#काम की बात : हर बार मास्‍टरबेट करने के बाद बहुत कमजोरी महसूस होती है

सेक्‍स सलाह
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जहां तक कमजोरी का सवाल है तो आपको थोड़ा शरीर का ध्‍यान देना चाहिए. पौष्टिक आहार लीजिए और व्‍यायाम करिए. कमजोरी स्‍वास्‍थ्‍यगत कारणों से हो सकती है, मास्‍टरबेट करने से इसका कोई संबंध नहीं

  • Last Updated: August 23, 2018, 12:11 PM IST
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प्रश्‍न : मेरी उम्र 26 साल है. मैं पिछले कई सालों से हस्‍तमैथुन कर रहा हूं. मैं जब भी हस्‍तमैथुन करता हूं तो उसके बाद मुझे बहुत कमजोरी महसूस होती है. क्‍या मुझे कोई बीमारी हो गई है?

उत्‍तर : नहीं. आपको कोई बीमारी नहीं हुई है और न ही मास्‍टरबेशन या हस्तमैथुन कोई बीमारी है. यह बुरी बात भी नहीं है. यह बहुत प्राकृतिक क्रिया है. लेकिन हमारे यहां सेक्स एजूकेशन को ज्‍यादा महत्‍व नहीं दिया जाता. स्कूल और कॉलेज में कभी इस बारे में किशोर-किशोरियों को कोई शिक्षा नहीं दी जाती. इसलिए हमें सही-गलत का पता नहीं चलता है. ऊपर से तथाकथित धर्मगुरु अपने प्रवचनों और पुस्‍तकों में कहते हैं कि एक बूंद वीर्य का मतलब है 100 बूंद खून और एक बूंद खून का मतलब है बहुत सारा पौष्टिक आहार.

धर्मगुरु अपनी पुस्तक में वीर्य को पुरुष का तेज बताते हैं. अब इस तरह की सांस्‍कृतिक परवरिश के बाद और ऐसी पुस्‍तकों को पढ़ने और सुनने के बाद जब भी कोई हस्‍तमैथुन करता है तो उसके मन में एक ही ख्‍याल आता है कि मैंने अपनी सारी शक्ति बर्बाद कर दी. उसके मन में अपराध बोध जन्‍म लेता है.
साथ ही सेक्‍स हमारे समाज में एक प्रतिबंधित विषय भी है. न उसके बारे में सही शिक्षा दी जाती है, न बात की जाती है और न ही उससे जुड़ी शंकाओं और सवालों का कहीं से हल मिलता है. ऐसे में मन में अपरोध बोध होना और नकारात्‍मक किस्‍म के विचार आना बहुत स्‍वाभाविक है.
जबकी इसके पीछे की वैज्ञानिक हकीकत ये है कि वीर्य हमारे शरीर में चौबीसों घंटे बनता रहता है. आप जाग रहे हों, सो रहे हो या फिर इस वक्‍त, जब आप इस आर्टिकल को पढ़ रहे हैं, उस समय भी आपके अंडकोष में वीर्य बनने की प्रक्रिया चालू है. अगर आप हस्तमैथुन नहीं करेंगे या फिर शारीरिक संबंध नहीं बनाएंगे तो वीर्य अपने आप रात को नींद में निकल जाएगा. यह एक बहुत सामान्‍य प्रक्रिया है. युवावस्‍था की दहलीज पर पांच रखते ही शरीर में अपने आप हॉर्मोनल बदलाव होते हैं. इसी बदलाव का नतीजा है कि लड़के और लड़कियां विपरीत लिंग की तरफ आकर्षित होते हैं. दैहिक बदलावों को लेकर जिज्ञासा होती है. शरीर में आ रहे बदलावों की अपनी प्राकृतिक वजह है. इसे वैज्ञानिक ढंग से समझने की जरूरत है, न कि पोंगापंथी किताबों पर विश्‍वास करके अपने मन में अपराध बोध पालने की. मास्‍टरबेट या हस्‍तमैथुन बहुत सहज, प्राकृतिक क्रिया है. इसलिए इसे लेकर चिंतित या परेशान होने की जरूरत नहीं है. मन में किसी प्रकार का अपराध बोध पालने की भी जरूरत नहीं है. यह कोई बीमारी नहीं है, इसलिए इसका इलाज भी नहीं है.



जहां तक कमजोरी का सवाल है तो आपको थोड़ा शरीर का ध्‍यान देना चाहिए. पौष्टिक आहार लीजिए और व्‍यायाम करिए. कमजोरी स्‍वास्‍थ्‍यगत कारणों से हो सकती है, मास्‍टरबेट करने से इसका कोई संबंध नहीं.

(डॉ. पारस शाह सानिध्‍य मल्‍टी स्‍पेशिएलिटी हॉस्पिटल, अहमदाबाद, गुजरात में चीफ कंसल्‍टेंट सेक्‍सोलॉजिस्‍ट हैं.) 

अगर आपके मन में भी कोई सवाल या जिज्ञासा है तो आप इस पते पर हमें ईमेल भेज सकते हैं. डॉ. शाह आपके सभी सवालों का जवाब देंगे.
ईमेल – Ask.life@nw18.com

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