थकान और सांस की तकलीफ से होती है प्राइमरी माइलोफाइब्रोसिस की शुरुआत, जानें इसके बारे में

जब मरीज की स्थिति गंभीर होने लगती है तो सांस लेने में तकलीफ और थकान होने लगती है.

माइलोफाइब्रोसिस (Myelofibrosis) की शुरुआत बहुत धीमी होती है, जिसके कारण व्यक्ति शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाता है.

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    प्राइमरी माइलोफाइब्रोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें बोन मैरो में स्कार टिश्यू (फाइब्रोसिस) बनने लगता है. बोन मैरो हड्डियों के अंदर पाया जाता है. यह रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है. बोन मैरो में हेमटोपोएटिक स्टेम कोशिका होती है. यह कोशिका सभी रक्त कोशिकाओं (लाल व सफेद रक्त कोशिकाओं) से मिलकर बनी होती है, लेकिन जब इसमें फाइब्रोसिस बनने लगता है, तो ऐसे में हेटोपोएटिक स्टेम कोशिका की वजह से असामान्य कोशिका बनने लगती है और यही असामान्य कोशिकाएं बोन मैरो में से स्वस्थ कोशिकाओं को हटाने लगती हैं, जिसकी वजह से सभी रक्त कोशिकाएं बोन मैरो तक नहीं पहुंच पाती हैं. इस​ स्थिति में कई शारीरिक समस्या बन सकती हैं.

    प्राइमरी माइलोफाइब्रोसिस के लक्षण क्या हैं?

    myUpchar के अनुसार, माइलोफाइब्रोसिस की शुरुआत बहुत धीमी होती है, जिसके कारण व्यक्ति शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाता है, लेकिन जब मरीज की स्थिति गंभीर होने लगती है तो सांस लेने में तकलीफ, थकान, पसलियों के नीचे बाईं ओर दर्द, बुखार, हड्डियों में दर्द, नाक या मसूड़ों से खून आना, भूख कम लगना, वजन कम होना और रात में पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इन संकेतो को अनदेखा नहीं करना चाहिए. इन लक्षणों को नोटिस करने के बाद तुरंत डॉक्टर को बताएं, ताकि सही समय पर इलाज शुरू हो सके.

    माइलोफाइब्रोसिस का कारण

    वैसे तो प्राइमरी माइलोफाइब्रोसिस का सटीक कारण पता नहीं चल पाया है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि एमपीएल, जेएके2, टीईटी2 और सीएएलआर नामक जीन में बदलाव या गड़बड़ी के कारण प्राइमरी माइलोफाइब्रोसिस की समस्या हो सकती है. ये सभी जीन, रक्त कोशिकाओं के विकास में सहायक होते हैं. अगर इन जीन में बदलाव होते हैं, तो इससे रक्त कोशिकाओं के निर्माण पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. इस प्रकार की समस्या आनुवंशिक भी हो सकती है, जिसका अर्थ है माता-पिता से दोषपूर्ण जीन का उनके बच्चे में पारित होना.

    प्राइमरी माइलोफाइब्रोसिस का उपचार

    myUpchar के अनुसार, माइलोफाइब्रोसिस का सटीक कारण पता न होने की वजह से प्राइमरी माइलोफाइब्रोसिस के उपचार में सिर्फ लक्षणों का प्रबंधन किया जा सकता है. हालांकि, कुछ टेस्ट की मदद से इसका पता लगाया जा सकता है. यदि किसी के परिवार में किसी सदस्य को यह समस्या रह चुकी है, तो उन्हें भी इसका टेस्ट अवश्य रूप से करा लेना चाहिए. व्यक्ति को माइलोफाइब्रोसिस के लक्षण दिखने पर उसके उपचार के लिए डॉक्टर कुछ खास दवाइयां जैसे हाइड्रोक्सीयूरिया और बसल्फान दे सकते हैं. इसके अतिरिक्त रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए कुछ हार्मोनल थेरेपी भी दी जा सकती है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, प्राइमरी माइलोफिब्रोसिस पढ़ें.न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

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