होम /न्यूज /जीवन शैली /प्रेग्नेंट महिलाओं को होता है जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा, जानें इसकी वजह और बचाव के तरीके

प्रेग्नेंट महिलाओं को होता है जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा, जानें इसकी वजह और बचाव के तरीके

जेस्टेशनल डायबिटीज से गर्भ में पल रहा बच्चा भी प्रभावित होता है.

जेस्टेशनल डायबिटीज से गर्भ में पल रहा बच्चा भी प्रभावित होता है.

इस तरह की डायबिटीज से गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी बुरा असर पड़ता है. साथ ही प्रेग्नेंट महिला की हेल्थ पर डिलीवरी के बाद ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

जेस्टेशनल डायबिटीज आमतौर पर गर्भावस्था के 24वें सप्ताह के आसपास विकसित होती है.
इस डायबिटीज की वजह से करीब 50% महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज डेवलप हो जाती है.

Gestational Diabetes Prevention: प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ महिलाओं के शरीर में इंसुलिन की कमी की वजह से जेस्टेशनल डायबिटीज विकसित हो सकती है. यह उन महिलाओं को भी हो सकती है, जिन्हें डायबिटीज पहले से न हो. हर साल अमेरिका में 2 से 10% महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान इस डायबिटीज का शिकार हो जाती हैं. जेस्टेशनल डायबिटीज महिलाओं की हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित करने के अलावा गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक साबित होती है. अगर इसका इलाज न कराया जाए तो डिलीवरी के बाद भविष्य में महिलाओं को टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

यह भी पढ़ेंः ब्रेन से जुड़ी हुई है ‘टाइप 3 डायबिटीज’ ! मेंटल हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक

जानें जेस्टेशनल डायबिटीज की वजह
अमेरिकी के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) की रिपोर्ट के मुताबिक प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ महिलाओं का शरीर के लिए जरूरी इंसुलिन नहीं बना पाता और जेस्टेशनल डायबिटीज की परेशानी हो जाती है. इंसुलिन एक हार्मोन होता है जो हमारे ब्लड शुगर के लेवल को मेंटेन करने में मदद करता है. यह डायबिटीज आमतौर पर गर्भावस्था के 24वें सप्ताह के आसपास विकसित होती है. इसलिए 24 से 28 सप्ताह के बीच डायबिटीज का टेस्ट कराना बेहद जरूरी होता है. प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई हार्मोनल चेंजेस हो जाते हैं. इन बदलावों की वजह से शरीर में इंसुलिन रजिस्टेंस बन जाता है और ब्लड शुगर मेंटेन करने के लिए एक्स्ट्रा इंसुलिन की जरूरत होती है. जिन महिलाओं का शरीर ज्यादा इंसुलिन नहीं बना पाता, वे इस डायबिटीज का शिकार हो जाती हैं.

जेस्टेशनल डायबिटीज के लक्षण और खतरे
जेस्टेशनल डायबिटीज के आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते हैं. समय-समय पर टेस्टिंग के जरिए ही इसका पता लगाया जा सकता है. इस डायबिटीज की वजह से करीब 50% महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज डेवलप हो जाती है. हालांकि जरूरी कदम उठाने से डायबिटीज होने के खतरे से बचा जा सकता है. जेस्टेशनल डायबिटीज की वजह से महिलाओं का ब्लड प्रेशर बिगड़ सकता है. ब्लड शुगर लो हो सकती है. बच्चे का वजन काफी बढ़ सकता है जिससे डिलीवरी में दिक्कतें आती हैं.

यह भी पढ़ेंः डार्क स्किन और बीयर पीने वालों को ज्यादा काटते हैं मच्छर ! 

इस तरह करें बचाव

  • प्रेग्नेंसी से पहले अपना वजन कंट्रोल रखें. अगर वजन ज्यादा है, तो उसे घटाने की कोशिश करें. प्रेग्नेंसी के दौरान वजन घटाना खतरनाक होता है. गर्भावस्था में ऐसा बिल्कुल न करें.
  • जेस्टेशनल डायबिटीज प्रेग्नेंसी के 24वें सप्ताह के आसपास विकसित होती है. ऐसे में 24 से 28 सप्ताह के बीच डायबिटीज का टेस्ट कराएं. इससे पहले भी टेस्ट कराया जा सकता है.
  • हेल्दी डाइट लेने से आप इस समस्या से बच सकते हैं. इसके अलावा प्रेग्नेंसी के दौरान एक्टिव रहना बहुत जरूरी होता है. हल्की-फुल्की फिजिकल एक्टिविटी इस बीमारी का खतरा कम कर देती हैं.
  • किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से मिलें और उसकी सलाह के अनुसार दवाइयां लें. ऐसी कंडीशन में घरेलू नुस्खे आजमाने की कोशिश न करें.

Tags: Diabetes, Health, Lifestyle, Pregnancy, Trending news

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें