का पूरा प्रोफाइल बदल रहा है जिस कारण मेलेटोनिन और कॉर्टिकोस्टेरॉन अलग तरह से काम करने लगा है. इससे सर्केडियन रिद्म बिगड़ रहा है. इन सबके परिणामस्वरूप शरीर में शुगर का प्रोडक्शन बढ़ रहा है. अध्ययन में कहा गया कि रात में नियॉन या एलईडी लाइट के काररण ग्लूकोज का मेटाबोलिज्म कम हो रहा है.

रात में ही कॉर्टिसोल हार्मोन प्रभावी हो जाता
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि जो लोग रात में चौंधयाती रोशनी वाले महौल में ज्यादा रहता है, उसमें सामान्य लोगों की तुलना में डायबिटीज का जोखिम 28 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. अध्ययन में चौंकाने वाला तथ्य यह पाया गया कि जिन लोगों का एक्सपोजर जितना अधिक चमकीली लाइटों के साथ होगा, उन लोगों का बीएमआई उतना ही अधिक होगा. यहां तक कि अगर ये लोग फिजिकल एक्टिविटी भी करते हैं, तो भी उनमें डायबिटीज का जोखिम रहता है. यह अध्ययन हाल ही में यूरोपियन एसोशिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबेट्स के जर्नल डायबेटोलॉजिया में प्रकाशित हुआ है.

दरअसल, हमारा बॉडी क्लॉक दैनिक लय के अनुसार प्रतिक्रिया करता है. इस हिसाब से जब अंधेरा होता है तब मेलेटोनिन का उत्पादन बढ़ जाता है, इससे हमें नींद लगती है. सुबह होने पर रोशनी के साथ ही पिट्यूटरी ग्लैंड से कॉर्टिसोल हार्मोन रिलीज होता है जो हमें जगाता है. सुबह-सुबह कॉर्टिसोल हार्मोन ज्यादा होने के कारण शुगर का प्रोडक्शन ज्यादा होता है जिसके कारण सुबह में हम ज्यादा फिजिकली एक्टिव रहते हैं. लेकिन रात में जब हम चोंधयाती रोशनी में रहते हैं तो मेलाटोनिन हार्मोन दब जाता है जबकि कॉर्टिसोल प्रभावी रहता है और वह ज्यादा शुगर के निर्माण को बढ़ावा देता है.

Tags: Diabetes, Health, Health tips, Lifestyle, Pregnancy

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